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रवीश कुमार समेत 27 पत्रकारों को मिला रामनाथ गोयनका अवॉर्ड

रामनाथ गोयनका अवार्ड
रामनाथ गोयनका अवार्ड विजेता पत्रकारों के साथ उपराष्ट्रपति वैंकय्या नायडू।

 दिल्लीः   ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए एक स्तर तक नियम होना चाहिए, लेकिन नियम गला घोटने में तब्दील नहीं होना चाहिए।’ यह बात उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने बुधवार को कही। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र की संप्रभुता जैसे खास पहलुओं की बात आती है तो नियम होंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अधिकारों का गला घोटा जाए।

उपराष्ट्रपति ने ‘12 वें रामनाथ गोयनका एक्सिलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड्स’ समारोह में दिए गए अपने मुख्य संबोधन में कहा, ‘देश के लोग अपनी अभिव्यक्ति की आजादी से प्यार करते हैं, इसलिए जनप्रतिनिधियों को उनके इस अधिकार का हर हाल में सम्मान करना चाहिए।’

अपने संबोधन के दौरान नायडू ने पत्रकारिता के बारे में कहा कि इसकी शुरुआत मिशन के साथ हुई थी, लेकिन आज कुछ लोग इसका इस्तेमाल कमीशन के लिए कर रहे हैं।

उपराष्ट्रपति नायडू ने आगे कहा, ‘मैं अब सभी दलों का व्यक्ति हूं और राज्यसभा का सभापति होने के नाते, मुझे निष्पक्षता और तटस्थता के अपने दायित्यों का निर्वहन करना जरूरी है। और यही बात अच्छी पत्रकारिता के लिए भी लागू होती है। मैंने यह भी सीखा है कि चर्चा और संवाद, विचारों का आदान प्रदान और विभिन्न मतों में असहमतियों के बीच सहमति बनाना एक स्वस्थ और जीवंत लोकतंत्र का मौलिक तत्व है। लोकतंत्र का मतलब सिर्फ संख्या ही नहीं बल्कि एक दूसरे के विचारों को समझना और सराहना है। हमें फैसले पर पहुंचने के लिए बहस और चर्चा करनी ही होगी।’

मीडिया की जिम्मेदारी दर्शाते हुए नायडू ने कहा, ‘मेरे विचार में मीडिया की भूमिका सूचना, सामाजिक जागृति, सहभागिता निर्माण, व्यक्ति प्रेरणा, बेहतर जीवन के लिए सामूहिक प्रयास, शांति और सौहार्द को बढ़ावा देकर लोगों का सशक्तिकरण करने के लिए होना चाहिए। हर समाचार का असर समझदारी विकसित करना और प्रेरणादायक होना चाहिए।’

पुरस्कारों का हवाला देते हुए नायडू ने कहा, ‘इन पुरस्कारों को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अगुआ के नाम पर स्थापित किया गया है और ये सही मायनों में देश के प्रतिष्ठित पत्रकारिता पुरस्कार बन गए हैं। रामनाथ गोयनका ने साहस और प्रतिबद्ध पत्रकारिता के बेहतरीन गुणों को सन्निहित किया। उन्होंने कहा कि हर तरह की आजादी, तथ्यों का अनथक पीछा करना, दबावों में न झुकने का मजबूत दृढ़संकल्प, सवाल पूछते रहना और हर चुनौती के बावजूद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर कायम रहना। ये विशेषताएं नागरिकता के सर्वोच्च सिद्धांतों का गठन करती हैं और हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं। नायडू ने इस दौरान प्रेस की स्वतंत्रता सूची में विश्व में भारतीय रैंकिंग पर भी दुख जाहिर किया।

समारोह में उपराष्ट्रपति ने प्रिंट और प्रसारण की 25 श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 27 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किया।

पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिये इस साल 27 पत्रकारों को रामनाथ गोयनका अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार अलग-अलग श्रेणियों में दिए जाते हैं। इनमें प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, दोनों ही तरह के पत्रकार शामिल थे।

