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राम रहीम मामलाः जज ने कहा-सच की रिपोर्टिंग बेहद मुश्किल

छत्रपति रामचंद्रन
रामचंद्र छत्रपति

जज ने कहा-सच की रिपोर्टिंग बेहद मुश्किल, कोर्ट लाइव CBI बोली- आस्था से खिलवाड़ करने वाले को मृत्युदंड दें

पत्रकार रामचंद्र छत्र‍पति की हत्या के 16 साल बाद सीबीआई कोर्ट ने गुरुवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम सहित 4 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। बाकी दोषियों में डेरे का पूर्व मैनेजर कृष्ण लाल और दो अनुयायी निर्मल व कुलदीप शामिल हैं। छत्रपति ने साध्वियों के साथ दुष्कर्म की खबरें छापकर राम रहीम की असलियत का खुलासा किया था। इससे नाराज राम रहीम ने उनकी हत्या करवा दी थी। कोर्ट ने राम रहीम सहित चारों आरोपियों को 11 जनवरी को दोषी करार दिया था। यह मामला 4 जनवरी 2014 को ट्रायल कोर्ट पहुंचा था। 5 साल में कुल 141 सुनवाई हुईं। राम रहीम पर 50 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया गया है। वह साध्वी दुष्कर्म केस में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल की सजा भुगत रहा है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि दुष्कर्म की सजा पूरी होने के बाद उसकी उम्रकैद की सजा शुरू होगी। सजा सुनाने के दौरान राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल और बाकी तीनों अम्बाला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए थे। चारों दोषियों को सजा के फैसले की कॉपी जेलर को ईमेल के जरिये भेजी गई है।

जज जगदीप सिंह
जज जगदीप सिंह

जज ने कहा-सच की रिपोर्टिंग बेहद मुश्किल: डेमोक्रेसी के पिलर को इस तरह ध्वस्त करने की इजाजत नहीं दी जा सकती

”जर्नलिज्म एक सीरियस बिजनेस है, जो सच्चाई को रिपोर्ट करने की इच्छा को सुलगाता है। इस नौकरी में थोड़ी बहुत चकाचौंध तो है लेकिन कोई बड़ा इनाम पाने की गुंजाइश नहीं है। पारंपरिक अंदाज में इसे समाज के प्रति सेवा का सच्चा भाव भी कहा जा सकता है। किसी भी ईमानदार और समर्पित पत्रकार के लिए सच को रिपोर्ट करना बेहद मुश्किल काम है। खास तौर पर किसी ऐसे असरदार व्यक्ति के खिलाफ लिखना और भी कठिन काम हो जाता है जब उसे किसी राजनीतिक पार्टी से ऊपर उठकर राजनीतिक संरक्षण हासिल हो। यह देखने में भी आया है कि पत्रकार को ऑफर किया जाता है कि वह प्रभाव में आकर काम करे अन्यथा अपने लिए परेशानी या सजा चुन ले। जो प्रभाव में नहीं आते उन्हें इसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं, जो कभी कभी जान से भी हाथ धोकर चुकाने पड़ते हैं। यदि वह (पत्रकार) प्रभाव में आ जाता है तो अपनी विश्वसनीयता खो देता है । अगर प्रभाव में आने से इनकार करता है तो जान से जाता है। इस तरह यह अच्छाई और बुराई के बीच की लड़ाई है। मौजूदा मामले में भी यही हुआ कि एक ईमानदार पत्रकार ने प्रभावशाली डेरा मुखी और उसकी गतिविधियों के बारे में लिखा और जान दे दी। डेमोक्रेसी में भीड़ का रूप धारण कर किसी भी निर्दोष के खिलाफ हिंसा की अनुमति नहीं है। डेमोक्रेसी के पिलर को इस तरह मिटाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।” (जैसा जज जगदीप सिंह ने 13 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कहा)
फैसले के बाद छत्रपति के बेटे अंशुल का बड़ा खुलासा: हरियाणा के पूर्व सीएम व पंजाब के मौजूदा कैबिनेट मंत्री करवाना चाहते थे समझाैता
”मेरे पिता को आज न्याय मिला है। परिवार के लिए दिवाली का दिन है। 16 साल की लड़ाई में बहुत परेशानियां आईं। मेरे साथ रहे एक पूर्व सरपंच शिवराम के जरिए हरियाणा के पूर्व सीएम ने कहलवाया था कि समझौता कर लो। डेरा प्रमुख का इन केसों से कुछ नहीं होगा। हमने मना किया तो सरपंच को हमारा साथ न देने के लिए धमकियां दी गई। साथ खड़े अन्य लोगों को भी कॉल कर धमकाया जाता कि वे हमसे आकर समझौते की बात मनवा लें। एक बार तो मुझे बीच रास्ते राेककर धमकाया गया। लोगों को मेरे पीछे लगाया गया। मेरी मां को कुछ रसूखदार लोग और हरियाणा की एक स्टेट पार्टी के नेता ने आकर कहा- जो चला गया उसे छोड़ो। बस अपने दोनों बेटों का ध्यान रखाे। दुश्मनी बढ़ी, तो नुकसान उनका ही होगा।’ ‘-अंशुल
नेताओं की धमकी के बाद मां कभी डरती, तो कभी हमारा हौसला बढ़ाती। सच तो ये है कि ये मां के मन की ही पुकार थी कि हत्यारे बख्शे न जाएं। इसलिए हम भी पीछे नहीं हटे।

अंशुल, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे

(साभारः दैनिक भास्कर)

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