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पति के साथ पत्रकार अमृता राय ने पूरी की नर्मदा पदयात्रा

नर्मदा यात्रा
नर्मदा यात्रा के दौरान कुछ इस तरह होता था स्वागत
अमृता राय से गुफ्तगू
अमृता राय से गुफ्तगू

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्लीः

टीवी पत्रकार अमृता राय ने अपने पति म.प्र.के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ नर्मदा पदयात्रा पूरी कर ली। अमृता ने 192 दिनों में 3100 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा पति के साथ पैदल पूरी की। अमृता कहती हैं कि उन्हें लग नहीं रहा था कि वो इतनी लम्बी दूरी पैदल नाप पाएंगी। कभी डर जाती थीं तो कभी थक जाती थीं। पर श्रद्धाभक्ति के साथ पदयात्रा पूरी हुई।

समापन समारोह में कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ, अरुण यादव आदि मौजूद रहे। परिक्रमा जहां से भी होकर गुजरती थी दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी को देखने के लिए हुजूम टूट पड़ता था। लोग स्वागत में फूल बिछा देते थे। दिग्विजय सिंह पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद हैं इस नाते पुलिस का मजबूत सुरक्षा घेरा सदैव उनके साथ यात्रा के दौरान रहा। चिकित्सकों की टीम रही।

पति के साथ अमृता राय
पति के साथ अमृता राय

रानी साहिबा कहकर बुलाते थे लोग अमृता कोः

दिग्विजय सिंह देश के दिग्गज राजनेता तो हैं ही साथ ही मध्यप्रदेश के राघौगढ़ रियासत के महाराज भी हैं। चूंकि मध्यप्रदेश में दिग्गी राजा को राजा साब ही कहा जाता है इस नाते पत्रकार अमृता राय को भी लोग रानी साहिबा कहकर ही संबोधित करते हैं। उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह ने अमृता राय से दूसरी शादी की है, पहली पत्नी आशा सिंह की कैंसर से मौत हो गई थी। अमृता भी पहले से शादी शुदा हैं। अमृता के पति भारतीय जन संचार संस्थान दिल्ली में प्रोफेसर हैं। दोनों ने तलाक ले लिया है। अमृता यात्रा शुरू करने से ठीक पहले तक राज्यसभा टीवी की एंकर थी और वहां सरोकार कार्यक्रम होस्ट करती थीं। पूर्व में एनडीटीवी में भी रही हैं।

अमृता फोटोग्राफी भी करती रहीं

यात्रा के दौरान अमृता राय लगातार फेसबुक पर यात्रा संस्मरण लिखती रहीं और फोटोग्राफी भी करती रहीं। अगर यात्रा के दौरान की गई फोटोग्राफी की प्रदर्शनी लगाएं तो लोग ग्रामीण जीवन को करीब से जान पाएंगे। चूंकि अमृता पत्रकार हैं तो जन जीवन से जुड़े मुद्दों पर भी वो लिखती रहीं।

दोस्ती
दोस्ती

यात्रा के बारे में अमृता रॉय के शब्द 

आज यानी ९ अप्रैल को हमारी नर्मदा परिक्रमा पूर्ण हो गई।ये ३१०० किलोमीटर की परिक्रमा रही जिसे हमने १९२ दिनों में पैदल चलकर पूरा किया। माँ नर्मदा के प्रति श्रद्धा से मन विह्वल हो जाता है जब सोचती हूँ कि क्या सचमुच हमने ये कर डाला।
अपने पति का संकल्प पूरा करने में मैं सहभागी बनी ये भी माँ नर्मदा का ही आशीर्वाद था।
इस मौक़े पर मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं बस भाव हैं। वो भाव जो अलग अलग रूपों में बह रहे हैं। सबसे बिछड़ने का भाव है तो घर लौटने का भी भाव है।

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