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शोध क्षेत्र में कॉपी पेस्ट घातक हैः केजी सुरेश

छायाकारः राजन
कार्यशाला में आए अतिथि व शोधार्थी समूह तस्वीर के दौरान। छायाकारः राजन
  • गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय दिल्ली में शोध प्रविधि पर दस दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
  • भारतीय जन संचार संस्थान दिल्ली के महानिदेशक केजी सुरेश रहे मुख्य अतिथि
  • देशभर से 45 शोधार्थी ले रहे हिस्सा

दिल्ली, मीडिया मिरर न्यूजः गुरुगोविंद सिंह इद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय दिल्ली में आज मंगलवार को दस दिवसीय शोध कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। जिसमें देशभर के शोध छात्र व विद्वान हिस्सा ले रहे हैं। कार्यशाला विश्वविद्यालय के जन संचार विभाग और इंडियन कौंसिल ऑफ सोशल साइंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रही है।

कार्यशाला में आईआईएमसी के डीजी केजी सुरेश ने विस्तार पूर्वक शोध समस्याओं पर ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने कहा कि भारत शोध के क्षेत्र में बेहद पीछे है। शोध में कॉपी पेस्ट की प्रक्रिया को उन्होंने बेहद घातक बताया।

श्री सुरेश ने कहा कि शोध छात्र पुस्तकालय जाने की बजाय गूगल में जाना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि शोध करना और पीएचडी की डिग्री लेना। दोनो अलग अलग बाते हैं। लोगों को गंभीरता से शोध करने के लिए उन्होंने कहा।

श्री सुरेश ने कहा कि आप चोरी की विषयवस्तु से शोध को प्रासंगिक कैसे बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि शोध पत्रिकाएं भी पैसे लेकर शोधपत्र छापती हैं, जो गलत है।

जामिया विवि के प्रोफेसर विश्वजीत दास ने शोध की मौलिकता पर बात की। उन्होंने कहा कि शोध में अध्ययन बेहद आवश्यक है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की संयुक्त सचिव अर्चना ठाकुर ने शोध से जुड़े आयोग की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

विषय विशेषज्ञ पीसी शर्मा ने यूजीसी द्वारा मान्य शोध पत्रिकाओं की लम्बी सूची पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि शोध पत्रिकाएं पैसे लेकर शोध पत्र छापती हैं। उनका कोई स्टैंडर्ड नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके खुद के अनुभव हैं कि बगैर जांचे परखे शोध पत्रिका के सम्पादक शोध पत्र प्रकाशित कर रहे हैं।

कार्यक्रम के संयोजक  प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश त्रिपाठी व सचिन भारती हैं। संचालन दिव्यानी रेधु ने किया।

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