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लोकसभा टीवी सम्पादक को प्रिय हैं आंख मारते ” राहुल गांधी”

राहुल गांधी
लोकसभा टीवी के सौजन्य से जारी राहुल गांधी की मनमोहक छवि
  • एडीटर अटैक-
राष्ट्रीय चैनलों
चटखारे ले लेकर राष्ट्रीय मुद्दे पर राष्ट्रीय चैनलों पर स्पेशल बुलेटिन

वैसे तो राहुल गांधी चर्चा में रहते ही हैं पर कल से फिर एक बार किसी खास वजह से चर्चा में हैं। वो वजह है उनका आंख मारना। आंख तो लोग मारते रहते हैं। हाहाहा। पर राहुल गांधी मारते हैं तो एकदम धांसू टाइप। पूरे देश का मीडिया उनके इस अदा का दीवाना है। आज के ही अखबारों की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी के तमाम बड़े अखबारों में पहले पन्ने पर राहुल गांधी की आंख मारती फोटो सुपर कैप्शन के साथ उपलब्ध है।

वहीं देश के लोकप्रिय न्यूज चैनलों में राहुल गांधी के आंख मारने की खबरों पर पूरे एपीसोड चल रहे हैं। इससे एक बात तो तय है कि देश की तमाम जटिल समस्याओं और मुद्दों से इतर भारतीय मीडिया को राहुल का आंख मारना ज्यादा गंभीर विषय लगता है। इन सबके बीच आज थोड़ा चर्चा करते हैं राहुल के आंख मारने वाली तस्वीरों को उजागर करने का अधिकार रखने वाले लोकसभा टीवी चैनल की।

दरअसल लोकसभा टीवी चैनल भारतीय निम्न सदन लोकसभा के अधीन है और इसका मुखिया लोकसभा का अध्यक्ष होता है। लोकसभा टीवी चैनल का दफ्तर भी लोकसभा परिसर में ही है। लोकसभा में चल रही कार्रवाही दिखाने का अधिकार लोकसभा टीवी को ही है। लोकसभा के अंदर की जो भी तस्वीरें जनता के सामने आती हैं तो उसका माध्यम लोकसभा टीवी ही होता है। भूतपूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने लोकसभा की कार्रवाही का जीवंत प्रसारण करने के उद्देश्य से लोकसभा टीवी की स्थापना की थी और तबसे ये लगातार कार्रवाही को लाइव दिखाता है।

राहुल गांधी के आंख मारते मनमोहक छायाचित्र जो सारी दुनिया देख पा रही है। इसके लिए लोकसभा टीवी का हमें आभार जताना चाहिए। अगर लोकसभा टीवी न चाहे तो ऐसी मनमोहक तस्वीरें देखने से देश वंचित रह जाए। संसद के अंदर कार्रवाही की कोई भी तस्वीर अगर किसी अखबार या निजी चैनल में जारी होती है। उसका स्रोत लोकसभा टीवी होता है। आमतौर पर आप लिखा भी पाएंगे, सौजन्य लोकसभा टीवी।

राहुल गांधी इतने सलीके से आंख मारते हैं, देश जान ही नहीं पाता अगर लोकसभा टीवी न होता। पूरे मामले में एक बात तो तय है कि लोकसभा टीवी के प्रधान सम्पादक को आंख मारते राहुल गांधी भाते बहुत हैं। तभी तो सेकंडों की क्रिया आंख मारने को उनका वीडियोग्राफर झट से जूम करके कैद कर लेता है। ऐसा लगता है मानो उन्होंने स्पेशल ऑर्डर जारी कर रखे हों कि राहुल बाबा की खुपड़िया में एक वीडियो कैमरा फिट रखो, क्या पता कब आंख मार दें। गंभीर मसला है। देश जानना चाहता है कि राहुल बाबा ने इस बार आंख कैसे मारी और अगली बार कैसे मारेंगे औऱ किसे। तो ऐसे में कार्रवाही दिखाने वाले एकमात्र चैनल की जवाबदेही तो बनती है न कि वो बाबा की आंख मारने वाली मनोमोहक छवि को मिस न करें।

अभी कोई बता रहा था कि लोकसभा में तो कैमरे फिक्स हैं औऱ वो घूमते रहते हैं। किसी रणनीति के तहत राहुल गांधी को ही कैद नहीं किया जाता और फिर लोकसभा टीवी थोड़ी न कहता कि राहुल गांधी की ऐसी तस्वीरें उनके वीडियो से क्रॉप करके दिखाओ। लोकसभा टीवी तो लाइव कवरेज देता है। जो भी सांसद जैसी भावभंगिमा बनाता है अपने आप कैद होता है।

ठीक है भैय्या हम सब बात मान गए। लेकिन एक बात तुम भी मान लो भाई कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार होती तो राहुल गांधी की ऐसी फुटेज लोकसभा टीवी में दिखाई जातीं क्या। न..न.न..। चैनल के प्रधान बाबू को सीधे बाहर की टिकट मिल जाती। लोकसभा टीवी चैनल का प्रबंधन लाख सफाई दे कि राहुल गांधी की ऐसी तस्वीरें किसी रणनीति के तहत नहीं ली जा रहीं। लेकिन हम मानने को राजी नहीं। हम सीधी सी बात जानते हैं आपके सारी तकनीक, व्यवस्थाओं का हवाला एक तरफ। राहुल गांधी 2019 में प्रधानमंत्री बनें और लोकसभा में कार्रवाही के दौरान एक बार नहीं दिनभर आंख ही मारते रहें। तब भी एक सेकंड का फुटेज लोकसभा चैनल दिखाले तो दी चुनौती। तब कोई एक्स्यूज नहीं चलेंगे, न ये चलेगा कि लाइव कवरेज के दौरान तो वो सब कवर होगा जो संसद में होता है या कैमरे तो सेट हैं तकनीकी व्यवस्था के अनुरूप। हमारा दोष नहीं।

पूरे और पूरे मामले में सच ये है कि एक प्रायोजित तरीके से ही ऐसी फुटेज ली जा रही हैं। अगर लोकसभा टीवी चैनल का प्रबंधन चाहे तो राहुल गांधी की ये मननोहक तस्वीरें वाकई जारी न हों। लेकिन चूंकि लोकसभा टीवी के सम्पादकीय विभाग को लगता है कि ऐसी तस्वीरों के दर्शनलाभ से देश वंचित न रहे। इसलिए आंख मारे कि लड़का आंख मारे वाले एपीसोड धड़ल्ले से राष्ट्रीय चैनलों में चल रहे हैं और लोकसभा के मुख्य मुद्दे इसी बहाने दब रहे हैं।

शुक्रिया लोकसभा टीवी इन मनमोहक छायाचित्रों को प्रमुखता से प्रस्तुत करने के लिए

  • प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर  

(एडीटर अटैक मीडिया मिरर सम्पादक का नियमित स्तम्भ है। )

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