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ज्योतिर-आदित्य को सुनने नहीं उनके गुलाबी होठ देखने आती है जनता

सिंधिया
सिंधिया ज्योतिर आदित्य

-प्रशांत राजावत-सम्पादक मीडिया मिरर 

 

चूंकि मैं भिण्ड का रहने वाला हूं। ग्वालियर में पढ़ा हूं और पत्रकारिता की है। ऐसे में जब ज्योतिर-आदित्य सिंधिया पूरे देश में चर्चा के केंद्र में हैं तो हम काहे पीछे रह जाएं। हालांकि सिंधिया परिवार से अपना कनेक्शन तब का है जब ज्योतिरादित्य और उनके पूज्य पिताजी भी पैदा नहीं हुए थे। जी हां हमारे दादा जी जीवाजी राव सिंधिया की फौज में थे। उनसे तो हमने कई कहानियां सुनी हैं सिंधिया के बारे में। पर तब के सिंधिया और अब के सिंधिया में जमीन आसमान का फर्क है।

दादा जी सिंधिया फौज से जुड़े अस्त्र-शस्त्र, परिधान, फौजी ड्रेस, गुप्ती, कटार आदि दिखाया करते थे और बताते थे कि सिंधिया शानो शौकत वाले राजा रहे। हालांकि उन्होंने माधवराव और ज्योतिरादित्य में कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और न ही मिलने का औऱ किसी भी तरह का लाभ लेने का प्रयास किया। वो अपने जीवन में कभी महल नहीं गए।

खैर हम पत्रकारिता करने ग्वालियर पहुंचे तब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से सांसद बन चुके थे। ज्योतिरादित्य की तमाम तस्वीरें पत्रिकाओंआदि में देख चुके थे और सच मानिए मैं स्वयं इस प्रयास में था कि कैसे सिंधिया का चेहरा देखा जाए। ग्वालियर की फ़िजा में आज भी सिंधिया परिवार की राजनीतिक सफलता से ज्यादा उनके रूप रंग के चर्चे हैं। चाहे वो राजमाता हों, माधव राव हों, ज्योतिरादित्य व उनकी पत्नी हों। मेरी दादी बताती हैं कि राजमाता जब हमारे गांव आई थीं, तो लोग महज उनके रूप रंग को देखकर ही मोहित हो गए थे। उनके चेहरे में गजब का तेज था। दादी बताती हैं राजमाता बहुत सुंदर थीं। जब शादी होकर पहली बार ग्वालियर राजघराने पहुंची थीं तो बड़े मान मनुहार के बाद ग्वालियर की जनता ने उनका दीदार किया था और अपनी रानी को देखा था।

सिंधिया परिवार आज भी राजसी वैभव में जीता है और ग्वालियर की जनता उन्हें उसी रूप में आदर स्नेह देती है। मैंने किसी पत्रकार के जबान से सुना था कि जब कांग्रेस नेताओं को मीडिया खरीद के लानी पड़ रही थी प्रचार के लिए उस समय भी माधवराव सिंधिया को कवर करने के लिए विदेशी मीडिया का जमावड़ा लगा रहता है। खासतौर पर विदेशी महिला पत्रकार। अब जब ज्योतिरादित्य अपने पूरे प्रभाव पर हैं बावजूद पुराने समय के पत्रकार और ग्वालियर के लोग बताते हैं कि माधवराव सिंधिया के आगे ज्योतिरादित्य कुछ नहीं हैं। चाहे वो सुंदरता हो, प्रभाव हो, भाषण शैली और लोकप्रियता हो। एक छोटा सा संस्मरण है कि माधवराव सिंधिया एक बिजनेस सम्मिट में ग्वालियर में बोल रहे थे, सम्मिट में धीरूभाई अंबानी, कपिल देव सरीखे लोग भी थे। कपिल देव ने कहा कि महाराज आएं और संबोधित करें। कपिलदेव माधवराव को महाराज ही बुलाते थे। माधवराव आए और बोलने लगे, बोले कि आज ग्वालियर के गौरव का दिन है देश के धनाड्य व्यक्तियों में से एक धीरूभाई हमारे मंच पर हैं। मैं उनसे गुजारिश करूंगा कि वो ग्वालियर में औद्योगिक इकाइय़ां लगाकर विकास की गंगा बहाएं। इसके साथ ही सिंधिया ने अंबानी को बोलने के लिए आमंत्रित किया।