हिंदी में यह इस बार प्रिंट मीडिया के लिए यह पुरस्कार राहुल कोटियाल को मिला है और टीवी पत्रकारिता के लिए एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को। राहुल कोटियाल को यह सम्मान ‘लव जिहाद’ पर सत्याग्रह में प्रकाशित उनकी एक रिपोर्ट के लिए दिया गया है, जबकि रवीश कुमार को यह पुरस्कार अपने प्राइमटाइम शो में टेलिविजन स्क्रीन को काला कर टेलिविजन मीडिया में फैले अंधकार के बारे में दर्शकों को बताने के लिए दिया गया है।

वहीं, इंडिया टुडे ग्रुप की तीन पत्रकारों को सम्मानित किया गया है, जिनमें बिपाशा मुखर्जी को स्पोर्ट्स कटेगरी में यह पुरस्कार दिया गया। उन्होंने ‘गोल मिजोरम’ के तहत विस्तृत रिपोर्टिंग की और खेल के क्षेत्र की प्रतिभाओं को उजागर किया। इस दौरान उन्होंने मिजोरम में खिलाड़ियों की चुनौतियों और हालात पर स्टोरी की। टेलिविजन जर्नलिस्ट बिपाशा मुखर्जी इंडिया टुडे की सीनियर प्रड्यूसर हैं, उनको पत्रकारिता के क्षेत्र में 17 साल का अनुभव है।

वहीं, इंडिया टुडे की ही मनोज्ञा लोइवाल को अनुवांशिक बीमारी के शिकार बच्चों से संबंधित रिपोर्टिंग करने के लिए इस पुरस्कार से नवाजा गया है। मनोज्ञा ने यंग माइंड्स ओल्ड बॉडी नाम से अभियान चलाया और रांची के दो ऐसे बच्चों की रिपोर्टिंग की, जो बचपन में ही बूढ़े दिखने लगे। उन्होंने बचपन में बुढ्ढे दिखने वाले बच्चों व उनके परिजनों तक पहुंचकर जानकारी जुटाई। इस दौरान उन्होंने ऐसे बच्चों की बीमारियों और उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उजागर किया। मनोज्ञा इंडिया टुडे ग्रुप में ईस्टर्न एंड नॉर्थ-ईस्टर्न इंडिया की डिप्टी एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। बांग्लादेश से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। इसके अतिरिक्त इंडिया टुडे की मौमिता सेन को जम्मू एवं कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में रिपोर्टिंग के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया है। सेन ने इंडिया टुडे की फीचर जर्नलिस्ट हैं। उन्होंने इंडिया टुडे के सप्ताहिक शो के लिए ‘द लॉन्ग स्टोर’ और ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ न्यूज डॉक्यूमेंट्री तैयार की।

इंडिया टुडे के अतिरिक्त, हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर की स्थिति के बारे में छपी रिपोर्ट पर हिन्दुस्तान टाइम्स के अभिषेक साहा ने जम्मू एवं कश्मीर और पूर्वोत्तर श्रेणी में पुरस्कार जीता। तो वहीं ‘अनकवरिंग इंडिया इनविजिबल’ श्रेणी में मलयाला मनोरमा के एसवी राजेश को केरल के आदिवासी ग्राम पंचायत में गरीबी और अभाव के बारे में छपी उनकी श्रृंखलाबद्ध खबरों के लिए पुरस्कृत किया गया।

ITV नेटवर्क के पत्रकार आशीष सिन्हा और आशीष सिंह को भी इस पत्रकार से सम्मानित किया गया। आशीष सिन्हा को ये सम्मान ‘ऑन द स्पॉट रिपोर्टिंग’ के लिए मिला है, जबकि आशीष सिंह को ये पुरस्कार राजनीतिक रिपोर्टिंग के लिए मिला है।

