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प्रोफ़ेसर हॉकिंग पूरी मानवता की धरोहर थे

मनुष्यता के लेखक प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग
मनुष्यता के लेखक प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग

गद्य कोश और कविता कोश के संस्थापक ललित कुमार ने सर स्टीफन हॉकिंग पर एक संस्मरण लिखा है। ललित कुमार भारतीय साहित्य जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं। प्रोफेसर हाकिंग ने ललित कुमार के एक मेल का जवाब भी दिया था। आज प्रोफेसर नहीं रहे। मनुष्यता के लेखक नहीं रहे। जो जीवन की गुत्थियां सुलझाते सुलझाते हमे अलविदा कह गए। 

इस अवसर इसे पढ़ा जाना चाहिए। ललित कुमार की कलम से। ललित राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से जुड़े हैं और दिल्ली रहते हैं। 

 

आज शोक का दिन है
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आज वह दिन है जब सभी को शोक मनाना चाहिए… देश जाति धर्म… सब कुछ भूल कर…

आज मनुष्यता ने एक अवसर खो दिया है… मुक्ति की एक संभावना खो दी है… सत्य की ओर खुलने वाली एक संभावित खिड़की… बंद हो गई है… मुझे लग रहा है जैसे कि इस असीम ब्रह्मांड में मुक्ति एक किरण खो गई है।

जब से मैंने प्रोफ़ेसर स्टीफ़न हॉकिंग और उनके काम के बारे में जाना तब से ही मैं उनका मुरीद हो गया था। आइंस्टाइन और प्रोफ़ेसर हॉकिंग व उनके काम के बारे में मैं अक्सर सोचता हूँ। खाली समय में उनके नज़रिए से ब्रहमांड को देखने समझने की कोशिश करता हूँ। ऐसे में जब करीब 15 साल पहले प्रोफ़ेसर हॉकिंग ने अपने सेक्रेटरी के ज़रिए मेरी ईमेल का जवाब दिया था तो मैं झूम उठा था। मैंने अपनी पहली वेबसाइट के तौर पर प्रोफ़ेसर हॉकिंग के जीवन और काम पर आधारित एक वेबसाइट बनाई थी। प्रोफ़ेसर ने उसे देखा और मुझे अपने सेक्रेटरी नील के ज़रिए धन्यवाद भेजा था।

मैं प्रोफ़ेसर हॉकिंग का केवल इसलिए मुरीद नहीं हूँ कि मुझे पोलियो से लड़ने के लिए उनसे प्रेरणा मिलती थी… बल्कि मैं उनके काम को भी कुछ हद तक समझता हूँ। A Brief History of Time को मैंने बहुत बार पढ़ा है। पहले पहल बहुत कम समझ में आई… लेकिन बाद में कुछ-कुछ समझ में आने लगा।

हम इंसान अज्ञानता के ऐसे महासागर में डूबे हुए हैं कि हम यह भी नहीं जानते कि हम कौन हैं और क्यों हैं… आइंस्टाइन और प्रोफ़ेसर हॉकिंग जैसे लोगों ने समय और अस्तित्व जैसी आधारभूत बातों को समझ कर हमें इस महासागर से निकालने की कोशिश की… वे कुछ सीमा तक उत्तर भी खोज पाए — लेकिन अज्ञानता का यह महासागर इतना गहरा है कि इससे निकलना अत्यंत कठिन है। प्रोफ़ेसर हॉकिंग पूरी मानवता की धरोहर थे… उन जैसा ना कोई हुआ… और शायद कोई होगा भी नहीं…

प्रोफ़ेसर हॉकिंग के जाने से मानवता को जो क्षति पहुँची है उसकी विशालता का अनुमान विश्व भर में केवल कुछ ही लोग कर पाएँगे। यह अद्वितीय असाधारण व्यक्तित्व हमें जितना देकर गया है — उसके लिए हम उसका धन्यवाद भी नहीं कर सकते।

जाओ प्रोफ़ेसर… शायद अब तक तुम सितारों के बीच पहुँच चुके होगे… शायद तुम्हें उन प्रश्नों के उत्तर मिल चुके होंगे जिन्हें तुम जीवन भर खोजते रहे… काश… तुम उन उत्तर को हम तक पहुँचा पाते… काश… तुम वहाँ से एक और पुस्तक भेज सकते… काश…

प्रोफ़ेसर… शायद अब तुम्हें कोई व्हीलचेयर नहीं रोकेगी… शायद तुम उड़ सकोगे… मैं भी उड़ना चाहता हूँ… हो सके तो सपने में आना… और बताना वो सब सच… जो तुम खोजते रहे… मुझे भी बताना कि बंधन मुक्त होकर कैसा लगता है… बताना कि ब्रम्हांड के अंतिम छोर पर क्या है… मुझे बताना कि मैं कौन हूँ… क्यों हूँ… कैसे हूँ… तुम व्हीलचेयर से मुक्त हो गए और मैं व्हीलचेयर की ओर जा रहा हूँ… मेरा संबल बने रहना प्रोफ़ेसर… कि एक दिन मैं भी तुम्हारी तरह व्हीलचेयर छोड़ना चाहता हूँ। एक दिन मैं भी तुम्हारी तरह अनंत ब्रह्मांड में उड़ना चाहता हूँ। एक दिन मैं भी तुम्हारी तरह सारे सत्य जान लेना चाहता हूँ।

