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हमारा शैतान पाकिस्तानी अरशद से कम है क्या, होगा फोटोशूट

शैतान सिंह
राजस्थान के करौली जिले के लैंदोरकलां गांव का नीली आंखों वाला शैतान सिंह

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली। 

पाकिस्तान
पाकिस्तान के अरशद
शैतान
शैतान सिंह की आंखें देखिए, हैं न दुर्लभ

पाकिस्तान में एक चायवाला रातो रात विश्वभर में प्रसिद्ध हो गया, कारण वो नीली आंखों वाला था। मीडिया ने उसे हीरो बना दिया। अब वो चाय नहीं बेचता बल्कि मॉडल है। अब भारत में भी नीली आंखों वाला एक बच्चा मिला है। और हां ये किसी भी तरह पाकिस्तानी अरशद से कम नहीं है। अरशद से कहीं ज्यादा राजस्थान के करौली जिले के लैंदोरकला गांव में रहने वाले 13 वर्षीय बच्चे शैतान सिंह की आंखें नीली हैं औऱ ये खूबसूरत भी है।

भारतीय मीडिया को चाहिए कि अपने शैतान को भी ज्यादा से ज्यादा कवरेज दें औऱ उसे लोकप्रिय बनाएं। शैतान जन्म से बोल व सुन नहीं सकता। बाप नशेड़ी है। माली हालत खराब है। शैतान स्कूल न जाकर गांव में ही गाय भैंस चराता है। अगर वो लोकप्रिय हो जाए तो शायद उसका बेहतर इलाज हो सके और वो सामान्य बच्चों से जीवन जी सके और पढ़ सके। मिरर का यही प्रयास है।

मिरर से अपने स्तर पर बीबीसी समेत तमाम तमाम देशी-विदेशी मीडिया को बच्चे के बारे में जानकारी दी। फिलहाल दैनिक भास्कर के वरिष्ठ छायाकार ताराचंद ने मिरर से कहा है कि उन्हें अपने फोटोशूट के लिए ऐसे ही नीली आंखों वाले लड़के की तलाश थी। वो जरूर इस बच्चे का फोटोशूट करेंगे। बतादें कि ताराचंद अवार्ड विनिंग फोटोग्राफर हैं। देश के बेहतरीन छायाकारों में उनकी गिनती होती है।

 

 

नीली आंखों वाले लड़के की कहानी 

ये राजस्थान के करौली जिले के लेदोरकलां गांव के 13 वर्षीय शैतान सिंह हैं। शैतान दरअसल शैतान नहीं बहुत प्यारे, नीली आँखों वाले और बहुत हैंडसम हैं। शैतान जन्म से ही बोल व सुन नहीं सकते। इनके पिता दारू की लत से ग्रस्त हैं, इन्हें कोई देखने व सम्हालने वाला भी नहीं। शैतान स्कूल नहीं जाते। अब गांव में ही भैंस व गाय चराते हैं।

हाँ फ़ोटो उतरवाने का इन्हें शौक है। मैले कुचैले कपड़े (जो शायद कई महीनों से न धुले हों) पहने, धूल से सने पैर, प्लास्टिक की टूटी चप्पले पहने शैतान दिनभर गांव में घूमते मिल जायेंगे।
हाँ शैतान इशारों से सब बातें करते व समझते हैं। मैंने जब बताया तुम्हारी तस्वीर हम अख़बार व टीवी में दिखाएंगे तो वो समझ गया और ख़ुशी ख़ुशी कई पोज दिए। शैतान के पेंट में एक पर्स ज़रूर मिलेगा, जो एकदम फट चुका है, शायद कहीं पड़ा मिला होगा उसे। जब उस पर्स को आप देखेंगे तो उसमे पैसे तो नहीं पर शैतान की एक पासपोर्ट साइज़ रंगीन फ़ोटो ज़रूर मिलेगी। जिसे वो हर उस व्यक्ति को दिखाता है जो उससे प्यार से बातें करता है।
मैं अभी राजस्थान की यात्रा पर था। शैतान को देखते ही पाकिस्तान का चायवाला याद आ गया। मैंने यही सोचा की जब पाकिस्तानी अरशद की जिंदगी सिर्फ इसलिये बदल सकती है की वो नीली आँखों वाला आदमी है और चाय बेचता है। तो फिर हमारे शैतान की जिंदगी में रंग क्यों नहीं आ सकते। वो तो अरशद से ज्यादा हैंडसम है। अरशद से ज्यादा खूबसूरत और अरशद से ज्यादा नीली ऑंखें हैं इसकी। और भगवान ने हमारे शैतान को सुनने और बोलने की क्षमता भी नहीं दी।
मैंने कुछ गांव वालों से बात की शैतान के बारे में तो उन्होंने बताया की शैतान का बाप नशेड़ी है। बच्चे का कोई ख़्याल नहीं उसे। स्कुल कुछ समय गया था शैतान पर भाग आया, अब न वो जाता और न उसे कोई भेजने वाला। गांव वालों ने बताया की शैतान दिमाग का तेज है और तन का सुन्दर।

मैं लगातार उसे देखने के बाद यही सोच रहा हूँ की दिनभर धूल धूप में रहकर गाय भैंस चराने वाला नीली आँखों वाला ये शैतान अगर किसी शहरी जीवन का हिस्सा बन जाये तो काश पाकिस्तानी अरशद की तरह इसकी जिंदगी भी सुन्दर और भव्य हो जाये। और हाँ अगर इसे बेहतर इलाज़ मिले तो शायद इसके बोलने और सुनने की क्षमता सुधर सके।

आप चाहें तो शैतान की तस्वीर को साझा करें, शायद हमारा शैतान लोगों को पसन्द आ जाये और ये दीपावली उसके जीवन को रौशन कर जाये।
हाँ मिरर के जरिये मैं बीबीसी समेत तमाम मीडिया संस्थानों से अपील करता हूँ कि शैतान पर स्टोरी करें, उसपर खबर बनाएं। पाकिस्तानी अरशद की तरह उसे भी लोकप्रिय बनाएं। शैतान से अगर कोई पत्रकार मिलना चाहे, मुझसे सम्पर्क कर सकता है, मीडिया मिरर को mediamirror.in@gmail.com पर मेल कर सकता है।

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