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कोई ऑन डिबेट पत्रकार को दलाल बोले तो चिंतन की दरकार है

अमीष देवगन
एक कार्य़क्रम के दौरान अमित शाह के साथ सेल्फी लेते अमीष देवगन
अमीष देवगन
प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर

एडीटर अटैकः प्रशांत राजावत , सम्पादक मीडिया मिरर

 

–  मेरे घर में टीवी नहीं है औऱ होती भी तब भी न्यूज चैनल नहीं ही देखता। इसलिए मुझे बहुत बेहतर तरीके से पता नहीं पर शायद पिछले दिनो एक कांग्रेस प्रवक्ता ने लाइव शो के दौरान जिस टीवी एंकर को भड़वा औव दलाल कहा वो शायद न्यूज 18 के हैं। नाम है अमीष देवगन। नाम और मामला क्लियर है मुझे।

मैंने यूट्यूब पर पूरा वीडियो देखा जिसमें अमीष को कांग्रेस प्रवक्ता दमदारी से भड़वा और दलाल कह रहे हैं। ये कैसा दौर है जब हम पत्रकारों को हमारे ही संस्थान में आकर लोग गाली देकर चले जाते हैं। कभी पीट देते हैं तो कभी कुछ भी बोलते हैं। महज 10-12 दिन पहले ही जी भारत में लाइव शो के दौरान मारपीट हो गई और मामला भी दर्ज हो गया।

तमाम पक्षों पर गौर करने के साथ साथ पत्रकारों को और खासतौर पर मछली बाजार में निर्मित हुए टीवी चैनलों के मालिकों और कार्य़क्रम निर्माताओं को चिंतन करने की जरूरत है तभी इस छीछालेदर से बचा जा सकता है।

अमीष के साथ जो कुछ हुआ वो निंदनीय है। पर हम इस स्टेज तक आखिर पहुंचे कैसे, आखिर एक नेता की हिम्मत कैसे हो गई एक पत्रकार को दलाल औऱ भड़वा कहने की। क्या कुछ हदतक पत्रकारों की भी कमी है, क्या पत्रकारिता का स्तर गिरा है, कार्यक्रमों की नैतिकता दांव पर है। क्या हम वाकई राजनैतिक पार्टियों के जन संपर्क का माध्यम बनकर रह गए हैं। नेताओं के पिछलग्गू बन गए हैं।

अगर आप अमीष वाले वीडियो को गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी बार बार कह रहे हैं कि आप हिंदू और मुस्लिम को लड़वाने औऱ भड़काने वाली ही कार्य़क्रम क्यों बनाते हो। लोगों को बोलने नहीं देते, अपनी थोपते हो।

कांग्रेस प्रवक्ता से अमीष बार बार बोल रहे थे कि आप माफी मांगे। पर प्रवक्ता ने जरा भी ढील नहीं की और बोले मुझे माफी की जरूरत ही नहीं क्योंकि अमीष को वो बड़ा दोषी मान रहे थे। चूंकि भारत में हिंदू और मुस्लिम एक रोचक विषय माना जाता है और अभी कुछ दिन पहले ही हिंदू औऱ मुस्लिम मामले की डिबेट पर ही जी हिंदुस्तान में ऑन शो मेहमान आपस में मारपीट करने लगे और एक को मौके से ही पुलिस ने गिरफ्तार भी किया।

मतलब ये मुद्दा चैनलों को सुहाता तो है औऱ खासतौर पर कथित राष्ट्रवादी प्रकार के चैनलों और पत्रकारों को। मुस्लिम मामलों की जानकार शीबा असलम फहमी कहती हैं कि एक बकवास सा मुद्दा जो हिंदू और मुस्लिम से जुड़ा हो उसे चैनल वाले उठाते हैं और चार पांच मुल्लाओं को खोजने में लग जाते हैं जो गला फांड़कर चीख सकते हों।

रवीश कुमार से लेकर तमाम बडे़ छोटे पत्रकार बिल्कुल खुलकर कहते हैं कि वो टीवी पर न्यूज चैनल वर्षों से देखना बंद कर चुके हैं। न्यूज चैनल लोगों को बीमार कर सकता है, मेरे अपने भी यही अनुभव हैं। न्यूज चैनलों के घटिया कार्य़क्रमों की बदौलत दर्शकों के मोहभंग की बात क्या प्रोड्यूसरों के कान तक नहीं पहुंचती, क्या गला फाड़कर फाड़कर टीवी की स्क्रीन तोड़कर बाहर कूदने को तैयार की मुद्रा वाले एंकर प्रोड्यूसरों और मालिकों को नहीं दिखते, चैनलों की किरिकरी और आएदिन मारपीट औऱ गालीगलौज की बातचीत से क्या चैनल के प्रोड्यूसर और प्रबंधन अंजान है।

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। प्रोड्यूसर और प्रबंधन सब जानता है। उसके बावजूद सबकुछ चल रहा है। श्रीदेवी की मौत की जिस तरह से भारतीय टीवी चैनलों ने कवरेज दी शर्मनाक था। पर आजतक के प्रोड्यूसर सुप्रिय प्रसाद बोले कि जनता यही देखना चाहती है। अब शायद जनता चैनलों में लाइव शो में लात घूंसे देखना चाहती है और भविष्य में जनता न्यूड या सेमी न्यूड एंकरों को देखना चाहेगी तो सुप्रिय प्रसाद वो भी दिखाएंगे शायद।

अमीष मामले पर मैं लगातार नजर रख रहा था, और मैंने देखा सोशल मीडिया में जहां जहां अमीष देवगन को भड़वा व दलाल वाली पोस्ट की गई है, लगभग आधे से ज्यादा लोग यही लिख रहे हैं कि ये इसी लायक है। हालांकि महज संयोग है कि इस घटना से 2 दिन पहले ही मैं किसाी मीडिया दफ्तर में एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ था तभी सामने टीवी पर अमीष एंकरिंग कर रहे थे तो वरिष्ठ पत्रकार महोदय जोर जोर से हंसने लगे और बोले क्या जमाना आ गया है देखो इसे लगता बस टीवी फोड़कर निकलने वाला है। अमीष को लोग अर्नब गोस्वामी का नकली क्लोन कहकर बुलाते हैं और काफी चुटकी लेते हैं। मुझे नहीं पता कि अमीष इतना चीखते क्यों हैं और अपनी ऊर्जा का ह्वास क्यों करते हैं। पर एक दर्शक के रूप में मुझे भी अमीष को देखकर हंसी और उसके बाद दुख होता है….

  • एडीटर अटैक मीडिया मिरर सम्पादक का नियमित स्तंभ है
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