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पूरे 4 साल बाद सरकारी विमान में चढ़ने को मिला पत्रकारों को

जगदीश उपासने
विश्व हिंदी सम्मेलन के मंच पर बाएं से शशि शेखर, बीके कुठियाला, जगदीश उपासने
  • विश्व हिंदी सम्मेलन में पत्रकारों को अपने विमान में ले गई हैं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली।

2014 में मोदी राज आया तो पत्रकारों की सरकारी विमान में यात्राओं पर सबसे पहले पाबंदी लगी। बकायदा सख्ती से आदेश दिए गए पीएमओ से कि कोई भी मंत्री या अधिकारी पत्रकारों को साथ न ले जाएं। वैसा ही हुआ। मोदी जी विदेश जाने में माहिर तो हैं ही। क्या जुकरबर्ग क्या बराक और ट्रम्प और इंग्लैंड की राजमाता, सबसे मिल लिए। पर पत्रकार पीछ पीछे गए। साथ किसी को नहीं ले गए। उनके विमान में बस एएनआई, दूरदर्शन और रेडियो के ही प्रतिनिधि जाते रहे।

राष्ट्रपति कोविंद बने तो यहां भी कान फूंक दिए गए कि पत्रकार नहीं।

और हमारे वरिष्ठ पत्रकार साथी तो फ्री विदेशी हवाई यात्राओं के दीवाने थे। झटका लगा। पर हुआ कुछ नहीं।

पूरे चार साल बाद सरकार के अंतिम चरण में सूचना िमली है कि मारीशस में हो रहे विश्व हिंदी सम्मेलन में विदेश मंत्रालय द्वारा जिन पत्रकारों को आमंत्रित किया गया था वो विदेश मंत्री के विशेष विमान में साथ ही गए हैं। हालांकि इससे पहले इसी सम्मेलन के टिकट जरूर मुहैय्या कराए जाते थे लेकिन इस बार सरकारी विमान और विदेश मंत्री का साथ। कुछ लोग कह रहे हैं ये सुषमा स्वराज का बढ़ता हुआ कद है जो मोदी के खिलाफ जाकर उन्होंने पत्रकारों को अपने साथ ले जाने का फैसला किया।

 

ये गए हैं साथ

हिंदुस्तान समूह से शशि शेखर, माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति और आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य के पूर्व सम्पादक जगदीश उपासने, इंद्रा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सचिव सच्चिदानंद जोशी, हरियाणा उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष व माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बीके कुठियाला। इसके अलावा भी अन्य लोग हैं जिन्हें विमान का टिकट दिया गया। जिन्हें सुषमा साथ नहीं ले गईं और उन्हें सरकार ने टिकेट दिया है उन्हें दोयम दर्जे का राष्ट्रवादी पत्रकार कहा जा सकता है। हालांकि संघ प्रेमी पत्रकारों को ही साथ ले जाया गया है। इसके अलावा कुछ ऐसे भी पत्रकार हैं जिन्हें विदेश मंत्रालय ने आमंत्रण तो दिया पर टिकेट नहीं दिया। ऐसे पत्रकारों ने नाराजगी भी जताई है। इन्हें तीसरे दर्जे का राष्ट्रवादी पत्रकार कहा जा सकता है।

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