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यात्रा संस्मरणः इस शहर में एक बेचैनी है, ख़ाली सड़कों पर अकेले चलते हुए भी शांति नहीं है

अनुराधा बेनीवाल एथेंस में

अनुराधा बेनीवाल मूलतः हरियाणा रोहतक की हैं, लंदन रहती हैं। लंदन में चेस की कोच हैं। हाल ही चर्चित किताब आजादी मेरा ब्रांड की लेखिका हैं। विश्व भ्रमण करती रहती हैं। उनकी किताब भी घुमक्कड़ी पर ही थी। आजकल एथैंस और इंस्तानबुल की यात्रा पर हैं। घूमती हैं साथ साथ लिखती भी जाती हैं। एथेंस के बारे में पढ़िए उनकी कलम से।

 

इस शहर में एक बेचैनी है। ख़ाली सड़कों पर अकेले चलते हुए भी शांति नहीं है। आवाज़ें हैं, बहुत सारे संवाद हैं, बहुत सारे लोग बहुत कुछ कह रहे हैं। ये भाषा ना समझते हुए भी मुझे लगता है कोई लगातार मुझसे कुछ कहने की कोशिश कर रहा है। एक व्याकुलता है। एक उपद्रव है। यहाँ चलना थकाने वाला है।

 

पहले दिन के इम्प्रेशनस।

आज मेरे होस्ट मने मुझे Athens की कुछ बढ़िया नॉन-टुरिस्टी जगहों के दर्शन कराये और ट्रेडिशनल ग्रीक खाना खिलाया। मेरे हज़ार मनाने पर भी मुझे बिल नहीं देने दिया। यहाँ के मर्द काफ़ी हमारे वालों जैसे हैं कुछ मामलों में। जब आप अपनी मर्ज़ी होते हुए भी बिल ना दे या शेयर कर पाओ तो ग़ुस्सा आता है और चिड भी मचती है के क्या बकवास है!! लेकिन वो अड़ा रहा, और मैंने डिसाइड किया के अब इसके साथ आगे से खाने नहीं जाऊँगी।

एक अजीब सा प्राइड है लोगों में। जब सुबह भी मैंने वेटर को टिप दी तो वो उठा के नहीं लेके गया, जब तक मैं टेबल पर रही तब तक टिप के सिक्के यूँही टेबल पर पड़े रहे। भिखारी भी टेबल पर दो सेकंड से ज़्यादा नहीं रुका! जब तक आपने अपना मन बनाया वो जा चुका था।

अब चार साल पहले जैसा हाल नहीं है, मैं आराम से किसी भी रेस्तराँ में खाना खा लेती हूँ, बिना बिल की ज़्यादा परवाह किये। चार साल पहले के जैसे साँस नहीं अटकती के जाने कितना बिल आ जायेगा। इसमें अपना ही मज़ा भी है और बोरियत भी। सस्ती जगहें ढूँढने के लिये मिलों चलने वाला रोमांच नहीं है। लेकिन सुकून से कॉफ़ी पिते हुए शहर को निहारने का सुख भी है।

समय के साथ यात्रा अब रोमांच से ज़्यादा सुकून देने वाली चीज़ बन गयी है।

 

एथेंस सुकरात का शहर है, सदियां गवाह हैं।
एथेंस सुकरात का शहर है, सदियां गवाह हैं।

दूसरा दिन – शहर एथेंस

आज ख़ूब सारे क़िस्से हुए। सबसे सुंदर जो हुआ वो लिखती हूँ।

यहाँ एक नया चलन शुरू हुआ है जहाँ लोकल लोग (गाइड नहीं) टुरिस्ट्स को अपने शहर की सैर कराते हैं। एक वेब फ़ोरम है जहाँ टुरिस्ट अपनी रुचि की चीज़ें मेन्शन करते हैं जैसे ‘इतिहास’, ‘कला’, ‘खाना’, ‘साइट्स’ आदि और टूर के लिए रिक्वेस्ट डालते हैं। उन इंट्रेस्टस के हिसाब से लोकल लोग रिक्वेस्ट स्वीकार करते हैं और टुरिस्टस को अपना शहर दिखाते हैं, अपने हिसाब से। वो कोई क्वॉलिफ़ायड गाइड नहीं होते, लेकिन अपने शहर को जानते हैं।

