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अयोध्या मामले की मध्यस्थता की रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध रहेगा

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सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली (हिंदुस्तान की रिपोर्ट) 

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामला शुक्रवार को मध्यस्थता के लिए सौंप दिया। इस मामले में कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता फैजाबाद में की जाएगी। पैनल की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस एफ.एम. कलीफुल्ला करेंगे और इसमें श्री-श्री रविशंकर और सीनियर एडवोकेट श्रीराम पांचू शामिल होंगे। वहीं, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मीडिया में मध्यस्थता की प्रक्रिया की रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध रहेगा। पढ़ें, सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या मामले को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने के फैसले की 10 खास बातें:

1- अयोध्या राम जन्मभूमि मस्जिद विवाद पर मध्यस्थता पर फैसला सुनाते समय चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि कोर्ट की निगरानी में मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय रहेगी।

2- अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सी.पी.सी के नियम-8 के तहत हमें मामले को मध्यस्थता के लिए रेफर करने का अधिकार है, जो हम कर रहे हैं।

3- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता की प्रकिया की शुरुआत चार सप्ताह में शुरू होनी चाहिए और आठ सप्ताह के अंदर इसे पूरा कर लिया जाना चाहिए।

4- सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार फैज़ाबाद में मध्यस्थों को सभी सुविधाएं प्रदान करे।

5 – सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मध्यस्थ आवश्यकतानुसार और अधिक कानूनी सहायता ले सकते हैं।

6- इससे पहले सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बुधवार को इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों को सुना था।

7- इस प्रकरण में निर्मोही अखाड़ा के अलावा अन्य हिन्दू संगठनों ने इस विवाद को मध्यस्थता के लिये भेजने के शीर्ष अदालत के सुझाव का विरोध किया था, जबकि मुस्लिम संगठनों ने इस विचार का समर्थन किया था।

8- शीर्ष अदालत ने विवादास्पद 2.77 एकड़ भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपील पर सुनवाई के दौरान मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया था।

9- संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

10- निर्मोही अखाड़ा जैसे हिंदू संगठनों ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों – न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ, न्यायमूर्ति ए के पटनायक और न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी के नाम मध्यस्थ के तौर पर सुझाए जबकि स्वामी चक्रपाणी धड़े के हिंदू महासभा ने पूर्व प्रधान न्यायाधीशों – न्यायमूर्ति जे एस खेहर और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ए के पटनायक का नाम प्रस्तावित किया।

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