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रवीश कुमार के नाम बहुत ही दिलचस्प पत्र, पोल खोल देगा उनकी

हार्वर्ड विश्वविद्यालय में रवीश कुमार।
रवीश कुमार।

आदरणीय Ravish Kumar जी

बहुत दिनों बाद आपके नाम एक पत्र लिख रहा हूँ और आपको मेंशन भी कर रहा हूँ , इस उम्मीद में की हो सकता है आप पढ़ें ,

मैं पहले बता देना चाहता हूँ , मुझे बीजेपी आईटी सेल से चवन्नी नहीं मिलता और खरीद मुझे इटली भी नहीं सकता ।
इसलिए यह पत्र जमीन पर रहने वाले लोगों की दशा को समझते हुए उनके दर्द को बाँटने का आपसे प्रयास भर है ,

रवीश जी आप बड़े पत्रकार हैं , एक राष्ट्रीय चैनल पर प्राइम टाइम करते हैं , नौकरी सीरीज पर आपने सराहनीय कार्य किया ,

अपने पेज पर रोज लोग आपको troll करते हैं कभी ईमानदारी से सोचा है ऐसा क्यों होता है ?

उनमें से कई मेरे परिचय में हैं और मैं अच्छी तरह से जानता हूँ वो किसी आईटी सेल के नहीं है न उन्हें 100 रुपये प्रति कमेन्ट मिलता है ,
फिर भी वो ऐसा करते हैं क्योंकि आप वही पत्रकारिता कर रहें जो आईटी सेल चाहता है ,

हम आपसे क्या चाहते हैं ?
बस एक चीज की हुई घटनाओं का बिना पक्ष लिए थ्योरी बेस्ड नहीं बल्कि प्रैक्टिकल तरीके से विश्लेषण होना चाहिए ,

हमारी आपसे मुख्य शिकायत यह है कि आप मुसलमानों का हद से अधिक पक्ष लेते हैं ,

आप कहते हैं , भगवा गमछा पहन के मुसलमानों को डराना बंद होना चाहिए
आप एक काम क्यों नहीं करते खुद भगवा गमछा पहन के मुसलमानों की बस्ती में जाइए , मुँह बाँध लीजियेगा और उन्हें धमका के वापस आ जाइये

अगर वो आपकी धमकी से डर के भाग गये तो आप सही
अगर उन्होंने आपका हाँथ पैर तोड़ दिया तो हम सही ।

आपको पता है रविश जी , जिस वक़्त आप पत्रकार बने उस वक़्त सोशल मीडिया पहले तो था नहीं और था भी तो बहुत कमजोर ,

अब हम आप से सवाल करें तो आईटी सेल के हो गए , ये तो वही बात है , बलात्कार हुआ जनता सड़क पे निकली तो सत्ताधारी दल ने बोल दिया , सब साले विपक्षी हैं ।

कठुआ बालात्कार पर आपने खूब outrage दिखाया पर गीता केस में कहने लगे की हर घटना की रिपोर्टिंग नहीं कर सकता ,
आसिफा के बलात्कारियों के समर्थन में बीजेपी नेताओं और बार कॉउंसिल ने नारे लगाए इसलिए लिखा

पहली बात तो उन्होंने नारे सीबीआई जाँच के लिए लगाए फिर भी आपकी बात मानता हूँ

तो आप तब क्यों नहीं बोले
जब मुसलमानों ने याकूब के समर्थन में नारेबाजी की , शहीद स्मारकों को तोड़ा , JNU के भारत तोड़ो वीडियो को आपने पूरी ताकत से फेक बताने की कोशिश की , जबकि बाद में वो सत्य पाए गए एक अन्य लैब में ,

JNU के छात्रों की फेसबुक प्रोफाइल देखिये जिन्होंने लाल सलाम का हाँथ थामा है वो वहाँ भी कश्मीर की आजादी की बात करते हैं , तो मैं कैसे मान लूँ वो देश विरोधी नारे नहीं लगा सकते ?

मैं बताता हूँ आपकी असली समस्या ,

ध्यान से समझियेगा ,
मैं ब्राह्मण हूँ , ट्रेन में सफर कर रहा , मेरी लड़ाई हुई किसी भी व्यक्ति से सीट को लेकर , रोज होती है भारतीय ट्रेनों में , सामने वाले ने मुझे धक्का दे दिया , मैं मर गया ,
मीडिया लिखेगा ,

आपसी विवाद बनी वजह , ट्रेन से कटकर युवक की मौत ,
लेकिन यदि मैं दलित हूँ तो मीडिया लिखेगा
ट्रेन से कटकर दलित लड़के की मौत ,

जब मरने वाला ब्राह्मण/ क्षत्रिय होगा मीडिया युवक लिखती है चाहे मारने वाला दलित पिछड़ा ही क्यों न हो लेकिन अगर मरने वाला दलित मुस्लिम है तो बाकायदे चटखारे लेके लिखा जाता है , टीवी पर पढ़ा जाता है ।

डॉक्टर नारंग की मौत रोहिंग्या मुसलमानों की वजह से हुई , किसी मीडिया ने नहीं लिखा , मुसलमानों ने हिन्दू डॉक्टर की हत्या की ,
पर जैसे ही मरने वाला मुस्लिम होता है , मीडिया लिखता है , मुस्लिम बॉय किल्ड बाय हिन्दू आउटफिट्स ।

ये मीडिया का राजनीतिकरण है जिसमे सबसे आगे आपका चैनल NDTV है ,
हुई घटना में जाति खोजना आपका काम है फिर मजबूरन हमे आपको सच दिखाना पड़ता है ,

आप का ही कथन है ,
अगर इस देश में मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे तो क्या हो जाएगा , कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा

इतने भी जाहिल नहीं हैं आप जितना दिखता है ,
कश्मीर में ये बहुसंख्यक हुए , बंगाल में 40% हैं हिन्दुओ का पलायन शुरू हो गया ,

पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दू कहाँ गए ?

