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हर साल के पहले महीने में पांच लाख रूपये की मदद करते हैं सम्पादक जी

डा सुरेश मेहरोत्रा
सफेद शॉल में डा सुरेश मेहरोत्रा व अन्य पत्रकार।

पैसा कमाना बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात है पैसे का उपयोग। भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार डॉ सुरेश मेहरोत्रा 72 वर्ष की उम्र में जो नेक कार्य़ कर रहे हैं वो आदर्श है। 

पढ़िए पूरी दास्तान एबीपी न्यूज भोपाल की विशेष संवाददाता ब्रजेश राजपूत की कलम सेः-

 

हमारे डाक साब को सलाम…
मानो या मानो की तर्ज पर आपको मैं जो बताने जा रहा हूं उस पर भरोसा करना या ना करना आपके ऊपर है, हमारे भोपाल के पैंतालीस बंगले इलाके में रहते हैं डा सुरेश मेहरोत्रा, उम्र है 72 साल, वरिष्ठ पत्रकार हैं अपने शुरूआती दिनों में हिंदी और अंग्रेजी के कई अखबारों में संपादकी करने के बाद पिछले पंद्रह सालों से अपनी आन लाइन साइट व्हिस्पर्स इन द कारीडोर चला रहे हैं।

जिसमें सरकार चलाने वाले देश भर के अफसरों की नियुक्ति, तबादले और बदलाव की खबरें होती हैं..आप कहेंगे इसमें क्या बडी बात है बहुत लोग इन दिनों साइट चला रहे हैं मगर बात ये है कि ये ऐसी खबरों की नंबर वन साइट है खबरों के लिहाज से रैंकिग के हिसाब से और कमाई के कारण भी। मगर ये तो हमारे डाक साब का वो पहलू है जो बहुत लोग जानते हैं पर कम लोग ही ये जानते हैं कि वो अपनी साइट के लिये काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों की स्कूल कालेज की साल भर की फीस अपनी जेब से ही भरते हैं फिर चाहे बच्चा डीपीएस में हो या इंजीनियरिंग कालेज में…है ना अनोखी बात !
ये भी छोडि़ये भोपाल में हम कुछ पत्रकार मिलकर एक आनलाइन ग्रुप सोसायटी चलाते हैं जिसमें साथी पत्रकारों की बीमारी या असामयिक मौत में परिवारों को आर्थिक मदद देते हैं। तकरीबन सौ सदस्यों वाली ये सोसायटी तीन साल में करीब पचास लोगों को आर्थिक मदद दे चुकी है और हमारे इस समूह को डाक साब हर साल के पहले महीने में पांच लाख रूपये की मदद करते हैं, अभी कल ही बुलाकर उन्होंने फिर सोयायटी को पांच लाख रूपये का चैक दिया और हमें धन्य कर दिया। हम जब हिसाब लगाने बैठे तो पता चला कि डाक साब अब तक हमारी सोसयटी को इन तीन सालों में बीस लाख रूपये की मदद कर चुके हैं।
जिस दौर में अखबारों के दम पर माल चलाने वाले मालिक ही अपने कर्मचारियों की परवाह नहीं करते वहां एक छोटी आन लाइन साइट चलाकर अपनी पत्रकार बिरादरी की चिंता करने वाले डाक साब को आप सलाम करेंगे या नहीं ?

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