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पत्रकार पर हमले के आरोपी राम रहीम पर कार्रवाई से बचती रहीं सरकारें

छत्रपति रामचंद्रन
रामचंद्र छत्रपति

उमेश चतुर्वेदी आकाशवाणी दिल्ली में सलाहकार हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम रेप के आरोपी अब घोषित हुए हैं, इससे पहले पत्रकार की हत्या का भी उन पर आरोप है। जिस मामले में सरकारों ने चुप्पी साधी। इस मामले पर अपने संस्मरण साझा कर रहे हैं उमेश जी। 

 

उन्हीं दिनों सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर अक्टूबर 2002 में जानलेवा हमला हुआ। छोटे अखबार के पत्रकार छत्रपति के पास बड़ी संपत्ति नहीं थी। लिहाजा उनके इलाज में उनका परिवार बिक गया। बाद में हरियाणा सरकार उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज कराने लाई। हरियाणा बीट होने के चलते अक्सर अपोलो जाना पड़ता। उन दिनों जब भी मैं अजय चौटाला, अभय चौटाला या इंडियन नेशनल लोकदल के सांसदों से पूछता कि हमले के आरोपी राम रहीम को गिरफ्तार करेंगे…सब चुप्पी साध जाते।

 

दैनिक भास्कर तब हरियाणा में अपने संस्करण निकालना शुरू कर चुका था। पहले चंडीगढ़ शुरू हुआ, फिर पानीपत संस्करण निकला, इसके बाद हिसार संस्करण निकालने की तैयारी थी या शायद निकल चुका था। उसके पहले तक भास्कर के दिल्ली ब्यूरो में सबसे महत्वपूर्ण बीट भास्कर के उद्गम स्थल मध्य प्रदेश और बाद में राजस्थान में झंडा गाड़ने के चलते राजस्थान होते थे। हरियाणा निकला तो उससे संबंधित घटनाओं की रिपोर्टिंग का जिम्मा मुझे मिला।

तब हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला की सरकार थी। पहले उनके दिल्ली में मीडियासलाहकार शेरसिंह बड़गामी, उसके बाद विनीत पूनिया हुए। बाद में विनोद मेहता बने, जो बाद में टोटल टीवी के प्रोमोटर बने। तब मीडिया सलाहकारों से खबरों के सिलसिले में रोजाना मिलना होता। कई बार अपने स्वभाव के मुताबिक कुछ कड़ी खबरें कर देता तो ये मीडिया सलाहकार लोग गुस्साते भी थे। रोजाना की दोस्ती भूल संपादक से शिकायत करने की धमकी देते। मैं तो कई बार गुस्से में चेयरमैन से शिकायत करने का जवाब दे देता था। वैसे यह गुस्सा अगले ही दिन दोनों तरफ से शांत हो जाता था।

अजय चौटाला तब सिर्फ सांसद थे, लेकिन सरकार में नंबर दो थे। उनसे जब भी बात करने का मौका मिलता, तो वे ज्यादातर चुप ही रहते। चौटाला का रूख दूसरा होता। दिल्ली के पत्रकारों से तो प्यारा सा व्यवहार करते थे..लेकिन दिल्ली से बाहर के पत्रकार ने कड़ा सवाल पूछ लिया तो हड़काने से बाज नहीं आते थे।

उन्हीं दिनों सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर अक्टूबर 2002 में जानलेवा हमला हुआ। छोटे अखबार के पत्रकार छत्रपति के पास बड़ी संपत्ति नहीं थी। लिहाजा उनके इलाज में उनका परिवार बिक गया। बाद में हरियाणा सरकार उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज कराने लाई। हरियाणा बीट होने के चलते अक्सर अपोलो जाना पड़ता। उन दिनों जब भी मैं अजय चौटाला, अभय चौटाला या इंडियन नेशनल लोकदल के सांसदों से पूछता कि हमले के आरोपी राम रहीम को गिरफ्तार करेंगे…सब चुप्पी साध जाते। तब मैं सोचता कि जो सरकार इलाज करा रही है, वह जानलेवा हमले के आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं करती। इसी बीच 18 नवंबर 2002 को अपोलो अस्पताल गया। उस दिन साथ में विनोद मेहता भी थे। उस दिन आईसीयू में छत्रपति की हालत देख मैंने इलाज कर रहे डॉक्टर से पूछ लिया, कब तक इस पत्रकार के नाम पर कमाई करनी है। क्योंकि मुझे लगा था कि छत्रपति को अब सिर्फ अस्पताल अपने बिल के लिए जिंदा दिखा रहा है। आमतौर पर ऐसे सवाल डॉक्टरों से नहीं पूछे जाते….बहरहाल 21 नवंबर को डॉक्टरों ने छत्रपति को मृत घोषित कर दिया था।
राम रहीम के दोषी साबित होने के बाद यह घटना याद आ गई तो शेयर कर दिया।

बतातें चलें कि रामचंद्र छत्रपति ने ही सबसे पहले साध्वी के उस पत्र को अपने अखबार पूरा सच में प्रकाशित किया था जिसमें साध्वी ने राम रहीम पर यौन शोषण के आरोप के बारे में जिक्र किया था। उसी पत्र का आधार मानकर राम रहीम को रेप का दोषी माना गया है। 

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