आपको लगता है भारतीय मुसलमान कट्टर नहीं है ?
चार मीठी बातें आपके सामने बोल कर ये निकल जाते हैं और आप खुश हो जाते हैं जबकि जमीन पर किसी मुस्लिम मोहल्ले में जाइये

बिना पत्रकार की ID लिए , सारी कट्टरता सामने होगी ,
जनता बटन प्राइम टाइम देख कर कभी नहीं दबाती इस भुलावे में मत रहिएगा

वो अपने आस पास के माहौल में सुरक्षित रहना चाहती है और इसी सुरक्षा के भाव की कीमत है भाजपा का शासन ।

जब ये नहीं होता बहुंसख्यक असुरक्षित महसूस करते हैं , कोई भी असलम रिजवान जैसा लफंगा हमारी बहन बेटियों को छेड़ के चला जाता है , विरोध करने पर टोपीदीनो की भीड़ इकठ्ठा करके मरने मारने पर उतारू हो जाता है और पुलिस बस वोट बैंक के चक्कर में वारदात पर आती ही नहीं

क्योंकी असलम के 100 वोट एरिया के कांग्रेसी सपाई विधायक खोना नहीं चाहते ,

आप ये जितनी पत्रकारिता झाड़ते हैं न जाके पता करिये पाकिस्तान में जियो टीवी का प्रसारण ही रोक दिया गया था क्योंकि उन्होंने आर्मी विरोधी स्टैंड ले लिया,
पाकिस्तान का उदाहरण इसलिए दे रहा क्योंकि वहाँ मुसलमान बहुंसख्यक हैं , और आपके हिसाब से मुसलमान बहुसंख्यक हो जाएगा तो क्या हो जाएगा

का प्रत्यक्ष उदाहरण पाकिस्तान है ,

अब ये मत कह दीजियेगा वो कोई दूसरे गोले के मुसलमान हैं , यही से गये थे सब , जो वहाँ थे वो भी भारत में ही थे 47 के पहले ।

हिन्दू कट्टरता , मुस्लिम कट्टरता की प्रतिक्रिया है बस ,

मैं नहीं कहता की हिन्दुओ को उनकी तरह कट्टर होना चाहिए पर जब आप जैसे पत्रकार वास्तिविक नैरेटिव ही बदल के उलटी खबर दिखाएँगे तो जमीन पर बैठी जनता असहाय होकर कट्टर लोगो को बढ़ावा देगी

क्योंकि हमारी सहायता करने के लिए कोई नहीं है , न मीडिया न पुलिस न कांग्रेस की सरकार ।

रविश कुमार पांडे जी , हिन्दुओ को कट्टर बनाने में आपकी दोगली पत्रकारिता का बहुत बड़ा योगदान है ,

हिंदी भाषियों के सिरमौर बन सकते थे आप लेकिन जहर बन कर रह गए ,
अब ये जहर इतना बढ़ गया है कि जिन्ना तक का बचाव आपको करना पड़ रहा

वो जिन्ना जो लाखो हिन्दुओ का कातिल है ,

अगर कांग्रेसी पुलिस , मीडिया , हमारा साथ देती तो हमे भगवा पहन सड़क पर हो रही नमाज रुकवाने नहीं जाना पड़ता ,

किस कानून में लिखा है सड़क पर नमाज पढ़ो और इस तपती दोपहरी में पूरा शहर जाम कर दो ?

मैं हिन्दुओ को भी कहता हूँ , सड़क खाली रखें , कल को तुम्हारे घर का कोई एम्बुलेन्स में रहा तो माथा पीटने के सिवा कुछ नहीं बचेगा ।

रविश जी आप गुनहगार हो
जिस युवा को पढ़ाई करनी चाहिए वो इस वक़्त पोस्ट लिख रहा और जिसे काम धंधा देखना चाहिए वो भगवा पहन के गली गली कट्टर बना घूम रहा

दोनों की ही बर्बादी
आप जैसी मीडिया और काँग्रेस जैसी सरकारों की पुलिस ने किया है

दोषी हो आप
इस दोष से दोषमुक्त नहीं हो सकते ,

मेरा सपना है कि मैं समकालीन इतिहास पर एक पुस्तक लिखूँगा , अगर मेरा सपना पूरा हुआ तो उसमे दोष आपके माथे भी मढ़ा जाएगा

इस पाप से ऋणमुक्त नहीं हो सकते आप ।

नमस्कार !!
शिवेंद्र शुक्ला, छात्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय 

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