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मीडिया की मौसम वैज्ञानिक हैं सुंदर युवतियां

अखबारों
अखबारों में कुछ इस तरह की तस्वीरें प्रकाशित होती हैं

(भेदभाव को लेकर अपील करेंगे युवक)

नवोदय टॉइम्स
दिल्ली से प्रकाशित आज के  नवोदय टॉइम्स में एक मौसम वैज्ञानिक गर्मी के आने का संकेत देते हुए 

गर्मी आ रही है, अख़बारों में अब आप देखेंगे लड़कियों की तस्वीरें दुप्पट्टे से मुँह ढके हुए या रंग बिरंगे छाते से धूप से बचते हुए और कैप्शन लिखा होगा गर्मी का कहर: धूप से बचती युवतियां। तो हम सबको पता लगेगा की गर्मी आ गयी।।

बरसात के दिनों में
बरसात के दिनों में

जब बरसात आएगी तब भी फुहारों के बीच अठखेलियां करती कोई युवती ही बताएगी की बरसात आ गयी, केप्शन होगा पानी की फुहारों में मस्ती करती युवतियां और जब सर्दी आएगी तब भी बड़ा सा लबादा ओढ़े कोई खूबसूरत नव युवती ही अख़बारों में छपेगी और लिखा होगा सर्दी का आगाज, सर्दी के थपेड़ो से बचती युवती।।।

इन मीडिया वालों को लड़कों से एलर्ज़ी है क्या? या मौसम वैज्ञानिक लड़कियां ही होती हैं? अरे सर्दी का सितम, गर्मी का कहर लड़कों पर भी होता है। देखिये भेद भाव नहीं। मीडिया के इस भेदभाव से तंग आकर युवाओं के एक संगठन ने मानव अधिकार आयोग में अपील करने पर विचार किया है।

अखबार
गर्मियों के दिनों में ऐसी तस्वीरें अखबार प्रकाशित करते हैं

अरे इतना ही नहीं जब गर्मी, सर्दी या बरसात शुरू होने वाली होगी फोटोग्राफर से न्यूज़ रूम में बोला जायेगा अरे फलाने देखो कहीं इंडिया गेट तरफ लड़कियों की फोटो ले आना और लगे कि हाँ मौसम शुरू हो गया है, बोलती तस्वीर लाना।
और हाँ हर फोटोग्राफर ये जानता है की अख़बारों की मौसम वैज्ञानिक युवतियां होती हैं और वो भी केवल सुंदर युवतियां। कड़वा सच है पर है। जो दिखता है वो बिकता है। बिकता वही है जो सुंदर हो। चाहे मौसम का हाल बताने वाली लड़कियां जिन पर आलेख केंद्रित है या टीवी एंकर या अभिनेत्रियां।
इतने बड़े टीवी न्यूज़ चैनल में एंकर को छोड़ दें तो सभी बाँकी लड़कियों का न तो मेकप होता और न ही सच में उनकी फिटनेस होती। क्योंकि वो दिखती नहीं। बहस कोई कितनी ही कर ले पर महिलायें भी ये जानती हैं दिखेंगी तो बिकेंगी। बिकना है तो सुंदर दिखना है। इसलिए सुंदर युवती ही मीडिया की मौसम वैज्ञानिक होती है।

(आलेख हक़ीक़त के पास होते हुए भी व्यंग शैली में है महिला साथी इसे गम्भीरता से न लें)

: प्रशांत राजावत

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