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मीडिया से हूं पर मीडिया के लोगों ने ही सीरियसली नहीं लिया मुझेः  शैलेंद्र पांडे

फिल्म शूटिंग के दौरान राजनेता अमर सिंह और अभिनेता गोविंद नामदेव से चर्चा करते शैलेंद्र पांडे।
फिल्म शूटिंग के दौरान राजनेता अमर सिंह और अभिनेता गोविंद नामदेव से चर्चा करते शैलेंद्र पांडे।
शैंलेद्र पांडे की फिल्म का पोस्टर
शैंलेद्र पांडे की फिल्म का पोस्टर

मीडिया मिरर की साक्षात्कार श्रृंखला बात मुलाकात में इस बार हमारे अतिथि हैं राजस्थान पत्रिका दिल्ली के फोटो एडीटर शैलेंद्र पांडे। शैलेंद्र ने बतौर निर्माता-निर्देशक जेडी नाम की फिल्म बनाई है जो अगले महीने 22 सितम्बर को देशभर में रिलीज होगी। फिल्म की पृष्ठिभूमि पत्रकारिता पर आधारित है। फिल्म में राजनेता अमर सिंह, अभिनेता अमन वर्मा, गोविंद नामदेव, संजय दत्त को सजा सुनाने वाले जस्टिस कोडे जैसे दिग्गज लोग काम कर रहे हैं। शैलेंद्र मूलरूप से बीघापुर उन्नाव उत्तरप्रदेश से वास्ता रखते हैं। शैलेंद्र एक मिसाल हैं इस संदर्भ में कि जब पत्रकारों के पास खुद के लिए वक्त नहीं होता तब शैलेंद्र जैसे युवा पत्रकार फिल्म रच देते हैं। इतना ही नहीं फिल्म के निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक भी वो स्वयं हैं।

 शैलेंद्र पांडे से बातचीत की मीडिया मिरर सम्पादक प्रशांत राजावत ने।

 

सवालः सबसे पहले फिल्म के लिए बधाई। एक पत्रकार को तो खुद के लिए समय नहीं होता कैसे कर पाए इतना बड़ा काम।

जवाबः देखिए मैं फोटोग्राफर हूं। फोटोग्राफर के पास एक विजन होता है दृश्यों को लेकर। मैं तो मानता हूं हर फोटोग्राफर फिल्म बना सकता है। उसके पास एक विस्तृत सोच होती है कि सब्जेक्ट को कैसे पेश करना है। मेरे मन में भी थी सोच फिल्म बनाने की और ये हो पाया। एक बात और मैं कहना चाहता हूं कि मैं हमेशा फिल्मों की शूटिंग के दौरान फोटोग्राफर को, डॉयरेक्टर को क्रेन में बैठे देखता था, ये मुझे बहुत रोमांचित करता था। क्रेन में बैठकर किसी दृश्य को फिल्माने की मेरी भी चाहत थी शायद वो चाहत भी पूरी हो गई। हाहाहा।

 

सवालः फिल्म की योजना बनाई और फिर फिल्म की प्री प्लानिंग औऱ शूटिंग कैसा रिस्पांस रहा प्रारंभिक दौर में आपके जानने वालों का।

जवाबः ये सब बड़ा दिलचस्प रहा। जब मैं लोगों से कहता कि मैं फिल्म बनाने जा रहा हूं लोगों को यकीन ही नहीं होता। तब मैं कहता कि हां मैं बनाने जा रहा हूं। लोग यकीन नहीं करते थे। कुछ लोग हंसते भी थे। और ठीक भी है हर कोई सोच सकता है कि एक सामान्य सा पत्रकार बॉलीवुड  फिल्म कैसे बनाएगा। कुछ लोगों ने हौसला भी बढ़ाया। फिर जब फिल्म की शूटिंग शुरू हुई तो धीरे धीरे लोगों को एहसास हुआ हां शैलेंद्र सही कह रहा था। हां लेकिन तब भी लोग यही कहते पाए गए कि पता नहीं कैसे क्या होगा। बहुत पॉजिटिव कोई नहीं रहा फिल्म को लेकर।

 

सवालः पत्रकारिता जगत से तमाम साथी जैसे अविनाश दास, इमाम जैगम, गुरदीप सिंह सप्पल आदि फिल्म निर्माण में उतरे। कोई बड़ी सफलता नहीं मिली, आप किस रूप में देखते हैं खुद की नई पारी को

