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मिलिये एक सन्त सम्पादक से

वरिष्ठ सम्पादक व पत्रकार श्री हरिमोहन शर्मा।
वरिष्ठ सम्पादक व पत्रकार श्री हरिमोहन शर्मा।

(साथी की ख़ूबी)

जैसे राजनीति में अटल जी, खेल में सचिन और फ़िल्म जगत में अमिताभ का कोई विरोधी नहीं। वैसे ही पत्रकारिता जगत में हरिमोहन शर्मा का कोई विरोधी नहीं। मप्र के वरिष्ठतम सम्पादकों में से एक हैं हरिमोहन जी।
स्वदेश से पत्रकारिता शुरू करने वाले हरिमोहन जी का सपना तो ट्रक ड्राइवर बनने का था। पुरानी हिंदी फ़िल्मो के शौक़ीन, इतने शौक़ीन की उनकी केबिन में कोई न कोई फ़िल्म चलती ही मिलती। उन्हें समाचार चैनल देखने की ही औपचारिकता बतौर सम्पादक दफ़्तर में पेश करने की कोई मंशा नहीं होती। तेज आवाज में फिल्मे देखते, खूब मुस्कुराते। खुश रहते और खुश रहने का औरों को अवसर देते।
स्वदेश ग्वालियर से करियर शुरू किया स्वदेश के सम्पादक बने, दैनिक भास्कर के कई वर्षों तक लगातार सम्पादक रहे। राज एक्सप्रेस के सम्पादक रहे। फिलहाल अवकाश पर हैं। ग्वालियर मप्र से हैं।
जिन लोगों ने हरिमोहन जी के साथ काम किया है या फिर उनको जानते हैं तो ये मानते होंगे की उन जैसा सम्पादक विरले ही और सौभाग्यशालियों को मिलते हैं।
जेब में हमेशा कंघी और जैसे ही वक्त मिलता तुरन्त बाल बना लेने वाले हरिमोहन जी पढ़ने लिखने के जबरदस्त शौक़ीन। जब उनका स्थानांतरण होता कपड़े और जरूरत का सामान कम किताबें ज्यादा दिखतीं। हाँ हिंदी किताबें उनको पसन्द हैं। 6 फुट से ऊँचा कद, बढ़ती उम्र में भी गठा हुआ शरीर और गजब का ड्रेस सेन्स ऐसे हैं हरिमोहन शर्मा।
शायद ही किसी ने उन्हें दफ़्तर में तेज आवाज में बोलते पाया हो। किसी सहयोगी की गलती पर उन्हें कुछ कहना हो तो केबिन में बुलाकर उसे समझाते। किसी भी अधीनस्थ साथी की बाइक में बैठ शहर घूमने निकल जाते।
जानने वाले जानते हैं ग्वालियर में ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के पत्रकारिता जगत में हरिमोहन शर्मा को एक आदर्श और प्रेरणास्रोत के रूप में देखा जाता है। कुल मिलाकर एक परिपूर्ण सम्पादक और इंसान।

हरिमोहन जी को अनुशासन बहुत पसन्द है। चलने फिरने, बोलने, उठने बैठने, खाने, पहनने हर चीज में अनुशासन। उन्होंने दैनिक भास्कर में इसी वजह के चलते सोमवार को ये अनिवार्यता लागू की थी की हर सम्पादकीय साथी सफेद शर्ट में आएगा। उनका मानना था अनुशासन व नियंत्रण व्यक्तित्व को निखारता है।

मुझे लिखना नहीं चाहिए बहुत निजी बात है पर लिख देता हूँ। मैं और हरिमोहन जी महामण्डलेश्वर स्वामी शाश्वतनंद जी के आश्रम गए थे। स्वामी जी हरिमोहन जी के गुरू हैं। जब मैंने और हरिमोहन जी ने स्वामी जी का आशीर्वाद लिया तो स्वामी जी बोले हरिमोहन आजकल कहाँ हो। तो हरिमोहन जी बोले मैं राज एक्सप्रेस का सम्पादक हूँ। स्वामी जी बोले भास्कर से हटा दिया तुम्हें। आगे जवाब में हरिमोहन जी कुछ बोलें स्वामी जी फिर बोल पड़े हरिमोहन तुम्हे हर जगह से ये लोग हटा क्यों देते हैं। शायद तुम इनके हिसाब से फिट नहीं बैठते, आ जाओ हमारे आश्रम छोड़ो सब।। और हरिमोहन जी हंसने लगे।

स्वामी जी ने बिल्कुल सही कहा। हरिमोहन जी आज की पत्रकारिता में फिट नहीं बैठते। वो सन्त सम्पादक हैं। तेज आवाज में बोलना नहीं आता, अधीनस्थ कर्मचारियों को माँ बहन की गाली तो छोड़ो डाँट नहीं सकते। नशे के नाम पर तम्बाखू तक नहीं। किसी तरह का एब नहीं। कोई लालसा और लोभ नहीं। मंत्रियों और आकाओं से दोस्ती और जुगाड़ की दुनिया से कोई वास्ता नहीं। जो आजकल के सम्पादक होने की अनिवार्य जरूरते हैं या आदते हैं।

सच हरिमोहन जी ये सब नहीं कर सकते।
हरिमोहन जी के बारे में एक और आम राय है वो किसी अपने की नोकरी तो लगवा देंगे पर कोई सोचे की अब प्रमोशन और इन्क्रीमेंट वो अपने को देंगे तो वो भूल जाइये। अपने आदमी पर उनकी नजर सबसे बाद में जाती या फिर जाती ही नहीं। अक्सर उनके ख़ास लोग इससे दुखी भी रहते की यार किस बात के अपने जब कोई फायदा नहीं। पर सिद्धान्तवादी ऐसे ही होते हैं।
हरिमोहन जी कभी कहकर सीख नहीं देते थे, वो खुद ऐसा जीवन जीते थे जो लोगों को देखकर सीखने पर विवश कर दे। दफ़्तर में 4 बजे का टाइम तो मतलब 3:59 पर हरिमोहन जी वहां बैठे मिलेंगे।
दैनिक भास्कर के वरिष्ठम् सम्पादक थे, जानने वाले कहते हैं की उनको स्टेट हेड होना था, या समूह सम्पादक। पर वो अपने सिद्धान्तों और आदर्शों के चलते अब सक्रिय पत्रकार भी नहीं हैं।। न जाने कितने सम्पादक बड़े बड़े मीडिया संस्थानों में आज उनके सिखाये हुए हैं। जो ये जानते होंगे की हरिमोहन हरि भी थे और मोहन भी। ऐसे सम्पादक को प्रणाम है मेरा। हरिमोहन जी में मैंने कभी सम्पादक वाला रुतबा देखा ही नहीं, जब उप सम्पादक गाडी से आ रहा हो हरिमोहन जी पैदल दफ़्तर आया करते। चपरासी से लेकर चायवाला उनका मुरीद। सबके प्यारे थे वो। आजकल ग्वालियर में रह रहे हैं।

  • प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर 

(अगले रविवार फिर किसी शख्सियत से मिलवायेंगे साथी की खूबी कॉलम में, आप भी इस कालम के लिए लिख सकते हैं) 

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