जीवन में तुमसे नहीं मिल सका… अब सितारों के बीच कहीं मिलना होगा… हमारी-तुम्हारी बातचीत के लिए सितारों से बेहतर और क्या जगह होगी…

प्रोफ़ेसर… आज मन को जो धक्का लगा है… वह तुम्हें बता नहीं सकता।

14 मार्च ने हमें आइंस्टाइन जैसी शख्सियत दी थी… और 14 मार्च ने तुम्हें हमसे छीन लिया…

शोकाकुल हूँ… कष्ट में हूँ… लेकिन मैं भी तुम्हारी तरह जिजीविषा से भरा हूँ। शोक से उबर जल्द ही अपनी यात्रा फिर आरम्भ करूँगा… मेरी यात्रा भी बिल्कुल तुम्हारी तरह ही है… यात्रा… सत्य की ओर…

विदा प्रोफ़ेसर स्टीफ़न हॉकिंग…

 

कौन थे प्रोफेसर हॉकिंग

स्टीफन विलियम हॉकिंग (८ जनवरी १९४२– १४ मार्च २०१८)), एक विश्व प्रसिद्ध ब्रितानी भौतिक विज्ञानी, ब्रम्हांड वैज्ञानिक, लेखक और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक ब्रह्मांड विज्ञान केन्द्र (Centre for Theoretical Cosmology) के शोध निर्देशक थे।

कार्य

स्टीफ़न हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग सिद्धांत को समझने में अहम योगदान दिया। उन्हें 12 मानद डिग्रियाँ और अमरीका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुये।

मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के खोले और इस पर किये गये शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।
—स्टीफ़न हॉकिंग
इच्छामृत्यु पर विचार
लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूँ।
—स्टीफ़न हॉकिंग

 

 गैलीलियो की मृत्यु के ठीक 300 साल बाद हॉकिंग का जन्म हुआ था। 1988 में उन्हें सबसे ज्यादा चर्चा मिली थी, जब उनकी पहली पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम: फ्रॉम द बिग बैंग टु ब्लैक होल्स’ मार्केट में आई।
 इसके बाद कॉस्मोलॉजी पर आई उनकी पुस्तक की 1 करोड़ से ज्यादा प्रतियां बिकी थीं। इसे दुनिया भर में साइंस से जुड़ी सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक माना जाता है।

 1963 में स्टीफन हॉकिंग जब सिर्फ 21 साल के थे, तब उन्हें Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS) नाम की बीमारी हो गई। इसके चलते उनके अधिकतर अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। इस बीमारी से पीड़ित लोग आमतौर पर 2 से 5 साल तक ही जिंदा रह पाते हैं, लेकिन वह दशकों जिए।

 स्टीफन हॉकिंग वीलचेयर के जरिए ही मूव कर पाते थे। इस बीमारी के साथ इतने लंबे अरसे तक जिंदा रहने वाले स्टीफन हॉकिंग पहले शख्स थे।

  – अपने शुरुआती जीवन में दुर्लभ बीमारी को मात देनेवाले महान भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग का निधन हो गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब स्टीफन 21 साल के थे तभी, डॉक्टरों ने उन्हें कहा था कि वह सिर्फ दो साल और जीने वाले हैं। स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में दुनिया की मदद की। उनकी जिंदगी भी उनकी खोजों की तरह ही लोगों को हैरान कर देने वाली है। आइए आपको बताते हैं हॉकिंग से जुड़ी कुछ खास बातें…