जवाबः देखिए जो नाम आपने लिए वो औऱ मेरी स्थितियां बिल्कुल भिन्न हैं। हर फिल्मकार का अपना अंदाज होता है काम करने का। मैं नहीं कहूंगा कि उनकी फिल्में सफल हुईं या असफल। पर मेरी फिल्म सफल होगी मुझे यकीन है।

 

सवालः पत्रकार से फिल्मकार बने साथी पहली फिल्म में ट्रायल लेते हैं। आप भी अभी ट्रायल पर हैं।

जवाबः देखिए मैं कोई ट्रायल नहीं ले रहा। मैं ट्रायल नहीं लेता। जो दिल में आया कर डालिए ये मत सोचिए परिणाम क्या होगा।

 

सवालः आगे भी फिल्म बनाएंगे

जवाबः हां बिल्कुल। नई फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार है।

 

सवालः फिल्म में क्या दिखा रहे हैं आप

जवाबः फिल्म मीडिया पर आधारित है। मीडिया का वर्कस्टाइल, वर्क कल्चर, मीडिया को वो सच जो आम लोग नहीं जानते वो हम दिखाने वाले हैं। फिल्म एक पत्रकार के इर्द गिर्द घूमती है जिसपर रेप का आरोप है।

फिल्म में हमने कई बड़े नाम जोड़े हैं अमन वर्मा, गोविंद नामदेव मजे हुए प्रसिद्ध अभिनेता हैं। वहीं जस्टिस पीडी कोडे, राजनेता अमर सिंह भी फिल्म का हिस्सा हैं। जस्टिस कोडे वही जज हैं जिन्होंने 1993 में हुए मुंबई सीरियल बम्ब ब्लास्ट मामले में संजय दत्त क जेल भेजा था। कोडे रिटायरमेंट के बाद इस फिल्म में भी जज के रूप में दिखेंगे। अमर सिंह राजनेता के किरदार में दिखेंगे। रियल लोगों को हमने इसलिए लिया ताकि कैरेक्टर में दम आ जाए। वेदिता प्रताप सिंह, रीना चरनिया, जेसिका रंधावा, ललित विष्ट जैसे नवोदित कलाकार हैं जो पहले भी अच्छा अभिनय कर चुके हैं।

 

सवालः फिल्म की सफलता में प्रमोशन का बड़ा रोल है। प्रमोशन की क्या योजना है।

जवाबः देखिए हम पत्रकार लोग हैं। बॉलीवुड वालों की तरह हमारे पास पैसा कहां है। हम तो सोशल साइट्स के जरिए, माउथ पब्लिसिटी के जरिए ही प्रमोशन करेंगे। हां मुंबई और दिल्ली और कुछ शहरों में प्रेस कांफ्रेंस और शो रखेंगे।

 

सवालः आपने कहा कि हम सोशल मीडिया के जरिए, माउथ पब्लिसिटी से फिल्म का प्रमोशन करेंगे, कितना सहयोग मिल रहा सोशल मीडिया पर साथियों का।

जवाबः इस सवाल का जवाब बेहद निराशा भरा है। मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि दोस्तों की भीड़ बहुत नजर आती है पर जब काम पड़ता है तो भीड़ छंट जाती है। पत्रकारिता जगत में कोई किसी की मदद नहीं करता। सब मजाक उड़ाएंगे और कमतर दिखाएंगे पर मदद नहीं करेंगे। आपको आश्चर्य होगा पत्रकारिता से वो लोग जो मुझे बहुत अच्छे से जानते हैं जब मैंने उनसे कहा कि आप थोड़ा अपने वाल पर फिल्म का प्रचार कर दो। दो लाइन लिख दो, भाई लोग कन्नी काट गए। ये सच्चाई है जो समय आने पर सामने आती है। कुछ ऐसे पत्रकार हैं जिनके बड़ी संख्या में फॉलोवर हैं वो कुछ भी लिखेंगे वाल पर पर मैंने कहा फिल्म के बारे कुछ लिख दीजिए तो कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सचमुच ये व्यवहार हैरान करने वाला है। कई लोग जिनके बारे में मुझे लगता था मेरे खास हैं उन्हें मैने टैग किया फिल्म का पोस्टर इन साथियों ने टैग हटा दिया। खैर ईश्वर सब अच्छा करे। ये बुरा अनुभव है।

 

सवालः फिल्म जगत से किसी का फोन आया या किसी ने तारीफ की आपकी, कि शैलेंद्र बढ़िया काम कर रहे हो।

जवाबः देखिए बॉलीवुड में बड़े पेशेवर लोग हैं। किसी की फिजूल में हौसलाअफजाई भी नहीं करते।

 

सवालः रियल पत्रकार भी फिल्म में अभिनय कर रहे हैं

जवाबः हां, कर रहे हैं। ये भी बड़ी दिलचस्प कहानी है। जब मैने अपने परिचित पत्रकारों से कहा कि मेरी फिल्म में रोल करिए तो अधिकांश तैयार नहीं हुए। एक साथी तो शूटिंग स्थल आए और बोले कुछ काम है निकलना है। सीधा सा मतलब है दुनिया पेशेवर है। संजयलीला भंसाली कहेंगे तो देश का कोई भी बड़ा पत्रकार दौड़ा चला जाएगा रोल करने। मैं ही सफल हो जाऊं अगली फिल्म करूं तो हालात और होंगे कुछ।

 

सवालः आप फोटो एडीटर हैं राजस्थान पत्रिका समूह दिल्ली के। क्या राजस्थान पत्रिका समूह की ओर से कोई आपत्ति दर्ज की गई इस फिल्म निर्माण को लेकर।

जवाबः बिल्कुल नहीं। हालांकि मालिकों को बाद में किसी और से पता चलता कि मैं फिल्म बना रहा हूं इससे बेहतर मैने खुद ही उन्हें बताना उचित समझा। जब मैने बताया तो बॉस निहार कोठारी ने कहा ये तो गर्व की बात है। आप फिल्म बनाइए हम साथ हैं।

 

शैलेंद्र पांडे
शैलेंद्र पांडे

सवालः फिल्मकार के सामने एक बड़ी चुनौती ये होती है कि वो फिल्म देशभर में कितनी स्क्रीन पर रिलीज होगी। फिल्म वितरक मिलेगा या नहीं। आपको ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

जवाबः देखिए आपने सही कहा फिल्मकार के लिए ये एक चुनौती है कि फिल्म को कितनी स्क्रीन मिलती हैं। देखिए बड़े स्टार कि फिल्म को तो वितरक आसानी से मिल जाते हैं। उनके पास पैसा होता है स्क्रीन भी मिल जाती हैं। हम लोगों के लिए दिक्कत है। पर हम देशभर में 250 स्क्रीन पर एक साथ फिल्म रिलीज करेंगे।

सवालः आजकल के नए फिल्मकार फिल्म रिलीज से पहले पत्रकारों को साधते हैं या कहें खरीदते हैं फिल्म को अच्छी स्टार रेटिंग मिले। आप तो स्वयं पत्रकार हैं। क्या मुंबई पत्रकारों के संपर्क में हैं।

जवाबः मुंबई में कुछ फिल्म पत्रकार जानते भी हैं। पर मैं नहीं चाहता मेरी फिल्म की समीक्षा पेड हो। जो सच हो पत्रकार उसे लिखें।

 

सवालः फिल्म का बजट कितना रहा

जवाबः इस बारे में कुछ मत पूछिए अभी कृपया।

 

सवालः अच्छा फिल्म बनाने की बात जब परिवार को पता लगी तो कैसा रिएक्ट था।

जवाबः पहले थोड़ा हैरान थे माता पिता कि कहां से पैसा आएगा औऱ तमाम बातें। फिर समझ गए और मेरे साथ थे। मेरी पत्नी अंजू ने पहले कहा कि पागल मत बनो, ये कैसे कर पाओगे। बाद में हर लेबल पर मेरा सपोर्ट किया। वो सहयोगी निर्माता हैं फिल्म की।

 

सवालः आपके साथियों ने सहयोग नहीं किया जो अपेक्षित था

जवाबः देखिए मेरा मानना है कि किसी से उम्मीद ही मत रखो। उम्मीद रखोगे तो निराशा हाथ लगेगी। दरअसल मीडिया के लोगों ने सीरियसली (गंभीरता) नहीं लिया मुझे।

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