अम्बानी आए और सबसे पहले प्रणाम किया और क्या बोले पता है… अम्बानी बोले और तो सब ठीक है कि मैं यहां आय़ा हूं और औद्योगिक इकाइयां भी लगाऊंगा पर ये जो राजा साहब ने देश के सबसे धनाड्य व्यक्ति का तमगा दिया उस पर मैं इतना बतादूं कि मेरे पास कितना धन है ये तो रिकार्ड औऱ सूचीबद्ध है पर सिंधिया साब के पास कितना धन है उसका कोई हिसाब ही नहीं है। और इतना कहकह वो नतमस्तक हो गए।

सिंधिया परिवार के नजरे जिस पर इनायत हो गईं मानो वो कब फर्श से अर्श पर पहुंच गया पता न चला। जिनमें से एक अटल बिहारी वाजपेयी भी थे। जानने वाले जानते हैं कि सिंधिया के यहां के नौकर चाकर भी आज करोड़ों के मालिक हैं और सांसद विधायक भी बने।

संदर्भ में ज्योतिरादित्य हैं तो चर्चा उन्ही की करते हैं। पहली बार मैंने एक आयोजन में ज्योतिरादित्य को देखा। बहुत आकर्षक व्यक्तित्व। कद छोटा है पर पद पड़ा। ग्वालियर में ज्यादातर लोग उन्हें श्रीमंत राजा साब या महाराज कह कर रही संबोधित करते हैं। चाहे वो पत्रकार हों, प्रशासनिक अधिकारी ये नेता और कार्य़कत्ता हों। सिंधिया आज भी दशहरे के दिन पूजा करने के लिए अपनी पारम्परिक राजशी पोशाक में जाते हैं। वहां जो जमावड़ा होता है उसमें ज्यादातर लोग सिंधिया जी की खूबसूरती देखने जाते हैं। ग्वालियर का कॉलेजों में आज भी लड़कियां कहते पाई जाती हैं कि ज्योतिरादित्य जैसा लड़का मिल जाए। हालांकि ज्योतिरादित्य की पत्नी भी देश की 50 खूबसूरत महिलाओं की सूची में शामिल हैं। अभी मुझे बुंदेलखण्ड के एक पत्रकार से मिलने का मौका मिला। उनसे ऐसे ही पूछा कि सिंधिया जी का क्या प्रभाव है तो वो बोले प्रभाव क्या वो तो जहां खड़े हो जाएं वहीं जनता रुक जाती है। आज भी चम्बल और बुंदेलखण्ड के लोग किसी राजनेता से मिलने नहीं बल्कि अपने राजा को देखने आते हैं। ये जनता जब लौटती है तो अक्सर ऐसी चर्चा सुनी जा सकती है कि उनके होंठ कितने गुलाबी रखे थे। और रूप देखो मानो उनसे सुंदर कोई क्या होगा।

झांसी रानी से धोखे के लिए बदनाम सिंधिया परिवार अपने क्षेत्र में शायद सदियों तक सिर्फ अपने रूप रंग के दम पर ही लोकप्रिय बना रहेगा। हालांकि सिंधिया बहुत विनम्र हैं और उनके दरवाजे ग्वालियर की जनता के लिए सदैव खुले हैं। बावजूद जब तब ये खबरें आती रहती हैं कि उनपर राजसी मद का असर है।

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