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माखनलाल विवि. के पूर्व कुलपति समेत 20 प्रोफेसर्स पर आपराधिक मामला दर्ज

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय

भोपाल।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) के पूर्व कुलपति बीके कुठियाला के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है। कुठियाला के अलावा ईओडब्ल्यू ने एमसीयू के ही 19 लोगों पर नियुक्ति में गड़बड़ी समेत अन्य अनियमितताओं को लेकर मामला दर्ज किया है। कुठियाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के करीबी हैं, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में भोपाल में पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त किए गए थे। वे दो बार कुलपति रहे।

कुठियाला के कार्यकाल में असिस्टेंट प्रोफेसर और वित्त अधिकारी समेत 24 लोगों की नियुक्तियों में मापदंडों का पालन नहीं होने और गलत नियुक्ति की शिकायत जांच समिति के समक्ष पहुंची थी। 24 लोगों में से ईओडब्ल्यू ने अभी जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर 20 के खिलाफ मामला दर्ज किया है।कुठियाला ने विश्वविद्यालय के अकाउंट से संघ से जुड़ी संस्थाओं व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित अन्य संस्थाओं को मनमाने भुगतान किए हैं। इसके अलावा खुद व परिवार के सदस्यों पर भी खर्च किया।

बृजकिशोर कुठियाला

इनकी नियुक्ति 19 जनवरी 2010 को हुई थी। अपने 8 साल 3 महीने के कार्यकाल में इन्होंने संघ से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाया। उन्होंने खुद तो लंदन की यात्रा की ही। पत्नी को भी विवि के खर्चे पर यात्रा कराई। इस राशि को 5 महीने बाद एडजस्ट किया गया। विवि के खर्च पर 13 ऐसे टूर पर गए, जिसमें प्रशासनिक व वित्तीय नियमों का सीधे तौर पर उल्लंघन किया गया। ब्लेडर सर्जरी के लिए 58,150 रुपए , आंख के ऑपरेशन के लिए 1,69,467 रुपए का भुगतान भी विवि से प्राप्त किया। विवि में अनधिकृत तौर पर लैपटॉप, आई-फोन खरीदे गए, जिनका उन्होंने उपयोग किया।

कमेटी की जांच के बाद सामने आई थीं ये गड़बड़ियां : कांग्रेस सरकार ने पत्रकारिता विवि में हुई नियुक्तियों व आर्थिक गड़बड़ियों की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। इसकी जांच रिपोर्ट में कई अनियमितताएं सामने आई थी। इसके अनुसार कुठियाला ने 2010 से 2018 के बीच एबीवीपी को 8 लाख रुपए, राष्ट्रीय ज्ञान संगम के लिए 9.50 लाख रुपए, जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र द्वारा श्रीश्री रविशंकर के आश्रम में आयोजित राष्ट्रीय विद्वत संगम के लिए 3 लाख रुपए, भारतीय वेब प्राइवेट लि. नागपुर को 46.607 रुपए का भुगतान किया था।

ईओडब्ल्यू से अपेक्षित था कि वह प्राथमिक विवेचना के बाद कार्रवाई करता। क्योंकि, शासन द्वारा नियुक्त कमेटी द्वारा प्राथमिक जांच प्रतिवेदन दिया गया है। कमेटी ने पहले शिकायतें आमंत्रित की। इन शिकायतों को संकलित किया गया। शिकायतों को संकलित करने के बाद ईओडब्ल्यू को जांच के लिए संदर्भित किया गया। ऐसे बहुत सारे प्रोफेसर हैं, जिनके खिलाफ शिकायत सिद्ध नहीं हो पाई है।

दीपेंद्र सिंह बघेल, रजिस्ट्रार
नोटः शिक्षको को राष्ट्र निर्माता मानते हुए मीडिया मिरर निजीतौर पर ये निर्णय लेता है कि जबतक 20 प्रोफेसर्स पर कोर्ट की तरफ से अंतिम फैसला नहीं आता तब तक मिरर उनके नाम प्रकाशित नहीं करेगा। 
इनपुटः भास्कर, नई दुनिया
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