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कुठियाला वैचारिक लड़ाई का शिकारः मधुदीप सिंह

बीके कुठियाला
बीके कुठियाला, पूर्व कुलपति माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि भोपाल

मधुदीप सिंह, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जुड़ी हैं। उन्होंने ये बातें अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखीं। उनकी बात को भी आपको पढ़कर एक विचार बनाना ही चाहिए। उल्लेखनीय है कि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि भोपाल के पूर्व कुलपति बीके कुठियाला किसी भी समय गिरफ्तार हो सकते हैं। आर्थिक अपराध शाखा ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अपराध शाखा के बुलाने पर वो आए नहीं, कभी मेडिकल का बहाना को कभी कुछ औऱ, अब गिरफ्तारी वांरट के बाद जब उनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है तो पाया जा रहा है कि उन्होंने सरकारी दस्तावेजों में जो घर के पते दिए हैं वो फर्जी हैं। ठीक उस समय जब कुठियाला तमाम संगीन आरोपों की जद में हैं, भूमिगत हैं औऱ किसी भी समय पकड़े जा सकते हैं तब मधुदीप सिंह जैसे लोग ऐसा लिखें, ये साहस का काम है। 

 

मित्रो, हमारे मित्र व मार्गदर्शक प्रो. कुठियाला जी के विषय में अखबारों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया में अनेक प्रकार की भ्रामक जानकारियां आ रही हैं। ऐसी अनर्गल बातों में हम सबकी भावनाओं को ठेस पहुंच रही है साथ ही अनेक लोग दिगभ्रमित हो रहे हैं। खासकर वे लोग जो आदरणीय कुठियाला जी के आदर्श जीवन और बौद्धिक जगत में उनके योगदान को निकट से नहीं जानते, उनके मन में अनेक प्रकार की भ्रांतियां खड़ी हो सकती हैं।

वास्तविकता जानने के लिए मध्य प्रदेश के कुछ पत्रकार मित्रों से बात की। इन सभी का कहना है कि कुठियाला जी को केवल वैचारिक लड़ाई का मोहरा बनाया गया है। कांग्रेस के एक शिखर नेता ने कहा *“कुठियाला के साथ ऐसा करो कि संघ का कोई व्यक्ति फिर ऐसे खुलकर काम करने से डरे’’*

जिज्ञासावस हमने कुठियाला जी के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी डाउनलोड की। पढ़ कर कुछ ऐसा लगा कि कुठियाला जी के जिन कामों की प्रशंसा होनी चाहिए थी, उनको अपराध घोषित करने की चेष्टा एफआईआर में की गई है। उदाहरण के लिए, एफआईआर का मुख्य भाग यहां उद्धरित है :-

“ वर्ष 2010 से 2018 के बीच प्रोफ़ेसर बृज किशोर कुठियाला द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अन्य आरोपियों के षड्यन्त्र में संलिप्त होकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को राशि 8 लाख रुपये, राष्ट्रीय ज्ञान संगम के लिए राशि 9.5 लाख रुपये, जम्मू कश्मीर अध्ययन केन्द्र द्वारा श्रीश्री रविशंकर के आश्रम में आयोजित राष्ट्रीय विद्वत संगम के लिए राशि 3 लाख रुपये, भारतीय क्षिक्षण मण्डल नागपुर को राशि 8 हजार रुपये तथा भारतीय वेब प्रा०लि० नागपुर को राशि 46,607 रुपये अवैधानिक रूप से विश्वविद्यालय की निधि राशि से जारी कर लाभ प्रदान किया है। इस प्रकार से लगभग कुल राशि 21,04,607/- रुपये की आर्थिक हानि विश्वविद्यालय को कारित की गई है”।

आप तय करें कि इस प्रकार के प्रयास अपराध हैं या देश की बौद्धिक समृद्धि के कार्य। पुरस्कार देने योग्य कार्य हैं या कि दण्डनीय कार्य। जल्दी ही एफआईआर की अन्य जानकारियां भी आप तक पहुंचाएंगे।

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