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खरे, शुद्ध, सुंदर प्यार की कहानी है i love you

कुलदीप राघव
लेखक-पत्रकार कुलदीप राघव अपनी किताब के साथ

टाइम्स नाउ हिंदी वेबसाईट दिल्ली के पत्रकार कुलदीप राघव की नई किताब ने बाजार में दस्तक दी है। नाम रखा है आई लव यू। फौरी तौर पर किताब का मुखपृष्ठ और नाम देखकर यही लगता है कि किताब प्रेम, रोमांस और युवाओं को केंद्र में रखकर लिखी गई है। निश्चित ही किताब का नाम आई लव यू है तो किताब की पृष्ठभूमि में प्रेम ही होगा, लेकिन कुलदीप गंभीर लेखन के लिए भी जाने जाते हैं। इससे पहले उन्होंने नरेंद्र मोदी पर एक दिलचस्प किताब लिखी थी। उनकी नई किताब में प्रेम है तो जीवन का तानाबाना भी है। प्रेमी औऱ प्रेमिका के बीच अंतर्द्वंद भी है तो माता पिता का बच्चों के लेकर भाव औऱ समर्पण भी दिखाई पड़ता है। 

 

किताब की समीक्षाः

‘आई लव यू’ शीर्षक उतना ही सुंदर है जितने कि ये तीन शब्द। खरे, शुद्ध, सुंदर प्यार की कहानी बताता है यह शीर्षक।
हालांकि इस तरह की सुंदर हिंदी कहानी के लिए हिंदी शीर्षक भी बेहतर हो सकता है। कहानी का उद्देश्य प्यार की गहराई तथा ताकत दिखाना है। सच्चे प्यार के रास्ते में उम्र बाधा नहीं हो सकती है। इस बात को बहुत खूबसूरती से कहानी में दर्शाया गया है। आधुनिक युग पृष्ठभूमि में है और कहानी पूरी तरह से उपयुक्त है। यह एक अनोखी कहानी है, जहां ईशान (पुरुष नायक) ने अपने जीवन में अपना प्यार पाने के लिए हर संभव प्रयास किया। लेखक ने जिस तरीके से कहानी शुरू की है, यह मुझे काफी अच्छा लगा। और यह हमेशा मेरी पसंदीदा शैली है कि एक कहानी को दूसरी कहानी में पढ़ा जाए, इसलिए मुझे अंततः अवधारणा पसंद आई। दिल्ली और ऋषिकेश पृष्ठभूमि में हैं। चंडीगढ़ में भी कुछ दृश्य  थे।

इस पुस्तक की सभी रोमांस शैली प्रेमी को सिफारिश करना चाहूंगा।ईशान एक बहुत समझदार व्यक्ति है, जो सभी को खुश देखना चाहता है। वह अपने लोगों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझता है। वह एक ईमानदार आदमी है। स्नेहा एक तटस्थ लड़की है, जिसकी ईशान को अपने अतीत के बारे में बताने की ताकत है। कभी-कभी वह कमजोर पड़ जाती है, जब बात ईशान से दूर जाने की हो। और मुझे लगता है कि प्यार एक व्यक्ति को मजबूत और कमजोर दोनों ही बनाता है। अनन्या कम समय में एक बहुत अच्छी दोस्त साबित हुई। अनन्या के बारे में पाठक के मन में यह विचार आते हैं कि कहीं न कहीं वह भी ईशान को पसंद करने लगी है। अन्य सभी पात्रों ने भी अपनी भूमिका निभाई। चरित्र चित्रण सजीव लगता है। ईशान के माता-पिता के विचार पारंपरिक/रूढ़िवादी हैं, लेकिन बाद में वे अपने बच्चे की खुशी के लिए कुछ भी कर सकते थे। लेखक ने ईशान और स्नेहा के बीच प्रेम दृश्यों को इतनी खूबसूरती से और सहजता के साथ वर्णित किया है कि यह वास्तविक जान पड़ता है।
पाठक को आकर्षित करने के लिए भाषा और वर्णन पर्याप्त था। यह ईशान था जो अपनी कहानी कह रहा था। संवाद हिंदीऔर अंग्रेजी के मिश्रण में थे। हालांकि मुझे लगता है कि हिंदी कहानी में इतने सारे अंग्रेजी शब्दों का उपयोग करना नकारात्मक बात है, लेकिन दूसरी तरफ मुझे लगता है कि हिंदी लेखक इस बारे में असहाय हैं। किंतु इस ओर प्रयास किया जा सकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ हिंदी की शुद्धता से परिचित हो पाए। एक बिंदु था, जिसपर मुझे लगता है कि काम किया जा सकता है। चंडीगढ़ में, ईशान और स्नेहा एक दूसरे के प्रेम में इतनी आसानी से पड़ गए कि वहाँ कहानी थोड़ी निरस जान पड़ी। वहाँ कुछ दिलचस्प दृश्य होना चाहिए जो उन्हें एक-दूसरे के लिए प्यार में पड़ने दें। कहानी में अधिक गंभीर मोड़ न होते हुए भी कहानी अंत तक दिलचस्प बनी रही। कहानी का अंत ईशान के लिए एक आश्चर्य के साथ ही खुबसूरत था, जो कि हर कहानी की आवश्यकता है। यह एक आदर्श प्रेम कहानी थी। लेखक पाठकों तक अपनी बात पहुँचाने में पूर्णतः सक्षम है।

आरती मानेकर, समीक्षक

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