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मीना कुमारी स्वर्ग में मुस्कुरा रही होंगी, विनोद मेहता से ये सुन कि तुमपर लिखकर ही मरा मैं

पत्रकार विनोद मेहता द्वारा लिखी मीना कुमारी की जीवनी
पत्रकार विनोद मेहता द्वारा लिखी मीना कुमारी की जीवनी

विनोद मेहता आज मीना कुमारी से जरूर बोले होंगे की तुम पर लिखकर ही मरा

 

मीना कुमारीः क्लासिकल बॉयोग्राफी के लिखने के पीछे भी बड़ा मार्मिक वृतांत है। कहा जाता था मीना कुमारी के मेकअप आर्टिस्ट ने रोते हुए पत्रकार विनोद मेहता से आग्रह किया था कि मीना कुमारी की जीवनी आप जरूर लिखें। ताकि दुनिया उनको अच्छे से जान पाए और तब ये जीवनी विनोद मेहता ने लिखनी शुरू की।

 

विनोद मेहता ने एक वादा निभाया. जो उन्होंने दस साल तक मीना कुमारी का मेकअप करने वाले मेकअप मैन से विदा लेते समय किया था, जिसने हाथ जोड़कर और आंखों में आंसू भरकर विनोद मेहता से कहा था, ‘उनके बारे में अच्छी किताब लिखिएगा.’

 

मीना कुमारी
मीना कुमारी

1 अगस्त 1932 को दादर मुंबई में जन्मी महजबीं बानो जिसे दुनिया भारतीय फिल्म इतिहास की प्रसिद्ध अभिनेत्री मीना कुमारी के नाम से जानती है। मीना कुमारी वो सितारा थीं जिनके सामने दिलीप कुमार डॉयलॉग्स भूल जाते थे।

आज मीना कुमारी का जन्मदिन है। दुनिया उन्हें याद कर रही। मात्र 39 वर्ष की आयु में 31 मार्च 1972 को उनका निधन हो गया। दुख और दर्द से भरी मीना कुमारी की जीवनी वरिष्ठ पत्रकार विनोद मेहता ने लिखी थी। जो हार्पर कॉलिन्स से 1972 में प्रकाशित हुई। आज इसी जीवनी के कुछ अंश आपके लिए यहां दे रहे हैं।

उनकी जीवनी मीना कुमारीः क्लासिकल बॉयोग्राफी के लिखने के पीछे भी बड़ा मार्मिक वृतांत है। कहा जाता था मीना कुमारी के मेकअप आर्टिस्ट ने रोते हुए पत्रकार विनोद मेहता से आग्रह किया था कि मीना कुमारी की जीवनी आप जरूर लिखें। ताकि दुनिया उनको अच्छे से जान पाए और तब ये जीवनी विनोद मेहता ने लिखनी शुरू की। इससे पहले विनोद मेहता बॉम्बे डॉयरी लिख चुके थे। अगर रूहें हैं और उनका कोई अस्तित्व है तो मीना कुमारी से जरूर विनोद मेहता कह रहे होंगे कि मैं तुम पर लिखकर ही मरा और ये सुन मीना कुमारी मुस्कुरा रही होंगी। दोनों का ये संवाद स्वर्ग में ही संभव है क्योंकि ये दोनो ही अब नहीं हैं।

मीना कुमारी की जीवनी से

मीना कुमारी की जीवनी लिखने वाले मशहूर पत्रकार विनोद मेहता एक जगह लिखते हैं, ‘बहुत से लोगों ने मीना कुमारी का शोषण किया. ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने आर्थिक रूप से उसका शोषण किया. और भी बुरे वह लोग हैं जिन्होंने उसका शारीरिक शोषण और संवेदनाओं का शोषण किया. उनके दिल पर न मिटने वाले जख्मों के निशां हमेशा के लिए छोड़ गए.’

