Home > रचनाकर्म > क्रास हुए राहुल देव, स्त्री सम्मान में सेंध लगाते लेखक-पत्रकार

क्रास हुए राहुल देव, स्त्री सम्मान में सेंध लगाते लेखक-पत्रकार

मुक्तांगन
मुक्तांगन के इस पोस्टर पर लगे क्रास बने विवाद की जड़।

एडीटर अटैकःप्रशांत राजावत

 

मामला लगभग दस दिन पुराना हो गया। मध्यप्रदेश की यात्रा पर अचानक जाना हुआ इसलिए लिख नहीं पाया था। पर लिखना जरूरी था ताकि आपलोगों को सच्चाई पता लगे साहित्य और पत्रकारिता जगत की गंदगी की।

हुआ कुछ यूं कि दैनिक जागरण ने कठुआ रेप मामले की खबर को इस तथ्य के साथ प्रकाशित किया कि वहां रेप हुआ ही नहीं था और इस खबर पर देशभर में बवाल मच गया। दैनिक जागरण अखबार की प्रतियां जलाई जाने लगीं, जागरण के बहिष्कार की अपील होने लगी। लोग जागरण के खिलाफ सड़कों पर मार्च करने लगे।

इसी बीच दैनिक जागरण द्वारा प्रायोजित साहित्यिक कार्य़क्रम मुक्तांगन जो कि दिल्ली में होता है उसका होना सुनियोजित हुआ। हालांकि मुक्तांगन श्रंखलाबद्ध लगातार आय़ोजित होता आ रहा है। मुक्तांगन ने जैसे ही आधिकारिक सूचना जारी कि तो इस कार्यक्रम में जो वक्ता थे साहित्य व मीडिया जगत से उन्होंने एक एक करके मुक्तांगन का बहिष्कार करना शुरू कर दिया। चूंकि मुक्तांगन अपने पोस्टर को फेसबुक में जारी कर चुका था और उसमे सभी वक्ताओं के नाम लिखे थे। वक्ताओं ने कठुआ मामले पर जागरण की निंदनीय रिपोर्टिंग का हवाला देते हुए इस कार्य़क्रम से किनारा किया और कहा कि जिस कार्यक्रम का प्रायोजक इतना घटिया अखबार हो उसके कार्यक्रम में हम नहीं जा सकते।

लेखकों के बहिष्कार के बाद मुक्तांगन की मुखिया ने मुक्तांगन के उस पोस्टर में उन लेखकों के नाम पर स्केच से काला क्रास लगा दिया जिन्होंने कार्य़क्रम का बहिष्कार किया था। क्रास लगाकर उन्होंने फिर फेसबुक पर पोस्टर जारी कर दिया। इस पोस्टर का सबसे पहले विरोध किया एक लेखक ने। उन्होंने वक्ताओं के नाम पर काले क्रास लगाने का विरोध किया। मुक्तांगन की मुखिया ने जब उनसे इस मामले में दखल न देने की बात कही तो लेखक महोदय अभद्रता पर उतर आए और बोले आप जैसे दो कौड़ी के आयोजक मुझे काम सिखाएंगे। लेखक की टिप्पणी का विरोध करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि आपकी भाषा औऱ सोच पर धिक्कार है। और इसी के साथ बड़े स्तर पर विवादित टिप्पणी करने वाले लेखक का विरोध सोशल साइट्स पर शुरू हो गया। लेकिन मामला यहीं नहीं रुका इस लेखक की बयानबाजी को आधार बनाते हुए राहुल देव ने अपनी फेसबुक वाल पर घटनाक्रम का जिक्र किया। जिसमें राहुल देव को भी संघी औऱ चापलूस बताते हुए कटघरे में खड़ा किया गया। बहुत कुछ उनके बारे में कहा गया। जो उनके कद और कामकाज के हिसाब से निंदनीय है।

साहित्य औऱ मीडिया जगत के लोग समाज के अग्रिम पंक्ति के प्रबुद्ध लोग माने जाते हैं। अगर यही तबका भाषायी मर्य़ादा को तार तार करेगा तो बात कैसे बनेगी।

हालांकि साहित्य जगत में आरोप प्रत्यारोप नई बात नहीं है। यहां आएदिन शीत और वाक युद्ध सोशल मीडिया में पढ़ने को मिलते रहते हैं। गैंगबाजी और गुटबाजी साहित्य जगत में जमकर हावी है। इन सबके बीच दिलचस्प बात ये है कि साहित्य औऱ मीडिया जगत में महिला ही महिला का विरोध कर सकती है। कोई महिला अगर पुरुष द्वारा ट्रॉल हो रही है तो महिलाएं ही उसका साथ नहीं देती उल्टा पुरुष का साथ देती हैं।

