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माखनलाल पत्रकारिता विवि के पूर्व कुलपति पर हो एफआईआर

बीके कुठियाला
पूर्व कुलपति बीके कुठियाला
  • तीन सदस्यी जांच समिति ने सीएम को सौंपी रिपोर्ट में अनुशंसा की है कि विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया था। पूर्व कुलपति बीके कुठियाला के खिलाफ एफआईआर की जाए
  • 7 मार्च को सौंपी गई है रिपोर्ट

 

भोपाल . माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (एमसीयू) में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों को उपकृत करने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए गए। साथ ही अकादमिक कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा भी हुआ। यह तथ्य मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा विवि में हुई गड़बड़ियों की जांच करने के लिए गठित समिति की रिपोर्ट में सामने आए हैं।

समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। अब यह मामला जांच  के लिए ईओडब्ल्यू को सौंपे जाने पर विचार किया जा रहा है। जांच समिति के अध्यक्ष एम गोपाल रेड्डी(एसीएस जनसंपर्क) और सदस्य संदीप दीक्षित और भूपेंद्र गुप्ता हैं।

  • किताबें छपी नहीं, खर्च हो गए 1.07 करोड़  : यूनिवर्सिटी ने भाषाई जर्नलिज्म में रिसर्च के नाम पर 1 करोड़ 7 लाख रुपए से ज्यादा की राशि खर्च कर दी। यह प्रोजेक्ट पांच साल में पूरा होना था, लेकिन किताबें छपी ही नहीं और राशि खर्च हो गई।
  • 6.86 लाख का भुगतान ‘ज्ञान संगम’ कार्यक्रम के नाम पर :  यूनिवर्सिटी ने ‘राष्ट्रीय ज्ञान संगम’ कार्यक्रम के आयोजन पर 6.86 लाख का भुगतान कर दिया। इतना ही नहीं एबीवीपी द्वारा आयोजित सामाजिक कार्यशाला के आयोजन पर भोजन पर 3 लाख रु. का भुगतान किया। इसके आमंत्रण पत्र छपवाए जाने पर ही 1.50 लाख खर्च कर दिए गए। मेहमानों को रिसीव किए जाने के नाम पर 1 लाख का भुगतान किया गया, जब समिति ने इसके कार्ड विवि से उपलब्ध कराने को कहा तो कार्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
  • शराब के लिए  दिए 1600 रुपए : समिति को रिकाॅर्ड खंगालने पर इंडिया इंटरनेशनल संस्था में शराब का 1600 रुपए का बिल भी मिला है। समिति ने रिपोर्ट में  लिखा है कि यह भुगतान यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति बीके कुठियाला द्वारा किया गया।
  • प्रोफेसर की नियुक्तियों में गंभीर अनियमितता  : यूनिवर्सिटी में जिन लोगों को प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरियां दी गई, उनके एपीआई (एक्रिडिएटेड परफार्मेंस इंडेक्स ) की जांच ही नहीं की गई। इस नियम का पालन न होने पर समिति ने गंभीर आपत्ति जताई है। समिति के सामने एक मामला राकेश सिन्हा का सामने आया। इन्होंने पॉलिटिकल साइंस में डिग्री ली है। उनका एक दिन भी क्लास लिए जाने का रिकार्ड नहीं मिला जबकि उन्हें 13 अक्टूबर 2017 से 14 मार्च 2018 तक के वेतन का भुगतान किया गया।

यह है हकीकत… ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली नागपुर की संस्था है न्यासा 

  • समिति को ऐसी शिकायतें भी प्राप्त हुई कि बिसनखेड़ी में निर्माणाधीन यूनिवर्सिटी के कैंपस निर्माण पर डीपीआर से 40 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च कर दिए गए। इस मामले की जांच किए जाने की समिति ने अनुशंसा की है।
  • यूनिवर्सिटी की आॅनलाइन परीक्षा कराए जाने के नाम पर नागपुर की संस्था ‘न्यासा’ को 9 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जबकि यह परीक्षा भोपाल की ही संस्था से कम राशि में कराई जा सकती थी। समिति ने पाया कि किसी भी पाठ्यक्रम में छात्रों की संख्या इतनी नहीं पाई गई कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान किया जाए।

रिपोर्टः दैनिक भास्कर, साथ में मीडिया मिरर इनपुट 

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