  • हॉकिंग को 21 साल की उम्र में amyotrophic lateral sclerosis (ALS) नामक गंभीर बीमारी हो गई थी। इस बीमारी की वजह से ही उनके शरीर ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। हॉकिंग जब ऑक्सफर्ड में फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहे थे तभी उन्हें सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाइयों का समाना करना पड़ा। धीरे-धीरे यह समस्याएं इतनी बढ़ गईं कि उनकी बोली लड़खड़ाने लगी। डॉक्टर्स ने उस समय हॉकिंग को बताया था कि वह 2 साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे लेकिन यह दावा गलत साबित कर हॉकिंग ने अपनी रिसर्च जारी रखी।
  • हॉकिंग चल फिर नहीं सकते थे और हमेशा वील चेयर पर रहते थे। वह कम्प्यूटर और तमाम डिवाइसों के जरिए अपने शब्दों को व्यक्त करते थे। उन्होंने इसी तरह से भौतिकी के बहुत से सफल प्रयोग भी किए हैं।
  • स्टीफन हॉकिंग ने स्वर्ग की परिकल्पना को सिरे से खारिज करते हुए इसे अंधेरे से डरने वाली कहानी बताया था। हॉकिंग ने कहा था कि हमारा दिमाग एक कम्प्यूटर की तरह है जब इसके पुर्जे खराब हो जाएंगे तो यह काम करना बंद कर देगा। खराब हो चुके कम्प्यूटरों के लिए स्वर्ग और उसके बाद का जीवन नहीं है। स्वर्ग केवल अंधेरे से डरने वालों के लिए बनाई गई कहानी है।
  • साल 1998 में प्रकाशित हुई स्टीफन हॉकिंग की किताब ‘अ ब्रीफ हिस्ट्ररी ऑफ टाइम’ ने पूरी दुनिया में तहलका मचाया था। इस किताब में उन्होंने ब्रह्मांड विज्ञान के मुश्किल विषयों जैसे ‘बिग बैंग थिअरी’ और ब्लैक होल को इतने सरल तरीके से बताया कि एक साधारण पाठक भी उसे आसानी से समझ जाए। इस किताब की लाखों प्रतियां हाथों-हाथ बिक गई। हालांकि, स्टीफन हॉकिंग को किताब के लिए विरोध का भी सामना करना पड़ा था क्योंकि उन्होंने इस किताब में ईश्वर के अस्तित्व को नकारा था।
  • बीते साल ही स्टीफन हॉकिंग ने यह चेतावनी दी थी कि धरती पर जिस तेजी से आबादी और ऊर्जी की खपत बढ़ रही है, उस तरह से 600 सालों से भी कम समय में यह धरती आग का गोला बन जाएगी।
  • स्टीफन हॉकिंग के पीएचडी शोधपत्र को सार्वजनिक करने के कुछ ही दिनों में इसे दुनियाभर के 20 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा था। 1966 में किया गया शोध इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे जारी करते ही कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की वेबसाइट ठप हो गई थी।
  • हॉकिंग एक टाइम मशीन बनाना चाहते थे। उन्होंने एक बार कहा था कि अगर उनके पास टाइम मशीन होती तो वह हॉलिवुड की सबसे खूबसूरत अदाकारा मानी जाने वाली मर्लिन मुनरो से मिलने जाते।
  • 21 साल की उम्र में स्टीफन हॉकिंग ने दी थी मौत को मात1974 में हॉकिंग ने भाषा की छात्रा जेन विल्डे से शादी की थी। हालांकि, दोनों के तीन बच्चे होने के बाद 1999 में तलाक हो गया। इसके बाद हॉकिंग ने दूसरी शादी की।

 2014 में स्टीफन हॉकिंग की प्रेरक जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘द थिअरी ऑफ एवरीथिंग’ रिलीज हुई थी।

– प्रफेसर स्टीफन हॉकिंग ने 1965 में ‘प्रॉपर्टीज ऑफ एक्सपैंडिंग यूनिवर्सेज’ विषय पर अपनी पीएचडी पूरी की थी।

 बेहद दिलचस्प बात यह है कि स्टीफन गणित का अध्ययन करना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें मेडिकल से जुड़ने की सलाह दी। यूनिवर्सिटी कॉलेज में गणित उपलब्ध नहीं थे, ऐसे में उन्होंने फिजिक्स को चुना। तीन साल बाद उन्हें नैचरल साइंस में फर्स्ट क्लास ऑनर्स डिग्री मिली।

 दुनिया भर में मशहूर भौतिक विज्ञानी और कॉस्मोलॉजिस्ट हॉकिंग को ब्लैक होल्स पर उनके काम के लिए जाना जाता है।

 8 जनवरी, 1942 को इंग्लैंड को ऑक्सफर्ड में सेंकड वर्ल्ड वॉर के समय स्टीफन हॉकिंग का जन्म हुआ था।

 गैलीलियो की मृत्यु के ठीक 300 साल बाद हॉकिंग का जन्म हुआ था। 1988 में उन्हें सबसे ज्यादा चर्चा मिली थी, जब उनकी पहली पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम: फ्रॉम द बिग बैंग टु ब्लैक होल्स’ मार्केट में आई।
 इसके बाद कॉस्मोलॉजी पर आई उनकी पुस्तक की 1 करोड़ से ज्यादा प्रतियां बिकी थीं। इसे दुनिया भर में साइंस से जुड़ी सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक माना जाता है।

 1963 में स्टीफन हॉकिंग जब सिर्फ 21 साल के थे, तब उन्हें Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS) नाम की बीमारी हो गई। इसके चलते उनके अधिकतर अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। इस बीमारी से पीड़ित लोग आमतौर पर 2 से 5 साल तक ही जिंदा रह पाते हैं, लेकिन वह दशकों जिए।

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