युवा लेखक वर्ग भी भाषायी मर्यादा अक्सर ताक में रखते देखे जा रहे हैं। जरा सा उन्हें ट्रॉल किया गया तो वो खुले आम मां-बहन पर आ जाते हैं। ये चिंताजनक हैं। उनकी संवाद शैली बहुत हल्के शब्दों से सजी होती है।

खैर

ये घटनाक्रम चल ही रहा था कि दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक पुरुष और एक महिला पत्रकार में तूतू मैं मैं हो गई। दोनों एक दूसरे को नीचा दिखाने के चक्कर में सार्वजनिक मंच फेसबुक पर भाषायी मर्य़ादा खो बैठे। जबकि दोनों वरिष्ठ पत्रकार हैं। मामला ये था कि प्रेसक्लब में महिला पत्रकारों का कोई संगीत समारोह चल रहा था जिसका एक पुरुष पत्रकार अपनी बेटी से वीडियो बनवाने लगा। महिला पत्रकारों ने वीडियो बनाने से मना किया उस बच्ची को। यहीं से बात बिगड़ गई। इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प की महिला पत्रकार ने पुरुष पत्रकार की इस हरकत को निजता का हनन बताया और प्रेस क्लब के उन नियमों का भी हवाला दिया कि यहां वीडियो बनाने की अनुमति नहीं है। महिला पत्रकार इस मामले पर इतनी बिफरीं कि अपनी फेसबुक वाल पर इस पत्रकार को गैर पत्रकार बताते हुए घटिया कह डाला और पीटने की नसीहत दे डाली। महिला पत्रकार पर जवाबी कार्रवाई करते हुए पत्रकार साहब ने भी भाषायी मर्यादा की सीमाएं ही तोड़ डालीं बोले कि मुझे धमकाने की जरूरत नहीं है लिखूंगा बिना फैक्ट के आपके बाप का क्या।

फिर पत्रकार साब जो बोले वो पढ़िए–

तुम जैसी वाहियात और दो कौड़ी की औरत मैंने नहीं देखी। पत्रकार तुम्हे कह नहीं सकता क्योंकि हर जगह से धकियाई गई हो। धकियाई गई क्योंकि लिखने पढ़ने से तुम्हारा कोई वास्ता नहीं। तुमने जितनी निर्लज्जता, ओछापन करना था कर लिया। क्योंकि तुम्हारा असली चेहरा यही है।

इसके बाद महिला पत्रकार को पुरुष पत्रकार के समर्थक घेरने लगे। बोलने लगे ये दलाल है, मुख्यधारा की पत्रकार कभी रही नहीं। इसको ऐसे ही धोना चाहिए।

इसे पूरे वाकये के बाद मामले की शिकायत प्रेस क्लब के अध्यक्ष को लिखित रूप से दी गई। प्रेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया को दी गई। हालांकि मामले में क्या कार्रवाई हुई। दोनो तरफ से कोई बयान नहीं आय़ा।

इस मामले में पत्रकार व साहित्यकार गीताश्री की टिप्पणी-

जिस पुरुष पत्रकार पर घटियापन के आरोप महिला पत्रकार लगा रही हैं वो तो हमारे मित्र हैं. अपने क्लब भी अक्सर आते रहते हैं. जहाँ तक मैं जानती हूँ, इन महिला पत्रकार ने ग़लत धारणा बना ली है इनके बारे में. सबको गलतफहमी हो रही है. हमेशा विक्टिम कार्ड या स्त्री कार्ड नहीं खेलना चाहिए. कोई पहले से शिकायत हो तो अलग बात है. मैं मामले की जाँच कर चुकी. ये महिला पत्रकार नाराज हैं इनसे कि इन्होंने iwpc में चुनाव परिणाम की खबर डाली. कुछ बहस भी हुई थी वहाँ .
देखिए, हमें जजमेंटल नहीं होना चाहिए. उनकी बिटिया ये वीडियो बना रही थी.  उनकी बिटिया को आप लोगो ने मना किया तो उसने बंद कर दिया.
हम सब पत्रकार बिरादरी से हैं. आपस में ऐसी छीछालेदर जैसे साहित्यकार करते हैं?
अन्य लोग भी कुछ का कुछ बक रहे. अपने बयान के प्रति हमारी कोई जवाबदेही नहीं होती क्या ?
मेरी बात बुरी लगे तो माफी चाहूँगी.

  • एडीटर अटैक मीडिया मिरर सम्पादक का नियमित कॉलम है
Share this: