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पत्रकार मर्डर केस में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट
कोर्ट

दिल्लीः

‘न्यूज24’ में असोसिएट प्रड्यूसर रहे कामता सिंह मर्डर केस की सुनवाई के दौरान दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश अमित अरोड़ा ने पुलिस से कड़े लहजे में पूछा कि जब मौत चारों तरफ संदेह पैदा कर रही है तो इस मामले में अब तक एफआइआर दर्ज क्यों नहीं हुई। शुरुआत में जो साक्ष्य जुटाने चाहिए थे, पुलिस ने वे भी नहीं जुटाए। जिस कमरे में कामता मृत मिले, उस कमरे को पुलिस ने सील क्यों नहीं किया। पुलिस ने अदालत से एक सप्ताह का समय मांगा। इस पर अदालत ने अगली तारीख में आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने को कहा है।

वहीं पीड़ित पक्ष ने अदालत में अर्जी लगाकर आरोपितों का नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

दरअसल, बीते साल मार्च महीने में कामता सिंह का संदिग्ध हालात में घर में ही शव मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो पीड़ित पक्ष कोर्ट पहुंच गया और बाद में दो लोगों पर आरोप लगाते हुए नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता मोहम्मद फारुक ने बहस के दौरान पुलिस की कार्रवाई और जांच पर भी सवाल उठाए थे, जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई।

गौरतलब है कि 30 वर्षीय पत्रकार कामता सिंह का शव उनके घर में 2 मार्च 2017 को मिला था। पहले इस बाद का अंदेशा लगाया जा रहा था कि उनका निधन हर्टअटैक से हुआ है, लेकिन इसके बाद उनके परिजनों ने उनकी पत्नी व ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया था। अधिवक्ता मोहम्मद फारुक ने बताया कि इस मामले में मृतक की पत्नी अलका सिंह और रिश्ते के भाई रवि सिंह का नार्को टेस्ट कराने के लिए अर्जी लगाई गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले में पुलिस ने सुस्ती बरती है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी संदेह के घेरे में है।

बता दें कि मरने से पहले कामता सिंह ‘न्यूज24’ में असोसिएट प्रड्यूसर के तौर पर कार्यरत थे और दिसंबर, 2016 के अंत में वे ‘इंडिया टीवी’ चैनल से यहां आए थे। तब ‘इंडिया टीवी’ में असिसटेंट प्रड्यूसर थे और स्पोर्ट्स डेस्क देखते थे।

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