Home > साथी की ख़ूबी > गीत की कविता असाध्यवीणा की तरह हमारे कौशल का इम्तहान लेती हुई दिखती है

गीत की कविता असाध्यवीणा की तरह हमारे कौशल का इम्तहान लेती हुई दिखती है

गीत चतुर्वेदी।
गीत चतुर्वेदी।
  • साथी की ख़ूबी
    प्रसिद्ध लेखक, कवि ओम निश्चल गीतकार गीत चतुर्वेदी कविताओं के अनुवाद और अद्भुत कविताओं के लिए जाने जाते हैं।के बारे बता रहे हैं। गीत मुम्बई रहते हैं और ओम जी दिल्ली। गीत साहित्य जगत का युवा चेहरा हैं, विदेशी 
    —-//—-
    मिलने का मुहूर्त और मैत्री ।
    न उनकी कविता अपने समय से ओझल होती है न अपनी परंपरा से प्राप्त सबसे उर्वर कल्पलनाशील कविता को अपना दयनीय चेहरा दिखाती है। गीत की कविता किन्तु केवल कोमल कोमल गुलाबी पंखुड़ियों की तरह नहीं, वह असाध्यवीणा की तरह हमारे कौशल का इम्तहान लेती हुई भी दिखती है। जैसा कि कभी जायसी ने कहा है, तपनि मृगशिरा जे सहहिं आर्द्रा ते पलुहन्त। उनकी कविता के तल पर पहुंचने के लिए एक सुपात्रता चाहिए। आज की स्फीति में बही चली आती कविता के कीचड़ कांदो के बीच उनकी कविता अपनी चमक और धमक अपनी तरह से बरकरार रखती है।

गीत से नहीं, गीत की कविता से मैत्री है। मैंने उनके साथ कभी एक पल भी नही बिताया, न चाय पान की संगत की। उन्‍हें सदैव एक पेड़ की तरह फूलते फलते पाया। फिर भी ऐसे लगता है उन्‍हें कई सदियों से जानता हूँ। जानता हूँ समय कहां किसी को अवसर देता है साथ बैठने का। उसका अपना मुहूर्त होता है। उस मुहूर्त को अपनी अभिलाषाओं में बसाए मैं गीत को नीरज के इस गीत के साथ याद करता हूँ:

मिलना अपना सरल नही है
फिर भी यह सोचा करता हूँ
गर न आदमी प्‍यार करेगा
जाने भुवन कहां पर होगा?

 

Share this: