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बाबा रामदेव पर लिखी प्रतिबंधित किताब पर रोक हटी

किताब का मुखपृष्ठ एवं उसकी लेखिरा प्रियंका
किताब का मुखपृष्ठ एवं उसकी लेखिरा प्रियंका

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्लीः 

मुंबई की पत्रकार  प्रियंका पाठक-नारायण की किताब गॉडमैन टू टायकूनद अनटोल्ड स्टोरी ऑफ बाबा रामदेव  अब आप पढ़  सकेंगे। गौरतलब है कि  इस किताब पर रोक लगाने के लिए दिल्ली की अदालत में केस हुआ था।  कड़कड़डूमा अदालत में केस चल रहा था लेकिन अब अदालत ने किताब पर से रोक हटा ली है।

अब किताब जगरनॉट बुक्स ऐप पर निशुल्क पढ़ी जा सकती है. पिछले साल यह रोक दिल्ली की एक अदालत द्वारा एकतरफा तौर पर तब लगाई गई थी, जब बाबा रामदेव ने अदालत में किताब को चुनौती दी थी. किताब बाजार में आने के बाद बाबा की मुश्किले बढ़ सकती हैं क्योंकि किताब में बाबा के खिलाफ कई रहस्योद्घाटन किए गए हैं। 

 

किताब औऱ लेखिका के बारे में जानिए

बाबा रामदेव पर एक अंग्रेजी पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण ने एक किताब लिखी थी। जिसका नाम है ‘गॉडमैन टू टाइकून: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ बाबा रामदेव‘। इस किताब में प्रियंका ने बाबा रामदेव के योग गुरु बनने से लेकर पतंजली से व्यापार की दुनिया में एक लंबा सफर तय करने के बारे में बताया है। हालांकि बाबा रामदेव की याचिका के बाद इस किताब की बिक्री पर दिल्ली की एक अदालत ने रोक लगा दी थी।

 

किताब की बिक्री पर रोक लगने के बाद प्रियंका ने कहा कि जिस तरह धीरूभाई अम्बानी के कारनामों पर लिखी किताब ‘द पोलियस्टर प्रिंस’ देश के बुक स्टाल्स से गायब करवा दी गई थी उसी तरह मुझे लगता है की ये किताब भी बुक स्टाल्स से गायब करवा दी जाएगी। प्रियंका का कहना है कि इस किताब के जरिए उन्होंने बाबा रामदेव के कई रहस्यों को उजागर किया है। बाबा रामदेव के इस अद्भुत जीवन काल में कई हादसे हुए है अथार्त बाबा जिस भी व्यक्ति से कोई गुर सीखते है वह व्यक्ति उनके जीवन से गायब हो जाता है। ऐसे ही कई खुलासे प्रियंका ने इस किताब में किए हैं।

 

  • प्रियंका का कहना है कि बाबा रामदेव के गुरु रहे 77 वर्षीय गुरु शंकर देव एक दिन सुबह सैर करते हुए अचनाक कही गायब हो गए। आज तक उनका कोई भी पता नहीं लगा पाया है। गुरु शंकर देव ने ही बाबा रामदेव को हरिद्वार में अपना दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट व अरबों की सम्पति दान की थी। जब शंकर देव गायब हुए तब रामदेव विदेश यात्रा पर थे लेकिन इतनी बड़ी घटना घट जाने के बाद भी रामदेव विदेश से दो महीने बाद भारत आए थे। इस मामले में पुलिस गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाती रही जिसके बाद कोर्ट ने ये मामला 2012 में सीबीआई को सौंप दिया। लेकिन सीबीआई भी आज तक इस मामले का खुलासा नहीं कर पाई।
  • बाबा रामदेव को आयुर्वेद दवाएं बनाने का लाइसेंस उनके मित्र व आयुर्वेद के विद्वान स्वामी योगानंद में 1995 में दिलवाया था। इससे पहले बाबा रामदेव उन्हीं के लाइसेंस पर दवाएं बनाते थे। दोनों ने 2003 तक साझेदारी में काम किया लेकिन उसके बाद अलग हो गए। इसके ही कुछ समय बाद स्वामी योगानंद का शव उनके घर पर खून से लथपथ मिला। पुलिस ने इस केस को 2005 में बंद कर दिया।
  • बाबा रामदेव को आयुर्वेद के व्यापार से लेकर स्वदेशी के नारे तक का रास्ता राजीव दीक्षित ने दिखाया था। रामदेव के व्यापार का ब्लूप्रिंट राजीव दीक्षित ने ही तैयार किया था। लेकिन 2010 में राजीव दीक्षित की मौत हो गई। मौत का कारण दिल का दौरा पड़ना बताया गया था। लेकिन ये भी खबर थी कि मौत के दूसरे दिन उनके दाह संस्कार के समय देखा गया था कि राजीव दीक्षित के शरीर का रंग बदलने लगा था। उनके समर्थको ने पोस्टमॉर्टम करवाने की मांग रखी जिसे खारिज कर दिया गया और राजीव दीक्षित का पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया।

प्रियंका का कहना है कि उन्होंने अपनी किताब में इस तरह के कई और खुलासे किए हैं। उनके अनुसार इन खुलासों से बाबा रामदेव नाखुश हैं इसलिए उनकी किताब बाजार में आने नहीं दि जा रही है।

 

                                                  

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