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एन राम को पत्रकारिता मत सिखाइए अब…

हिंदु समूह के एन राम
हिंदु समूह के सम्पादक एन राम

एडीटर अटैक – प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर 

इस बात को एकदम भूल जाइए कि एन राम यानि नरसिम्हन राम ने क्या छापा और क्यों चर्चा में हैं। सबसे पहले ये बात जान लीजिए कि एन राम उस अंग्रेजी दैनिक अखबार के सम्पादक हैं जो वर्जन नहीं छापता कि एसपी ने कहा है, या डीसी ने कहा है। बस इतना जान लीजिए हिंदू ने कहा बस इतना काफी होता है। हिंदू के रिपोर्टर ने लिख दिया वो लकीर हो गई पत्थर की। उसपर फिर किसी वर्जन की आवश्यक्ता नहीं होती। हिंदू के बारे ये प्रचिलित है।

अब आइए एन राम पर।

एन राम अभी बीजेपी वालों को चुभ सकते हैं क्योंकि आपकी बैंड बजाई है। लेकिन बेफोर्स घोटाले का खुलासा भी इन्ही ने किया था। तब आपने सिर पर बिठाया था। एन राम किसी राजनैतिक पार्टी के सगे नहीं हैं। जो कि पत्रकार का मूलधर्म है। एन राम उस द हिंदू अखबार के सम्पादक हैं जो सरकारों से विज्ञापन मांगने नहीं जाता। उस द हिंदू के सम्पादक हैं जिसकी प्रसार संख्या राष्ट्रीय राजधानी में भी अन्य अखबारों की तुलना में बेहद कम है। एन राम उस द हिंदू के सम्पादक हैं जिसे पढ़कर देश के हजारों हजार लड़के आईएएस बन जाते हैं। द हिंदू एक मात्र भारतीय अखबार है जिसके 13 देशों में ब्यूरोचीफ हैं। अंतिम ब्यूरोचीफ उन्होंने इथोपिया में नियुक्त किया था। एन राम उस द हिंदू के सम्पादक हैं जो सरकार का प्रवक्ता कभी नहीं रहा। एन राम उस द हिंदू के सम्पादक हैं जो प्रारम्भ से आजतक लुटियन दिल्ली के एलीट क्लास का सबसे पसंदीदा अखबार है। जो खबरें भारत के शीर्ष हिंदी अखबारों को खोजने से भी नहीं मिलतीं वो हिंदू के रिपोर्टर के पास चलकर आती हैं। एन राम उस हिंदू अखबार के सम्पादक हैं जहां रक्षा मंत्रालय देखने वाला रक्षा मंत्रालय में ही डिफेंस का फैलो होगा औऱ पश्चिमी एशिया देखने वाला वाशिंगटन डीसी का फैलो। एन राम उस द हिंदू के सम्पादक हैं जिसका प्रत्येक संवाददाता अपनी बीट का एनसायक्लोपीडिया होता है, इस हद तक की देश के नीति निर्माता उन्हें अपनी नीतियां बनाने से पहले बात करते हैं। एन राम उस द हिंदू के सम्पादक हैं जिसके रिपोर्टर राष्ट्पति औऱ प्रधानमंत्री के साथ उनके कहने पर भी उनके विशेष विमान में लटककर नहीं जाते, ठीक अन्य महान पत्रकारों की तरह। एन राम उस द हिंदू के सम्पादक हैं जिसके सम्पादकीय पृष्ठ के पैनल को देखर आपकी आंखें चमक सकती हैं और बुद्धि में अप्रत्याशित विस्तार हो सकता है। हिंदू में लिखना औऱ काम करना हर पत्रकार का सपना होता है, एन राम उस हिंदू के सम्पादक हैं। एन राम उस हिंदू के सम्पादक हैं जो 13 देशों की खबरों के लिए किसी समाचार एजेंसी पर निर्भर नहीं है, ये उस दौर में जब अन्य अखबार दिल्ली पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी अपने संवाददाता नहीं बैठाना चाहते। एन राम उस द हिंदू के सम्पादक हैं जिसकी पाकिस्तान संवाददाता मीना मेनन को मई 2014 में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने खुफिया रिपोर्टों के लीक होने के डर से देश छोड़ने के हुक्म जारी किए थे, वो भी अपने प्रधानमंत्री के सख्त आदेश के बाद। उस द हिंदू के सम्पादक हैं जिसके संवाददाताओं से देश की सरकारें खौफ खाती हैं। उस द हिंदू के सम्पादक हैं जहां एजेंसी की खबरों को भी प्रकाशित करने से पूर्व पूरी तरह फैक्ट फाइंडिंग की जाती है।

एन राम विश्वप्रसिद्ध कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल से पढ़े हैं। एशिया में खोजी पत्रकारिता का शीर्ष पुरस्कार उन्ही के नाम है। उनकी बेटी को पत्रकारिता में विश्व की शीर्ष फैलोशिप पुलित्जर फैलोशिप मिली और न्यूयार्क टाइम्स में इंटर्न रहीं। अब वो स्वयं शानदार पत्रकार हैं यूरोप में। एन राम ने राफेल मामले में जो लिखा उसमें हम आप क्या बोलें या नहीं बोलें कोई फर्क नहीं पड़ता, हमारे आपके द्वारा एन राम की निंदा सूरज को दिया दिखाने जैसी है।  खुद रक्षा मंत्री को सफाई देनी पड़ रही है। ये एन राम की कलम का कमाल है। बावजूद वो झुके नहीं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि मुझे रक्षा मंत्री से पत्रकारिता सीखने की जरूरत नहीं। एन राम ने मुझे कोई रिश्वत नहीं दी लिखने की। लेकिन मैं इतना जानता हूं कि बीजेपी सरकार अगर सही है तो आप एन राम के खिलाफ केस करिए। उनको गलत साबित करिए। उनको कोर्ट में घसीटिए। उनको जेल में डालिए। आप सत्ता में हैं। अगर एन राम ने वाकई गलत और भ्रमित करने वाली रिपोर्ट लिखी है तो रक्षा मंत्री बयानबाजी न करके उनको कोर्ट ले जाएं, मानहानि का मुकद्दमा करें।

बस इतना ही। लेकिन गौरतलब है कि कोर्ट आप तब जाएंगे जब आप सही होंगे। अमित शाह के बेटे जय शाह के अमीरी की खबर द वायर में संवाददाता रोहिणी सिंह ने ब्रेक की थी और दुनिया में शाह की छीछालेदर हो गई। अमित शाह ने रोहिणी और द वायर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा अहमदाबाद कोर्ट में दायर किया। पर पता है क्या हुआ अमित शाह को कोर्ट से फटकार लगी और मुकद्दमा द वायर के पक्ष में गया।

( एडीटर अटैक मिरर सम्पादक का नियमित कालम है) 

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