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मैं कुलदीप नैय्यर नहीं बन सकता मैं अरुण शौरी नहीं बन सकता तो गीतकार बनूंगा: इरशाद कामिल

इरशाद क़ामिल
इरशाद क़ामिल
इरशाद क़ामिल जो कभी पत्रकार थे, पर उन्हें लगा की वो पत्रकारिता में बड़ा नाम नहीं बन सकते, तब उन्होंने तय किया मुम्बई जाना है और गीतकार बनना है। आज क़ामिल मुम्बई में स्थापित हैं और बॉलीवुड में लोकप्रिय गीतकार हैं। जब वी मेट, चमेली,लव आजकल, रॉकस्टार, आशिकी 2 और रांझणा के गाने इरशाद ने लिखे।।  कैसे वो पत्रकार से गीतकार बने बता रहे वरिष्ठ पत्रकार ईश मधु। 
ऐसे एक पत्रकार बना गीतकार
इरशाद कामिल के साथ यह तस्वीर जयपुर में शाम से बदलती रात के झुरमुट की है। इस समय बॉलीवुड के नंबर एक गीतकार इरशाद कामिल जब जयपुर आये तो मैं चंडीगढ़ की पुरानी यादों में चला गया जहाँ इरशाद के साथ बितायी कई सुरीली रातें आज भी मेरे ज़ेहन में लिपटी पड़ी हैं।
चंडीगढ़ में मैं अकेला रहता था। कई बार रात को अख़बार के दफ्तर से काम निबटा कर इरशाद को अपने साथ घर ले जाता। तब इरशाद अपने ही लिखे गाने तरन्नुम के साथ मधुर आवाज में सुनाया करते थे। तब तक हमें अंदाज़ भी नहीं था कि पंजाब के गाँव मल्हैर कोटला का यह सीधा सा लड़का कभी मुम्बई में जा कर अपने गीतों से झंडे गाड़ेगा।
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इरशाद कामिल जब जयपुर आ रहे थे तो रास्ते से ही उन्होंने मुझे फोन किया-“जयपुर में मुझे दाल बाटी खानी है।”
खाने के लिए जब हम जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम पहुंचे तो वहां कुछ प्रेस के साथी उनसे इंटरव्यू करने आ गए। वहाँ उन्होंने प्रेस के सामने मुझ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया कि किस तरह वे चंडीगढ़ से मुम्बई पहुंचे।
किस्सा दरअसल यह है कि मैं जब चंडीगढ़ में जनसत्ता का ब्यूरो चीफ था, तब इरशाद वहां रिपोर्टर थे। हर अख़बार में एक “मॉर्निंग मीटिंग” होती है जिसमें रिपोर्टर्स को काम बांटा जाता है। मैं जब एक दिन ऐसी ही मीटिंग ले रहा था तो मैंने इरशाद से पूछा-“तुम आज कहाँ जाओगे?” इस पर इरशाद का जवाब था-“मैं आज इस्तीफ़ा देकर जाऊँगा।” उसके इस जवाब ने सब को चौंका दिया। मैंने इरशाद से कहा-“मीटिंग के बाद अलग से मिलना।”
मुझे लगा वो एक इश्क में निराश होकर वापस गाँव भाग रहा है। मैंने उसे समझाया तो वह बोला-“सर ऐसी कोई बात नहीं है।”
“फिर क्या बात है”- मैंने उससे पूछा।
उसका जवाब था-“मैंने रात को मेरे दिल से पूछा कि क्या मैं कुलदीप नैयर बन सकता हूँ, तो जवाब आया-नहीं। फिर मैंने पूछा कि क्या मैं अरुण शौरी बन सकता हूँ तो जवाब आया-नहीं। मैंने अब तय किया है कि मुझे तो गीतकार ही बनना है। मेरे पास दो हज़ार रु. हैं और मैं मुम्बई जा रहा हूँ।”
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