मैंने माडर्न हिस्ट्री, संस्कृति और खाने को अपना इंट्रेस्ट बताया और मुझे लोकल गाइड मिला, दिमित्रि। Deme Triga ने कहा, “जाने तुम्हें कुछ बता पाउँगा के नहीं, लेकिन टूर के अंत तक तुम्हें एक ग्रीक जैसा महसूस ज़रूर करा पाउँगा।”

और वही हुआ। मैंने शहर के ऐसे हिस्से देखे जो किताबों में दर्ज नहीं हैं। यहाँ का ‘गेटो’ जहाँ ग़रीब आप्रवासी रहते है, रेफ़्यूजी जहाँ रहते हैं, यहाँ के ग़ैर क़ानूनी वेश्यालय, और लोकल लोग जहाँ खाना खाते हैं। शाम को दिमित्रि की एक दोस्त भी मिलने चली आई और एक शानदार ग्रीक शाम हमने साथ बिताई।

Evi Tsatsareli और Deme दोनो वॉलुंटीयर फ़ायर फ़ाइटरस भी हैं!

कितना और कुछ है शेयर करने को! कल live हो जाऊँ?

 

 

इस शहर में एक बेचैनी है
इस शहर में एक बेचैनी है

इस शहर में एक बेचैनी है

इस शहर में एक बेचैनी है। ख़ाली सड़कों पर अकेले चलते हुए भी शांति नहीं है। आवाज़ें हैं, बहुत सारे संवाद हैं, बहुत सारे लोग बहुत कुछ कह रहे हैं। ये भाषा ना समझते हुए भी मुझे लगता है कोई लगातार मुझसे कुछ कहने की कोशिश कर रहा है। एक व्याकुलता है। एक उपद्रव है। यहाँ चलना थकाने वाला है।

जिस देश का गोल्डन युग पाँच सौ बी. सी. पहले था, जिसने तब से सिर्फ़ आक्रमण, आधिपत्य और आर्थिक अवसाद देखा है, उस देश में ये अशांति शायद जायज़ है।

फिर भी लोगों में एक लेड-बैक-पना है, जो सिर्फ फ़िलॉसफ़रस में हो सकता है। ये सिकंदर का देश है, ये सुकरात भी देश है। ये होमर का देश है, ये ऐरिस्टोटल और प्लेटो का भी देश है।

कॉफ़ी पे घंटो बैठ के चर्चा करना यहाँ के लोगों का फ़ेवरेट काम है।

 

एथेंस की आखिरी शाम अजनबी यात्रियों के साथ
एथेंस की आखिरी शाम अजनबी यात्रियों के साथ

आख़री शाम – एथेंस

अंजाना शहर हो, रात का वक़्त हो, पाँच अजनबी लड़कों के साथ आप वाइन पिते हुए कुछ समय बितायें, वो अजनबी भाषा में बात करते हुए ठहाके लगायें और आप भी साथ मुस्कुराएँ, तीन लड़के विदा लें और बस दो रह जाएँ, फ़िर आप कुछ और अनजानी गलियों से गुज़रते हुए अलग-अलग जगहों पे जाएँ, जहाँ से अक्रॉपलिस का नज़ारा ख़ास हो, फिर आधी रात को ग्रीक योग़र्ट के साथ कबाब खाएँ और रेस्तराँ में ज़ोर ज़ोर से ठहाके लगाएँ। इस तरह एक दूसरे की टाँग खींचते, हँसते, गाते, झूमते, आप रात लगभग एक बजे घर आएँ। सब इतने थके हों के गुड नाइट बोल के अपने अपने कमरों में आराम फ़रमाएँ। सुबह होने तक।

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