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वरिष्ठ पत्रकारों से चर्चाः टीवी मीडिया बीस साल में ही दम तोड़ गया

भारतीय टीवी मीडिया
भारतीय टीवी मीडिया अपने उत्कृष्टता के चरम पर

मीडिया मिरर की विशेष प्रस्तुति-

टीवी पत्रकारिता से जुड़े हर उस व्यक्ति के लिए ये शर्म की बात है कि टीवी पत्रकारिता को अब समाज ने लगभग नकार सा दिया है। टीवी चैनल और उसके एंकर दर्शकों के लिए या तो सिरदर्द हैं या हंसी मजाक का कारण। भारत में टीवी खबरों को और उसके प्रस्तोताओं को कोई गंभीरता से नहीं लेता, ये शर्म की बात है। प्रसिद्ध टीवी पत्रकार रवीश कुमार तो हर मंच से वर्षों से कहते आ रहे हैं कि न्यूज चैनल देखना बंद करो लेकिन हाल ही में हुई रक्षा मामलों की रिपोर्टिंग के बाद एक स्वर में तमाम बड़े पत्रकारों ने टीवी पत्रकारिता को लगभग हाशिये पर खड़ा कर दिया। यहां तक सोशल मीडिया में हर दूसरा व्यक्ति ये कहता पाया जा रहा है कि टीवी न्यूज चैनलों को देखने से बचें। चैनलों के स्टूडियों में मारपीट, एक पक्षीय होकर बहसें, स्तरहीन मुद्दों पर चर्चा तो आम बात थी ही लेकिन अब लगता है टीवी मीडिया के दिन लद गए। हालिया संदर्भ को देखें तो भारतीय मीडिया ने कहा कि भारत ने एय़र स्ट्राइक के जरिए 300 के लगभग आतंकियों को मार गिराया। ये संख्या घटती बढ़ती रही। जबकि विश्व प्रसिद्ध न्यूज एजेंसी रायटर्स ने सिरे से भारतीय मीडिया द्वारा दी जा रही ऐसी खबरों का खंडन किया। सवाल ये है कि राष्ट्रीय चैनलों पर ऐसी भ्रामक रिपोर्टिंग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी ही छवि एक झूठे की निर्मित होती है। इसलिए यही वो वक्त है जब भारतीय मीडिया को खासतौर पर टीवी मीडिया को आत्मअवलोकन की दरकार है। 

तस्वीर देखिए जो मिरर दिखा रहा है। सुदर्शन टीवी का क्रिएशन है। भारतीय टीवी मीडिया इतनी उन्नति कर चुका है औऱ हां जो आग उगलते हुए जनाब हैं ये सुदर्शन टीवी के सम्पादक जी हैं औऱ दूसरे हमारे लोकप्रिय फौजी जी।

मीडिया मिरर ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य जयशंकर गुप्त व आईटीवी नेटवर्क के चीफ एडीटर मल्टीमीडिया अजय शुक्ल से विशेष बातचीत की। इसके अलावा तमाम बड़े पत्रकारों के बयान हम यहां दे रहे हैं ताकि आप एक दर्शक के रूप में टीवी चैनलों के बारे में एक पुख्ता राय बना सकें।

 

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त ने मिरर से बातचीत करते हुए कहा कि निश्चित तौर पर रक्षा मामलों को लेकर बेलगाम टीवी रिपोर्टिंग पर नियंत्रण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की परिधि में चैनल नहीं आते। इसके लिए एनबीएसए ( न्यूज ब्राडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथारिटी) जैसी संस्था है। लेकिन वो भी मृतप्राय है। श्री गुप्त ने कहा कि कई बार चैनलों की शिकायतें एनबीएसए के पास गईं लेकिन चूंकि इसके सदस्य चैनलों के मुखिया ही हैं तो उन्होंने खुद को एनबीएसए से अलग कर लिया औऱ ऐसे में वो कार्रवाई से बच गए। कुल मिलाकर सच ये है कि टीवी मीडिया पर नियंत्रण के लिए कोई बॉडी अभी नहीं है। सूचना प्रसारण मंत्रालय को चाहिए कि वो एक ऐसी समिति का गठन करे जो टीवी मीडिया पर निगरानी और नियंत्रण रखे वरना भारतीय टीवी चैनल ऐसे ही बताते रहेंगे कि 300 आतंकी मार गिराए।