इंडियन एक्सप्रेस की रितु सरीन, पी वैद्यनाथन अय्यर और जय मजूमदार को पनामा पेपर्स मामले में खोजी खबरों के लिए पुरस्कृत किया गया। ‘फॉरेन कॉरेस्पांडेंट कवरिंग इंडिया’ श्रेणी में बड़े शहरों के सपने का पीछा करने वाली एक ग्रामीण युवती के बारे में रिपोर्ट के लिए न्यूयॉर्क टाइम्स के एलेन बेरी को पुरस्कृत किया गया। ब्रिटिश राज के अत्याचारों के मार्मिक वर्णन के लिए शशि थरूर को उनकी पुस्तक ‘एन एरा आॅफ डार्कनेस: द ब्रिटिश एंपायर इन इंडिया’ पर पुस्तक (नॉन-फिक्शन) श्रेणी में पुरस्कार दिया गया।

दरअसल इस बार जूरी के समक्ष 2016 के लिए लगभग 800 प्रविष्टियां आईं, जिनमें से जूरी ने 27 विजेताओं का चयन किया। इस प्रतिष्ठित सम्मान की जूरी में शामिल सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीएम श्रीकृष्ण, एचडीएफसी लिमिटेड के अध्यक्ष दीपक पारेख, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और वरिष्ठ पत्रकार पामेला फिलिपोसे जैसे सुप्रसिद्ध लोग शामिल थे।

रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार की स्थापना एक्सप्रेस समूह ने अपने संस्थापक रामनाथ गोयनका के जन्मशताब्दी वर्ष पर हुए समारोहों के दौरान 2006 में की थी। इस पुरस्कार का मकसद पत्रकारिता में उत्कृष्टता, साहस और प्रतिबद्धता की पहचान करना और पूरे देश के पत्रकारों के असाधारण योगदान को सबके सामने लाना है।

विजेताओं की पूरी सूची आप यहां देख सकते हैं-

प्रिंट :

  • अभिषेक साहा, (हिन्दुस्तान टाइम्स) जम्मू कश्मीर और नार्थईस्ट में रिपोर्टिंग के लिए
  • राहुल कोटियाल (हिंदी) Satyagrah.scroll.in
  • रेशमा संजीव (रीजनल लैंग्वेज) शिवादेकर लोकसत्ता
  • जिम्मी फिलिप, दीपिका डेली, एनवायर्नमेंटल रिपोर्टिंग
  • एस.वी राजेश. मल्यालाला मनोरमा
  • उत्कर्ष आनंद, बिजनेस और इकनॉमिक जर्नलिज्म
  • मुजामिल जलील, इंडियन एक्सप्रेस (पॉलिटिकल रिपोर्टिंग)
  • कासिर मोहम्मद अली, आउटलुक (स्पोर्ट्स जर्नलिज्म)
  • शुभाजित रॉय, इंडियन एक्सप्रेस (स्पॉट रिपोर्टिंग)
  • ऋतू सरीन, पी.वी ल्येर, जय मजमूदार, इंडियन एक्सप्रेस (इनवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग)
  • संगीता बरुआ फीचर राइटिंग (द वायर)
  • एलेन बैरी, फॉरेन कोरेस्पोंडेंट कवरिंग इंडिया (न्यूयॉर्क टाइम्स)
  • तमल बंधोपाध्य (मिंट)
  • चैतन्य मार्पक्वर (हिन्दुस्तान टाइम्स) सिविक जर्नलिज्म
  • वसीम अंद्राबी (हिन्दुस्तान टाइम्स) फोटो जर्नलिज्म

ब्रॉडकास्ट :

  • मौमिता सेन, इंडिया टुडे (जम्मू कश्मीर और नार्थईस्ट में रिपोर्टिंग के लिए)
  • रवीश कुमार, NDTV India
  • दिनेश अकुला, (रीजनल लैंग्वेज) TV5 News
  • मनोज्ञ लोइवल,  TV today
  • हर्षदा सावंत, CNBC Awaaz
  • आशीष सिंह, News X
  • बिपाशा मुख़र्जी, TV Today
  • आशीष सिन्हा, India News
  • श्रीनिवासन जैन, NDTV 24×7

 

 

खबर साभार समाचार4मीडिया ब्यूरो 

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