धर्मेंद्र के बारे में विनोद मेहता लिखते हैं, ‘उनके जीवन में कई मर्द थे, जिनमें धर्मेंद्र नंबर एक पर थे. ऐसा महसूस होता है उन्होंने भी खुद को प्रोड्यूसर्स की निगाहों में चढ़ाने के लिए मीना कुमारी का प्रयोग किया और जब यह काम पूरा हो गया तो उन्हें छोड़ दिया.’

विनोद अपनी किताब में ये भी जिक्र करते हैं, ‘मीना कुमारी को बच्चों से बड़ा लगाव था. एक जगह जिक्र ये भी आता है कि किस तरह वह अपनी दोस्त नर्गिस के बच्चों का खयाल रखती थीं. मीना कुमारी को कमाल अमरोही से बच्चा न मिलने का बड़ा रंज था. दो ऐसी घटनाएं भी मिलती हैं जब उन्हें गर्भपात करवाना पड़ा.’

विनोद मेहता इस सच्चाई की छानबीन करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि मीना कुमारी को अपने बच्चे की मां के रूप में देखना कमाल अमरोही को पसंद नहीं था. वो शिया वर्ग की उच्च ‘सैयद’ जाति से आते थे और मीना कुमारी एक डांसर की बेटी थी. ये फर्क उनकी मुहब्बत से बड़ा था शायद.

विनोद मेहता ने मीना कुमारी पर एक अद्भुत किताब लिखकर, जिसे ‘हार्पर कॉलिन्स’ ने प्रकाशित किया है उनके प्रशंसकों को उनके कई रूपों से रुबरू कराया.

विनोद मेहता ने एक वादा निभाया. जो उन्होंने दस साल तक मीना कुमारी का मेकअप करने वाले मेकअप मैन से विदा लेते समय किया था, जिसने हाथ जोड़कर और आंखों में आंसू भरकर विनोद मेहता से कहा था, ‘उनके बारे में अच्छी किताब लिखिएगा.

 

अच्छी शायरी-गजलें लिखती थीं मीना कुमारी

मीना कुमारी बहुत अच्छी शायरी लिखती थीं। उन्होंने अपनी सभी गजलें मरने से पहले गुलजार को सौंप दी थीं। जिसे बाद में गुलजार से प्रकाशित भी करवाया। मीना कुमारी की लिखी कुछ गजले

 

…आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता…

आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता

जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता

जब ज़ुल्फ़ की कालक में घुल जाए कोई राही

बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता

हँस हँस के जवाँ दिल के हम क्यूँ चुनें टुकड़े

हर शख़्स की क़िस्मत में इनआ’म नहीं होता

दिल तोड़ दिया उस ने ये कह के निगाहों से

पत्थर से जो टकराए वो जाम नहीं होता

दिन डूबे है या डूबी बारात लिए कश्ती

साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता

 

….हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह…

हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह

चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह

तुम्हारा नाम है या आसमान नज़रों में

सिमट गया मेरी गुम-गश्ता ज़िंदगी की तरह

कोहर है धुँद धुआँ है वो जिस की शक्ल नहीं

कि दिल ये रूह से लिपटा है अजनबी की तरह

तुम्हारे हाथों की सरहद को पा के ठहरी हुईं

ख़लाएँ ज़िंदा रगों में हैं सनसनी की तरह

 

..उदासियों ने मिरी आत्मा को घेरा है…

उदासियों ने मिरी आत्मा को घेरा है

रू पहली चाँदनी है और घुप अंधेरा है

कहीं कहीं कोई तारा कहीं कहीं जुगनू

जो मेरी रात थी वो आप का सवेरा है

क़दम क़दम पे बगूलों को तोड़ते जाएँ

इधर से गुज़रेगा तू रास्ता ये तेरा है

उफ़ुक़ के पार जो देखी है रौशनी तुम ने

वो रौशनी है ख़ुदा जाने या अंधेरा है

सहर से शाम हुई शाम को ये रात मिली

हर एक रंग समय का बहुत घनेरा है

ख़ुदा के वास्ते ग़म को भी तुम बहलाओ

इसे तो रहने दो मेरा यही तो मेरा है

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