Home > खबरें > रफ़ाल के दस्तावेज़ कहां से मिले, ब्रह्मांड की कोई ताक़त मुझसे नहीं जान सकती- एन राम

रफ़ाल के दस्तावेज़ कहां से मिले, ब्रह्मांड की कोई ताक़त मुझसे नहीं जान सकती- एन राम

हिंदु समूह के एन राम
हिंदु समूह के सम्पादक एन राम

भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ‘द हिन्दू’ अख़बार के ख़िलाफ़ गोपनीयता के क़ानून के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है.

केंद्र सरकार का कहना है कि फ़्रांस से 36 लड़ाकू विमानों की ख़रीद से जुड़े दस्तावेज़ रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं और इसी के आधार पर ‘द हिन्दू’ ने अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है.

वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा है कि ‘द हिन्दू’ ने जिन दस्तावेज़ों को प्रकाशित किया है उस आधार पर रफ़ाल सौदे की जांच नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये सरकार की गोपनीय फ़ाइलें हैं.

‘द हिन्दू पब्लिशिंग ग्रुप’ के चेयरमैन एन राम के नाम से रफ़ाल सौदे पर कई रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. एन राम का कहना है कि उन्होंने जनहित में ये रिपोर्टें प्रकाशित की हैं.

एन राम ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, ”इसमें कुछ भी परेशानी की बात नहीं है. जो प्रासंगिक था उसे हमने प्रकाशित किया है और मैं इसके साथ पूरी तरह से खड़ा हूं.

भारत ने अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण प्रोग्राम के तहत फ़्रांस की दसो कंपनी से 8.7 अरब डॉलर में 36 रफ़ाल लड़ाकू विमानों का सौदा किया था.

एन राम ने क्या कहा?

एन राम ने कहा है, ”हमने रक्षा मंत्रालय से दस्तावेज़ चुराए नहीं हैं. हमें ये दस्तावेज़ गोपनीय सूत्रों से मिले हैं और इस ब्रह्मांड में कोई ऐसी ताक़त नहीं है जो मुझे यह कहने पर मजबूर कर सके कि दस्तावेज किसने दिए हैं. हमने जिन दस्तावेज़ों के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की है वो जनहित में हमारी खोजी पत्रकारिता का हिस्सा है. रफ़ाल सौदे की अहम सूचनाओं को दबाकर रखा गया जबकि संसद से लेकर सड़क तक इसे जारी करने की मांग होती रही.”

एन राम का कहना है कि उन्होंने जो भी प्रकाशित किया है, उसका अधिकार ‘संविधान के अनुच्छेद 19 (1) से मिला है.’ राम ने कहा कि ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार का हिस्सा है. एन राम ने कहा कि राष्ट्र सुरक्षा और उसके हितों से समझौते का कोई सवाल ही खड़ा नहीं होता है.

एन राम ने ये भी कहा कि लोकतांत्रिक भारत को 1923 के औपनिवेशिक गोपनीयता के क़ानून से अलग होने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, ”गोपनीयता का क़ानून औपनिवेशिक क़ानून है और यह ग़ैर-लोकतांत्रिक है. स्वतंत्र भारत में शायद ही किसी प्रकाशन के ख़िलाफ़ इस क़ानून का इस्तेमाल किया गया हो. अगर किसी तरह की जासूसी हो रही हो तो वो अलग बात है. हमने जो छापा है वो जनहित में है.”

 

‘खोजी पत्रकारिता पर होगा असर’

एन राम का कहना है कि अटॉर्नी जनरल के तर्क को माना जाए तो इससे खोजी पत्रकारिता पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.

राम ने कहा, ”ये केवल हिन्दू का मामला नहीं है. अन्य स्वतंत्र प्रकाशकों के लिए भी ख़तरनाक है. 1980 के दशक में हमने बोफ़ोर्स की जांच में अहम भूमिका अदा की थी. इस सरकार में मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर डर बढ़ा है. भारतीय मीडिया को इसे लेकर बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.”

पूरे विवाद पर वरिष्ठ पत्रकार और द हिन्दू में एन राम के साथ काम कर चुके प्रवीण स्वामी ने ट्वीट कर कहा है, ”19 साल पहले फ़्रंटलाइन में इस रिपोर्ट (करगिल संघर्ष पर की गई रिपोर्ट) के कारण मुझे गोपनीयता के क़ानून के तहत धमकियां मिली थीं. तब मेरे साथ एन राम खड़े थे. आज उसे याद करते हुए एन राम के प्रति मेरे मन आदर और बढ़ गया है.”

रफ़ालइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

14 मार्च तक टली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने जब एक नोट पढ़ना शुरू किया तो वेणुगोपाल ने आपत्ति जताई थी. भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि रफ़ाल सौदे से जुड़ी जांच की पुनर्विचार याचिका ख़ारिज नहीं करनी चाहिए क्योंकि ‘अहम तथ्यों’ को सरकार दबा नहीं सकती है.

रफ़ाल पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और केएम जोसेफ़ की बेंच के सामने वेणुगोपाल ने कहा था कि रक्षा मंत्रालय से नौकरशाहों ने ऐसे दस्तावेज चुरा लिए हैं जिसकी जांच अभी लंबित है.

सुनवाई के दौरान मौजूद वरिष्ठ क़ानूनी संवाददाता के सुचित्रा मोहंती अनुसार एजी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि गोपनीयता के क़ानून के अनुसार चोरी करने वालों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई 14 मार्च तक टाल दी है.

रफ़ालइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

सरकार ने क्या कहा?

एजी से जस्टिस रंजन गोगोई ने पूछा कि सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है तो वेणुगोपाल ने कहा था, ”हमलोग इसकी जांच कर रहे हैं कि फ़ाइल चोरी कैसे हुई. एजी ने कहा कि द हिन्दू ने गोपनीय फ़ाइल को छापा है. हाल ही में द हिन्दू ने रफ़ाल सौदे से जुड़ी कई रिपोर्ट छापी हैं जिनमें बताया गया है कि सरकार ने कई नियमों का उल्लंघन किया है.”

वेणुगोपाल ने कहा था कि रक्षा सौदों का संबंध राष्ट्र की सुरक्षा से होता है और ये काफ़ी संवेदनशील हैं. एजी ने कहा था कि अगर सब कुछ मीडिया, कोर्ट और पब्लिक डिबेट में आएगा तो दूसरे देश सौदा करने से बचेंगे.

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो अदालत में वही दस्तावेज रख रहे हैं जो सार्वजनिक रूप से पहले से ही मौजूद हैं.

एजी ने पुनर्विचार याचिका ख़ारिज करने के पक्ष में दलील देते हुए कहा था कि सेक्शन तीन के उपनियम सी के अनुसार अगर कोई व्यक्ति वैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल करता है, जिनका संबंध प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संप्रभुता, एकता और विदेशी संबंधों से है तो यह ग़ैरक़ानूनी है. एजी ने सुप्रीम कोर्ट से गोपनीयता के क़ानून के उल्लंघन का हवाला देते हुए पुनर्विचार याचिका ख़ारिज करने की मांग की है.

info credit  bbc

Share this: