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शिवराज जी शर्म है, मगर आती नहीं आपको

शिवराज सिंह चौहान ने
भोपालः मीडिया महोत्सव जहां पर शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की बात कही।

एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर 

 

आदरणीय शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश।

हाल ही में आपके प्रदेश के भिण्ड जिले में एक टीवी चैनल के रिपोर्टर को खनन माफियाओं ने ट्रक से कुचलवा कर मरवा दिया। इस रिपोर्टर ने कुछ ही महीने पहले खनन माफिया से जुड़ा स्टिंग किया था। स्टिंग के बदले उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। स्थानीय पत्रकारों ने घटना के बाद प्रदर्शन करना शुरू किया और आपको भोपाल में घेरकर प्रेस से मिलिये कार्य़क्रम के बहाने मृतक पत्रकार के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की।

घटना तो आपके संज्ञान में पहले से थी क्योंकि आपने ही सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। पर तब आपने पत्रकार को आर्थिक सहायता की बात नहीं सोची। जब पत्रकारों ने आपको भोपाल में व्यक्तिगत रूप से कहा तो आप आर्थिक सहायता के लिए राजी हुए।

पर कितनी आर्थिक मदद। मात्र 2 लाख रुपए। आपको पता है 2 लाख रुपए की आज के समय में क्या औकात है। आप चार जोड़ी जूते 2 लाख में खरीद सकते हैं। या दो चश्मे। या केल्विन क्लीईन के 10 ट्राउजर।

आपसे जब पत्रकारों ने हाथ फैलाकर उस मृतक के लिए मदद मांगी तो आपके कोष से 2 लाख निकला। 2 लाख में 2 साल भी गुजारा नहीं होगा। पता नहीं लिखना चाहिए कि नहीं क्योंकि मैं उन तमाम प्रतिभाओं का सम्मान करता हूं जो विभिन्न क्षेत्रों (खेल, संगीत, फिल्म आदि) से आती हैं और उन्हें आपकी सरकार लाखों-करोड़ों रुपए सम्मान स्वरूप दे देती है। ए श्रेणी की नौकरी दे देती है। मैं नाम नहीं लिखना चाहूंगा पर आप कईयों बार खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए, विश्व विजेता टीमों को अच्छी खासी धनराशि देते रहे हैं। कई बार दूसरे प्रदेशों के खिलाड़ियों को भी आपने उम्दा प्रदर्शन के लिए भारी भरकम नकद राशि दी है। पंजाब और हरियाणा जैसे प्रदेश तो खिलाड़ियों को तुरंत एसपी डीएसपी, आईएएस बना देते हैं।

पता है मुझे पत्रकारों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है सरकार के पास। ऐसा नहीं है पत्रकारों की कोई उपलब्धियां नहीं होतीं। जान पर खेलकर बहुत रिपोर्टिंग होती हैं। बहुत अच्छी खबरें होती हैं। हां सरकारी सम्मान दिए जाते हैं पर सरकारी पद देने की कोई व्यवस्था नहीं। कोई बात नहीं। हमे चाहिए भी नहीं।

तमाम पत्रकारों की ओर से हम तो बस इतना चाहते हैं जब हमारा कोई साथी इतनी बेरहमी से मार दिया जाए। तो आप प्रदेश के मुखिया होने की जिम्मेदारी लेते हुए कम से कम उस पत्रकार के परिवार को इतना धन और सुरक्षा तो दें कि उसके अनाथ बच्चे पल सकें। पर आपकी जेब से 2 लाख ही निकला। 2 लाख तो आपकी एक बार की दिल्ली यात्रा का खर्च बनता होगा। शायद उससे भी ज्यादा। पर आपको पत्रकारों का दर्द समझ नहीं आता। शर्म है शेष आपमे, पर आती नहीं। क्यों। हमे भी नहीं पता।

भिण्ड के इसी पत्रकार ने पत्र लिखकर अपनी जान को खतरा बताया था और आपसे सुरक्षा की मांग की थी, आपके प्रधानमंत्री से भी की थी। पर आप लोगों ने सुना ही नहीं। क्योंकि सारी सुरक्षा तो आपके, आपके परिवार, घरों और कुत्तों तक के लिए आरक्षित है। आम जनता हो या पत्रकार वो तो इसी तरह मारा जाएगा और आप फिर पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की बात करते हैं। अच्छा मज़ाक है साब।

सुना है आपने पत्रकारों के ही एक आयोजन में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की बात एक पत्रकार की पहल के बाद कही है। अरे शिवराज जी। आपको तो खुद नहीं पता होगा कि आप कितनी घोषणाएं प्रति महीने करते हैं। कितनी घोषणाएं पूरी कीं ये भी पता नहीं होगा। आपने 24 महीने पहले ही अधिवक्ता सुरक्षा कानून लाने की बात कही थी। आप कहते रहते हैं। अभी तो आपकी गद्दी सलामत रहे हम यही दुआ करेंगे ताकि आप पत्रकार सुरक्षा कानून ला सकें क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और आपकी गद्दी खतरे में है।

पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की बात पर सुकून जताने वाले साथी भी जान लें कि ये वही देश है जहां पिछले दस वर्षों में पत्रकार हिंसा के किसी भी केस की जांच पूरी नहीं हो पाई है। ये हम नहीं कहते विश्व की सबसे प्रतिष्ठित संस्था जो पत्रकारों की हिंसा मामलों पर नजर रखती है कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिज्म का कहना है। और आप हैं कि पत्रकारों के एक कार्यक्रम में आकर गाल बजाकर चले जाते हैं।

  • एडीटर अटैक मीडिया मिरर सम्पादक का नियमित कॉलम है। इसपर प्रतिक्रिया देने के लिए मेल करें mediamirror.in@gmail.com
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