Home > जरा हटके > महिलाओं के मस्टरबेसन पर बवाल क्यों

महिलाओं के मस्टरबेसन पर बवाल क्यों

वीरे दि वेडिंग
वीरे दि वेडिंग की स्टारकास्ट

– हिंदी फीचर फिल्म वीरे दि वेडिंग रिलीज हो चुकी है। बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियां सोनम कपूर, करीना कपूर के साथ स्वरा भास्कर भी इसमें जलवा दिखा रही हैं। फिल्म ने अच्छा कारोबार किया है। निधि मेहरा औऱ मेहुल ने इस फिल्म की कहानी लिखी है। शशांक घोष इसके निर्देशक हैं। और ढेर सारे लोग अनिल कपूर, एकता कपूर आदि इसके निर्माता हैं।

 

खैर काम की बात करते हैं। इन सबसे आपको क्या मतलब। मतलब कि बात ये कि फिल्म से ज्यादा फिल्म में दी जा रही मां-बहन की गालियों की चर्चा है जो कि अभिनेत्रियां दे रही हैं। इन सबसे ज्यादा भी जिस बात की चर्चा है वो है स्वरा भास्कर का मस्टरबेसन (हस्त मैथुन ) का सीन। आमतौर पर फिल्म के बारे में जानने के लिए लोग ट्रेलर देखते हैं पर यकीन मानिए यू ट्यूब प्रबंधन का कहना है कि वीरे दि वेडिंग का ट्रेलर कम स्वरा का मस्टरबेसन सीन वाला वीडियो ज्यादा व्यूज पा रहा है। मस्टरबेसन सीन पर स्वरा तो काफी कुछ बोल ही चुकी हैं उनकी मां इरा भास्कर जो कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं, ने भी कहा कि हमारे समाज में ऐसे विषयों को दिखाने या ऐसे विषयों पर बोलने का रिवाज अभी भी नहीं है।

मस्टरबेसन कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। ये एक तरह से शारीरिक जरूरत है।  हर पुरुष-महिला या लड़का -लड़की मस्टरबेसन करता है। इसको चरित्र से भी जोड़कर नहीं देखा जा सकता। हालांकि हमारे भारतीय समाज में अभी इतना खुलापन नहीं है और ये मान्यताएं हैं कि कुछ चीजें परदे के पीछे रहें तो अच्छा है। कुछ स्त्रीवादी पुरुष औऱ महिलाएं सीधे तौर पर इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं तो कुछ कह रहे हैं कि अगर पुरुषों के मस्टरबेसन दृश्यों में आपत्ति नहीं है तो महिलाओं के मस्टरबेसन दृश्य में आपत्ति क्यों है। वो इस मामले को भी स्त्री औऱ पुरुष भेदभाव से जोड़ रहे हैं।

अभी कुछेक महीने पहले ही जानी मानी लेखिका अरुंधति रॉय दिल्ली में थीं अपनी दूसरी किताब द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैपेन के हिंदी अनुवाद के विमोचन अवसर पर। वहां पर सवाल जवाब सत्र के दौरान एक पाठक ने जब उनसे पूछा कि आपकी किताबों में अश्लील सामग्री होती है। आपकी उपन्यास में मस्टरबेसन का जिक्र आता है। इस पर अरुंधति ने लाइव चर्चा के दौरान तपाक से कहा था कि मस्टरबेसन यानि की हस्तमैथुन पर दिक्कत क्या है। हम सभी मस्टरबेसन करते हैं। ये अपराध नहीं है। आगे अरुंधति रॉय ने कहा था कि जैसे हम टॉयलेट करते हैं वैसे मस्टरबेसन भी एक सामान्य प्रक्रिया है।

बहरहाल अरुंधति कुछ भी कहें लेकिन भारतीय समाज में अभी इस स्तर पर बदलाव फिलहाल संभव नहीं कि टॉयलेट करना और मस्टरबेसन करना एक समान हो। भारतीय पुरुष आमतौर पर कहीं भी खुले में टॉयलेट करते देखे जा सकते हैं पर मस्टरबेसन करते हुए शायद ही किसी ने आजतक किसी पुरुष को सार्वजनिक जगह पर देखा हो।

अच्छा है भारतीय जन मानस ऐसी फिल्मों को, स्वरा भास्कर जैसी अभिनेत्रियों के इस तरह के दृश्यों को पचाना सीख लें और उन्नत सोच वाले कहलाएं…वहीं महिला जनित फिल्मों के चलन के लिए भारतीय सिनेमा को बधाई। पर सवाल ये भी है कि महिला प्रधान फिल्मों का तमगा देकर हम किस तरह की फिल्में प्रस्तुत कर रहे हैं। इंग्लिश-विंग्लिश, मर्दानी और हिचकी भी महिला प्रधान फिल्में ही थीं और एक तरफ स्वरा के हस्तमैथुन दृश्य और मां बहन की गालियों से सजी यह फिल्म (वीरे दि वेडिंग) भी महिला प्रधान है।

अब फिल्म निर्माताओं और दर्शकों दोनों को ही पूरी छूट है ये तय करने की कि वो इन दोनों तरह की महिला प्रधान फिल्मों में से किसे बनाएं (फिल्म निर्माता) और किसे देखें (दर्शक)।।

  • प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर
Share this: