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मीडिया में आने वाला समय विशेषज्ञता का होगा : सईद अंसारी

टीवी पत्रकार सईद अंसारी सत्रारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए।
टीवी पत्रकार सईद अंसारी सत्रारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सत्रारंभ कार्यक्रम

भोपालः माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सत्रारंभ कार्यक्रम में शुभारम्भ् के बाद तीन सत्र आयोजित हुए। ‘टीवी न्यूज़ का भविष्य’ विषय पर हुए सत्र को संबोधित करते हुए आज तक के न्यूज़ एंकर श्री सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में संवेदनशील होना बहुत आवश्यक है। दूसरों के दर्द, तकलीफ को महसूस करने वाला व्यक्ति ही सफल और अच्छा पत्रकार होता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सिर्फ पेशा नहीं होना चाहिए,बल्कि मिशन होना चाहिए क्योंकि मिशन है तो ही मीडिया इंडस्ट्री में लम्बे समय तक टिका जा सकता है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को लेकर उन्होंने कहा की टीवी न्यूज़ में भविष्य उज्ज्वल है।आने वाले समय में विषय आधारित चैनल होंगे। स्कोप बढेगा लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बढेगी, इसके लिए उन्हें तैयार होना चाहिए। आज टेलीविज़न न्यूज़ में भाषा और खबरों की समझ होने के साथ सृजनात्मकता होना भी आवश्यक है। एक टेलीविज़न न्यूज़ चैनल में लगभग 20 विभाग होते है जिनके लिए मानव संसाधन चाहिए। मीडिया में आने वाला समय विशेषज्ञता का होगा। विद्यार्थियों को प्रयास करना चाहिए कि इंटर्नशिप के दौरान ही वह अपनी नौकरी पक्की कर ले। टीवी न्यूज़ के भविष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर शुरू हुए न्यूज़ चैनल के कारण पत्रकारों के लिए काफी अवसर उपलब्ध है।

मुम्‍बई के जाने माने अपराध रिपोर्टर श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि सेना का जवान और कलम के सिपाही अर्थात पत्रकार कभी सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) नहीं होते। पत्रकार के लिए कोई निश्‍चित समय सीमा नहीं होती उसको 24 घंटे काम करना पड़ता है। श्री अग्रवाल ने उक्‍त विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यलय के सत्राराम्‍भ समारोह के दूसरे दिन ‘आतंकवाद, अपराध और पत्रकारिता’ विषयक सत्र में व्‍यक्‍त किए।

उन्‍होंने कहा कि पत्रकार को अराजक लेकिन स्‍वअनुशासित होना चाहिए। उसे आम नागरिक एवं समाज के प्रति जिम्‍मेदार होना चाहिए। आप जो भी खबर लिखें उसकी पूरी तरह से जांच जरूर कर लें। वाट़सएप से मिली खबर पर समाचार न लिखें। पत्रकार का किसी मामले में स्‍वयं का भी विचार होना चाहिए। पत्रकारिता के विषय को लेकर उन्‍होंने कहा कि मीडिया संस्‍थान उन्‍हीं खबरों को देना चाहते हैं जो टीआरपी एवं प्रसार संख्‍या बढ़ाएं। मीडिया मुददों पर लोगों के मन में छवि निर्माण करता है और यह छवि आगे भी बनी रहती है। पूरे विश्‍व में चार विषय – धर्म, वासना, अपराध और मनोरंजन बिकते हैं। भारत में क्रिकेट एक ऐसा विषय है जिस पर खबरें बिकती हैं। उन्‍होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता अखबार की जरूरत है।
मीडिया में सरकार के अधिकारी जो बताते हैं वह आधा सच होता है। शेष सच को बताने की जिम्‍मेदारी पत्रकार की होती है। उन्‍होंने युवा पत्रकारों को प्रेरित किया कि वे न्‍यू मीडिया में काम करें और उसका स्‍तर भाषा और कंटेंट से बढ़ाएं क्‍योंकि जितना ज्‍यादा यह माध्‍यम सफल होगा उतना ज्‍यादा ही लोगों के लिए सदुपयोगी होगा। विद्यार्थियों को मीडिया के काम करने के मंत्र बताते हुए उन्‍होंने कहा कि हर खबर की सत्‍यता की जांच करना चाहिए।
सत्र का संचालन मीडिया प्रबंधन विभाग के अध्‍यक्ष डॉ अविनाश वाजपेयी ने किया। डॉ मनीष माहेश्‍वरी ने श्री अग्रवाल का सम्‍मान किया।

देश के राष्ट्रपति के पूर्व सचिव रहे डॉ. विजय अग्रवाल ने कहा कि समय, ईश्वर की तरह है और स्वयंभू है, जिसका निर्माण किसी ने नहीं किया। समय प्रबंधन कुछ भी नहीं है, स्वयं का प्रबंधन ही समय प्रबंधन होता है।

संत्ररम्भ में फिल्म् निदेशक श्री सुदीप्तो सेन ने फिल्मी निर्माण में करियर विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि फिल्म मनुष्य के मस्तिष्क और भावनाओं का विस्ता्र है, जो चीजें हम रोज महसूस करते हैं उसे सिनेमा आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण में करियर के लिए हमें इस तरह से तैयार होना होता है कि फिल्म मैकिंग उद्योग हमें चुने। मशीन को चलाकर फिल्म का निर्माण नहीं किया जा सकता है। 122 वर्ष लम्बे इतिहास में सिनेमा पूरी तरह बदल गया है। दुनिया की नजरों में भारत बहुत बड़ा बाजार है। सत्रारंभ मौके पर कैलाश सत्यार्थी विशेषरूप से मौजूद रहे।

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