आईटीवी नेटवर्क के चीफ एडीटर मल्टीमीडिया अजय शुक्ल ने मिरर से बातचीत करते हुए कहा कि ये बात बिल्कुल सही है कि टीवी मीडिया विध्वंशक रिपोर्टिंग कर रहा है। ऐसी युद्ध उन्मादी रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए। श्री शुक्ल ने कहा कि मीडिया में रिपोर्टिंग के गिरते स्तर के लिए पत्रकारों की अज्ञानता जिम्मेदार है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिनेवा संधि की बात मीडिया में चल रही है लेकिन दोनों देश ये आधिकारिक तौर पर कह चुके हैं कि जिनेवा संधि लागू नहीं हुई। जेनेवा संधि युद्ध होने की स्थिति में युद्ध बंदी के साथ होती है। लेकिन दोनों देशों ने माना ही नहीं कि युद्ध हुआ है तो संधि की बात ही गलत है, जो तमाम बड़े चैनल और अखबार कर रहे हैं। अजय शुक्ल ने कहा कि टीवी मीडिया में हल्ला रहा कि भारत ने एयर स्ट्राइक करके 300 आतंकियों को मार गिराया। जबकि भारतीय सेना ने भी ऐसा कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि हमने इंडिया न्यूज रीजनल में औऱ आज समाज में कहीं भी हमले में मारे गए आतंकियों की संख्या का जिक्र नहीं किया। हमने वही लिखा जो आधिकारिक बयान थे। रक्षा मामलों पर बेहद संतुलित होकर लिखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि टीवी मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए एक बॉडी बनाने की जरूरत है जिसमें पत्रकारों को शामिल किया जाए। ये बॉडी खबरों की निगरानी करे और खामी होने पर बहुमत के आधार पर कार्रवाई करे।

 

पढ़िए बड़े पत्रकारों के बयान- 

 

प्रिंट मीडिया भारत में 200 वर्ष तक अपनी साख बनाए रहा और अभी भी काफ़ी हद तक बनाए है। टीवी मीडिया बीस साल में ही दम तोड़ गया और डिजिटल मीडिया तो पैदा ही “दिव्याँग” हुआ।

  • शम्भूनाथ शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार 

कुछ महीनों के लिए टीवी देखना बंद करदो साथियों
सबसे जीयादा समाज में इन लोगो ने आंतक फैला के रखा है एक मच्छर भी नहीं मरा है पाकिस्तान में बस पब्लिक को बेकूफ़ बनाया जा रहा है पूरी दुनिया का न्यूज़ देख लिया एक भी आतंकवादी का डेड बॉडी नही दिखा है

 – पुण्य प्रसून वाजपेयी, टीवी पत्रकार 
पाकिस्तान कह रहा है कि भारत का सर्जिकल स्ट्राइक ईको-टेररिज्म है क्योंकि इसमें 15 पेड़ तबाह हो गए. इमरान की पार्टी के मुताबिक वो इस मसले को यूएन में उठाएंगे. कई संस्थाओं ने ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. बीबीसी की रपट के मुताबिक बालाकोट में मसूद अजहर का मदरसा हिल टॉप पर ही है. अल जजीरा की रिपोर्ट कहती है कि बड़े धमाके से लोगों के घर टूट गए लेकिन मरा कोई नहीं. रॉयटर्स के मुताबिक एक आदमी घायल है. हामिद मीर ने मरा हुआ कौआ दिखाया. हालांकि हमारे कई अखबारों ने सूत्रों के मुताबिक 300 से 400 जैश के आतंकियों के मारे जाने की रपट छापी थी. खैर जो भी हो.. कबूतर के बदले कौआ शांति का प्रतीक बन गया. भारत में वैसे ही विलुप्तप्राय हैं.
-आलोक कुमार, सम्पादक टीवी 9 
मैं पूरे भारतवर्ष से अपील करता हूं, अगर देश और अपने दीमाग में शांति चाहते हैं तो कुछ दिनों के लिए टीवी न्यूज देखना बंद कर दें।
– कुनाल वर्मा, ,सम्पादक आज समाज 
पाक के सीमापार आतंकियों के बदले हमें लश्कर ए मीडिया के सारे अनपढ़ एंकर व रिपोर्टर वहाँ आत्मघाती दस्तों के तौर पर भेजने चाहिएँ।
तत्काल।टीवी चैनलों के बीच टीआरपी की लड़ाई, देश के लिए पाकिस्तान से ज़्यादा बड़ी बुराई है।
– हेमंत अत्रि, राजनीतिक सम्पादक दैनिक भास्कर दिल्ली 
ये NDTV ऐसे नाजुक मौके पर भी हिंदुस्तान के साथ क्यों नहीं है? खबरों के ऐसे एंगल निकाल रहा है, जैसे पाकिस्तान में बैठकर रिपोर्टिंग की जा रही हो।
– भगवान उपाध्याय- वरिष्ठ पत्रकार,  मध्यप्रदेश 
वातानुकूलित दफ्तरों में टाइ कोट पहनकर बैठो औऱ रात का खाना खाकर बैठी देश की जनता के जज्बातों को झिंझोड़ो। ज्यादातर न्यूज़ चैनल अब उस दौर में पहुंच चुके हैं, जब उनसे एंटरटेनमेंट टैक्स लिया जाए।
– सुधीर मिश्र, सम्पादक नवभारत टाइम्स लखनऊ 
भारतीय टीवी मीडिया के संपादक और एंकर साथियों,
वायु सेना के पराक्रम को अपने झूठे दावों से क्षीण न करो।
पाकिस्तान के अंदर घुस कर वार करना कोई छोटी बात नहीं थी। साहस और निश्चय की मिसाल थी। पाकिस्तान को ज़रूरी संदेश पहुँच गया था।
लेकिन 300-400 के मारे जाने के फ़र्ज़ी दावों की वजह से अंतराष्ट्रीय मीडिया आपका मखौल उड़ा रहा है।
ये दावा न तो भारतीय सरकार ने किया है, न ही वायुसेना ने। लेकिन आपके फ़र्ज़ीवाड़े ने बहुत नुक़सान किया है।
– गुरदीप सिंह सप्पल, पूर्व सम्पादक राज्यसभा टीवी 
इस वक्त भारत के विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और स्कूल, सारे मिलकर भी उतना ज्ञान नहीं बांट पा रहे, जितना इस मुल्क के टीवी न्यूज चैनलों के जरिए अज्ञान, नफरत और क्रोध बांटा जा रहा है!
करोड़ों भारतीयों के बेडरूम तक पहुंचकर ये चैनल उन्हें ज़ाहिल (और बहुतों को बद-मिजाज भी) बना रहे हैं!
– उर्मिलेश, प्रसिध्द मीडिया समीक्षक 
भारतीय टीवी मीडिया
इस कोलाज को अबतक हजारों लोग शेयर कर चुके हैं। औऱ कह रहे हैं ये मूर्ख बनाने वाले लोग हैं।

पूर्व आईपीएस अधिकारी ध्रुव गुप्त की कलम से :-

इसी कोलाज को लेकरह पुलिस अधिकारी रहे ध्रुव गुप्त कह रहे हैं कि अपने देश में ही जैश और लश्कर के आतंकियों से भी ख़तरनाक कुछ लोग हैं जो सरकारी संरक्षण में देश को भावनात्मक रूप से बांटने और देशवासियों को मानसिक तौर पर पंगु और विक्षिप्त बनाने के सतत अभियान में लगे हुए हैं। पाकिस्तान का इलाज करने से पहले अगर इन भूतों और भूतनियों का इलाज़ नहीं हुआ तो अगले कुछ सालों में समूचा देश पागलखानों में होगा। किसी मिराज से इन्हें लाइन ऑफ कंट्रोल के उस पार गिरा आईए। यक़ीनन देश की नब्बे प्रतिशत से ज्यादा समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाएगा।
गुड़गांव के मंडलायुक्त m shayin ने आज ट्वीट करके कहा कि एक समय उन्होंने अपने माता पिता से कहा था कि वो रिटायर हो गए हैं घर पर आराम करें औऱ समाचार चैनल देखें। लेकिन अब वो इस बात को वापस लेते हैं। उन्होंने कहा कृपया न्यूज चैनल न देखें औऱ उन्होंने जी न्यूज, एवीपी न्यूज, रिपब्लिक औऱ आजतक को टैग किया।

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