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बिहार के ढाई करोड़ स्कूली बच्चे पढ़ेंगे बापू की ये नई किताबें

एक था मोहन किताब का मुखपृष्ठ
एक था मोहन किताब का मुखपृष्ठ
  • एक था मोहन और कॉमिक्स रूप में बापू की चिट्ठी नाम से दो किताबें बनकर तैयार
  • दोनों पुस्तकों को कॉपीराइट से मुक्त रखा गया है

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्लीः

बापू पर दूसरी किताब का मुखपृष्ठ
बापू पर दूसरी किताब का मुखपृष्ठ

बिहार के स्कूली बच्चों के लिए महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित दो किताबें तैयार करवाई गई हैं। किताबों की परिकल्पना बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की थी। एक था मोहन और कॉमिक्स रूप में एवं बापू की चिट्ठी नाम से दूसरी किताब बनकर तैयार हैं। किताबों में आलेख प्रभाष जोशी के  पुत्र लेखक सोपान जोशी ने लिखे हैं। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने भी सहयोग किया है। किताबों का प्रकाशक आईटीएम एजुकेशन ग्रुप है।

 

आईटीएम एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन रमाशंकर सिंह किताबों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं, पढ़िए- 

 

बिहार सरकार के मुख्यमंत्री जी ने चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह की शुरुआत करने के लिये हमें १० व ११ अप्रैल २०१७ को गांधी विचार पर “ राष्ट्रीय विमर्श “ की ज़िम्मेदारी दी थी मेरी इस शर्त को मंज़ूर कर कि जो भी हम करेंगें उसके लिये हम कैसा भी मानदेय या किसी भी रूप में पैसा अपनी पूरी टीम के लिये नहीं लेंगे सिर्फ आवास भोजन का आतिथ्य छोड़कर। हर बार आने जाने का किराया भी नहीं। विमर्श के आयोजन से ही शानदार ज्ञानभवन सभागार का उद्घाटन होना तय हुआ। विमर्श मे पूरे देश से विद्वान आये।बाद में पाँचहज़ार बैठक क्षमता का विशाल बापू सभागार भी।

यह दोनों परिकल्पनायें मुख्यमंत्री जी की ही थी। बिहार के ढाई करोड स्कूली बच्चों के लिये अलग अलग दो पुस्तकों का विचार सरकार ने तय किया और घोषणा की कि इतनी ही संख्या में प्रत्येक बच्चे के हाथ में गांधी जीवन व विचार पर सुगम रोचक भाषा में बगैर कोई तथ्यात्मक समझौते के आधिकारिक पुस्तकें तैयार हों जिनका वाचन स्कूलों में हो और तदुपरांत गांधी विचार पर विभिन्न प्रकार की गतिविधियॉं । पहली पुस्तक “ एक था मोहन” करीब छ: महीने पहले बनाकर डमी प्रतियॉं सहित दी गई थीं। दूसरी छोटे बच्चों के लिये “ बापू की चिट्ठी” जो कॉमिक्स व कथा रूप में है शताब्दी समारोह के समापन पर उपराष्ट्रपति जी ने अनावृत की ।

हमारीइस बाबत सब ज़िम्मेदारी कल पूर्ण हुईं। अब सरकार को ये पुस्तकें छापनी हैं और अपनी सार्वजनिक घोषणाओं को पूरा करना है !हमने तो अपने लिये छपवा कर काम भी शुरु कर दिया। अति उल्लेखनीय है कि दोनों पुस्तकों का आलेख युवा पत्रकार लेखक शोधकर्ता प्रतिभाशाली सोपान जोशी ने बडी मेहनत,अध्धयन और नवाचारपूर्वक तैयार किया और मेरे लगातार कोंचते रहने पर भी धैर्य और संयम से अपना काम करते रहे। शोधपरामर्श रहा अरविंद मोहन का।  बिहार के ही पर बैंगलोर में कार्यरत सोमेश ने अच्छे चित्र तैयार किये जो पूरी पुस्तक पर छाये हैं । दोनों पुस्तकों को कॉपीराइट से मुक्त रखा गया है – गांधी पर किसका कॉपीराइट? । 

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