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कामता मर्डर केस में पुलिस को कोर्ट की फटकार

-पत्नी और उनके कथित प्रेमी पर हत्या का आरोप

-डीआईयू टीम कर रही थी मामले की जांच

नई दिल्ली।

पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर थाना क्षे़त्र के चर्चित पत्रकार कामता सिंह मर्डर केस की दोबारा जांच होगी। जाचं में लापरवाही बरतने पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जमकर लताड़ लगाते हुए नए सिरे से जांच करने के आदेश दे दिए हैं। इस बार जांच डीसीपी की निगरानी में एसीपी और एसएचओ से कराई जाएगी। मामला पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर थाने का है। अभी तक जाचं पूर्वी दिल्ली के डीआईयू के हवाले थी जिसमें कोर्ट ने कई खामियां पाई। पुलिस कोर्ट द्वारा मांगे गए तथ्य पेश करने में पूरी तरह से नाकाम रही। मृतक पत्रकार और आरोपी उसकी पत्नी के बीच मोबाइल्स डिलेट को भी पेश नहीं कर सकी।

मामला करीब ढाई वर्ष पुराना है। न्यूज-24 चैनल में काम करने वाले पत्रकार कामता सिंह की संदिग्ध परिस्थियों में मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि दो मार्च 2017 की रात उनकी पत्नी अल्का सिंह और उनके कथित प्रेमी रवि सिंह ने साजिश करके मार डाला था। दोनों में अवैध संबंध था। उनके बीच में रोड़ा बन रहे पत्रकार को ठिकाने लगाया। मरने की सूचना परिजनों को नहीं दी गई थी। घटना की खबर मृतक पत्रकार के एक मित्र ने उनके एक करीबी रिश्तेदार को दी, तब मामला सामने आया नहीं तो शव भी गायब करने की प्लानिंग थी। आरोपियों ने घटना को कई दूसरे रूप देने की भी कोशिश की, लेकिन पीएम रिपोर्ट में मौत असमान्य आने के बाद उनकी करतूत सामने आई।

कोर्ट ने पुलिस से घटना के संबंध में फोन काल्स्, अन्य चीजों को पेश करने को कहा था। लेकिन पुलिस के हाथ कुछ लगता इससे पहले ही आरोपियों ने सभी सबूत नष्ट कर दिए थे। उसके बाद पुलिस से मिलकर आरोपियों ने मामले को रफा-दफा कराने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट की फटकार के बाद मामला फिर से खुल गया। कड़कड़डूमा कोर्ट संख्या-27 के जज अनुज अग्रवाल ने बुधवार को पुलिस को एक उच्चस्तरीय टीम बनाकर दोबारा से जांच कर चार माह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का फरमान दिया है। पीड़ित के वकील मोहम्मद फारूक ने बताया कि पुलिस जांच में झोल है यह अंदेशा उनको पहले से ही था। कहां-कहां पुलिस से चूक हुई है, इस बावत उन्होंने कोर्ट को अवगत करा दिया है। वकील ने कहा कि उनकी मांग है पुलिस जल्द आरोपियों को कस्टडी में लेकर पुछताछ करे। परिजनों ने कोर्ट के नए आदेश पर संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

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