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6 घंटे इंतजार के बाद 2 मिनट के लिए मिले दीपक चौरसिया

प्रसिद्ध टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया सुधीर पांडे की बेटी के साथ लखनऊ के एक अस्पताल में
प्रसिद्ध टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया सुधीर पांडे की बेटी के साथ लखनऊ के एक अस्पताल में
  • इंडिया न्यूज नोएडा में प्रोड्यूसर सुधीर कुमार पांडे दीपक चौरसिया से जुड़ी अपनी यादें साझा कर रहे हैं। 

 

‘सर आपको याद नहीं है लेकिन आपसे मिलने के लिए मुझे बहुत पापड़ बेलने पड़े थे और सिर्फ़ 2 मिनट की मुलाक़ात हुई थी लेकिन मेरी बिटिया कितना बड़ा भाग्य लेकर जन्मी जो पहले ही दिन आपको आशीर्वाद के लिए अपने पास बुला लायी वो भी 500 किलोमीटर दूर से’ ।

 

मैं साल 2009 अपने जन्मदिन पर पहली बार दीपक sir से मिलने स्टार न्यूज़ (अब abp न्यूज़) के दफ्तर गया था । मेरे साथ पुराने मित्र प्रवीन पाठक भी थे । मेरे प्रिय और बहुत बड़े पत्रकार स्वर्गीय आलोक तोमर सर ने दीपक सर को फ़ोन करके बोला था ‘एक लड़का तुमसे मिलने की जिद्द करता है भेज दूँ, अपना बच्चा है’ , जवाब में मिलने का मौका मिला । शाम का समय था न्यूज़ रूम में चुनावी बहस चल रही थी । मैं और प्रवीन एक कोना पकड़ कर बैठ गए । करीब 6 घंटे बाद प्रोग्राम खत्म हुआ और दीपक सर ने रात करीब 11 बजे मिलने को बुलाया । किसी कारण से सिर्फ 2 मिनट की मुलाक़ात के बाद सर निकल गए । मैं बहुत निराश था जन्मदिन होने के बावजूद खाना नहीं खाया । खैर, वक़्त आगे खिसका साल 2013 में दीपक जी और राणा जी के साथ इंडिया न्यूज से जुड़ा । यहां काम और मेहनत ने साथ दिया । घटनाचक्र घूमा और बेहद सफल शो ‘जीनियस का टेस्ट लाइव’ में PCR से एक प्रोड्यूसर के नाते दीपक सर को कई दिन तक कमांड दी इसके बाद भी कई शो दीपक सर के साथ करते गए । इस बीच साल 2014 के अप्रैल महीने में ‘मोदी एक खोज’ नाम का बेहद कठिन प्रोजेक्ट पूरा किया । शो के बाद मैं , शकील अनवर और मुश्ताक शाह साथ खड़े कॉफी पी रिलैक्स हो रहे थे तभी दीपक सर ने दूर से आवाज़ देकर मुझे बुलाया और शो के साथ-साथ मेरी कुछ जमकर तारीफ कर दी जिसको यहां लिखना ठीक नहीं आत्ममुग्धता लगेगी। मेरी सारी थकान मिट गई, नई ऊर्जा से भर गया। फिर वैसे ही दीपक सर और राणा सर के मार्गदर्शन में काम करते गए । कभी तारीफ, कभी डांट, कभी सुधार कभी गलती का सिलसिला चलता रहा लेकिन 3 जुलाई को कमाल हो गया । मैं एक प्यारी सी बेटी का पिता बना । ये मैसेज अजय आज़ाद सर ने अपने स्टाइल में ऑफिस वाले ग्रुप में डाला । बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया । राणा सर बधाई देने वालो में सबसे पहले थे जो मुझे भावुक कर गया । मुझे पता चला दीपक जी योगी आदित्यनाथ का इंटरव्यू करने लखनऊ आये हैं लेकिन फ्लाइट में होने की वजह से जानकारी नहीं मिली थी । मैंने उनको मैसेज किया तो फट से बधाई का रिप्लाई आया साथ में हॉस्पिटल का नाम पूछ लिया । मुझे लगा सर के पास कहाँ टाइम होगा शाम को CM के साथ होंगे पर उनका रिप्लाई आया ‘मेँ ज़रूर आऊंगा सुधीर’ । बहरहाल मैं हॉस्पिटल की भागादौड़ी में फंस गया । पत्नी ICU में थी और बच्ची हमारे पास थी, दोनों तरफ भागना पड़ रहा था । शाम फिर रात कब हुई पता ही नहीं चला ।

एकाएक रात करीब 8 बजे फ़ोन की घंटी बजी । दीपक सर का कॉल था । फ़ोन उठाते ही सर ने पूछा ‘किधर आना है फलाँ जगह पर हूं’ मैंने फौरन रास्ता बताया और हॉस्पिटल के दरवाजे पर पहुंचा । बस 2 मिनट के अंदर सर दाखिल हुए । उस वक़्त मेरे स्कूल के कुछ दोस्त आये हुए थे जो बाहर आ गए और अंदर परिवार के आधे सदस्य मौजूद थे । मैं सर को सीधा बच्ची के पास ले गया । मेरे परिवार वालो के चेहरे पर खुशी दोगनी हो गयी । सर ने बिटिया को आशीर्वाद दिया । मेरी छोटी भांजी से हंसी मजाक किया, भतीजे को भविष्य की शुभकामना दी, घरवालों से हालचाल पूछा और मुझे बच्ची के रखरखाव की कुछ टिप्स दी, तब मैंने सर को एक बात बोली –
‘सर आपको याद नहीं है लेकिन आपसे मिलने के लिए मुझे बहुत पापड़ बेलने पड़े थे और सिर्फ़ 2 मिनट की मुलाक़ात हुई थी लेकिन मेरी बिटिया कितना बड़ा भाग्य लेकर जन्मी जो पहले ही दिन आपको आशीर्वाद के लिए अपने पास बुला लायी वो भी 500 किलोमीटर दूर से’ । सर जोर से हँसे । आज इन तस्वीरों को देखता हूं तो सचमुच लगता है की मेहनत जाया नहीं जाती धैर्य, साहस और ईमानदारी को थामे रहने की ज़रूरत है । अब देखिए ना जो पिता को बेहद मुश्किल से मिला वो बेटी को कितने आराम से मिल गया । मुझे जिनसे मिलने में 8 साल लगे वो मेरी 8 घंटे की बेटी से मिलने आये । यही अनुभव है । यही भाग्य भी है और यही जीवन चक्र भी है ।

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