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साथी आलोक श्रीवास्तव की खूबी बता रहे विकास मिश्र

आलोक श्रीवास्तव
आलोक औऱ अमिताभ केबीसी के सेट पर
विकास मिश्र और आलोक श्रीवास्तव

आजतक के प्रोड्यूसर विकास मिश्र अपने सहकर्मी रहे कवि औऱ गीतकार की खूबी साझा कर रहे हैं। ये सब विकास ने तब लिखा जब आलोक श्रीवास्तव की कविता को अमिताभ बच्चन ने आवाज दी। 

इस तस्वीर में आपको अमिताभ बच्चन के साथ आज के जाने माने शायर और कवि आलोक श्रीवास्तव दिखाई दे रहे हैं। आपको ये महज एक तस्वीर लग रही होगी, लेकिन मेरे और आलोक के लिए ये एक कहानी है। इस कहानी के लिए चलते हैं थोड़ा फ्लैश बैक में।
करीब छह साल पहले की बात है। तब आलोक न सिर्फ आजतक चैनल में थे, बल्कि हमारी ही टीम के सदस्य भी थे। दिल्ली के मौर्या सेरेटन होटल में एक कार्यक्रम था। उसमें अमिताभ बच्चन आए हुए थे। अमिताभ का कार्यक्रम खत्म हुआ, निकलने की बारी आई तो आलोक ने मुझसे कहा-भइया अमिताभ बच्चन के साथ एक फोटो खिंचवा दीजिए। अमूमन हम लोग सितारों और नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाने से बचते हैं, लेकिन अमिताभ बच्चन की बात ही कुछ और है। आलोक ने कहा तो, मैंने उन सज्जन से निवेदन किया, जिनको कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन को लाने और ले जाने की जिम्मेदारी मिली थी। वे इस बात से भड़क गए। आलोक पर भी थोड़ा भड़के। ऐसा लगा जैसे अमिताभ बच्चन उनकी मिल्कियत हों।
आलोक की आंख में आंसू आ गए थे। मैंने उसी वक्त कहा- आज छोटी सी बात के लिए आप ऐसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, आने वाले दिनों में आलोक उस स्थिति में होगा, जहां वो आपकी.. आपके परिवार की तस्वीरें अमिताभ बच्चन के साथ खिंचवा देगा, वो भी पूरे इत्मीनान से। आलोक को आप जानते नहीं, जल्दी ही ये अमिताभ के साथ कदमताल करता दिखाई देगा। थोड़ी देर बाद हमारे चैनल के मार्केटिंग के एक सीनियर सदस्य आए, पूछा-क्या हुआ। मैं गुस्से में था, उनसे भी कहा- आपको भी अमिताभ के साथ फोटो खिंचवाने का मन हो तो बताइएगा। एकाध महीने में आलोक आपकी भी फोटो अमिताभ के साथ खिंचवा देगा, अमिताभ के घर चाय भी पिलवा देगा। कुछ और भी कहा था, ज्यादा याद नहीं।
जाने मैं ये सब किस झोंक में बोल गया, लेकिन लगता है कि उस वक्त जुबान पर सरस्वती बैठ गई थीं। कुछ ही महीने के भीतर अमिताभ बच्चन और आलोक आमने-सामने थे। आलोक के लिखे गीत पर अपने सुर दे रहे थे। जहां तक मुझे याद है कि आलोक के लिखे गीत को संगीत दिया था आदेश श्रीवास्तव ने और आवाज दी थी अमिताभ बच्चन ने। उसके बाद तो अमिताभ बच्चन से आलोक का आए दिन का मिलना-जुलना होने लगा। घंटों साथ रहने का भी मौका मिला।
पिछले साल अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति में आलोक को एक्सपर्ट के तौर पर भी बुलाया। उनकी कविताएं उस मंच पर सुनीं। यही नहीं बिग बी ने कई बार आलोक की कविताओं को ट्वीट भी किया, बाकायदा क्रेडिट देकर।
आलोक अभी फिर अमिताभ से केबीसी के सेट पर मिलकर आया है। अमिताभ के साथ कोई बड़ा काम करने जा रहा है, जिसका जिक्र अभी ठीक नहीं है। केबीसी के सेट पर अमिताभ ने उसकी गजलों की किताब ‘आमीन’ के पांचवें संस्करण का लोकार्पण किया। आज सुबह आलोक ने मुझे तस्वीरें व्हाट्सएप पर भेजीं। लिखा-बड़े भइया, ये तस्वीरें देखिए और फिर एक बार वो दिन याद कीजिए, जब आपने मुझे होटल मौर्या में किसी के तिरस्कार करने पर अपनी दुआओं से नवाजा था।
मैंने फोन मिलाया। आलोक की आवाज नहीं आ रही थी, मुझे लगा नेटवर्क खराब है। मैंने पूछा-आवाज आ रही है..? आलोक ने कहा- हां बड़े भइया। दरअसल उस वक्त आलोक भावुक था, आंखों से आंसू निकल रहे थे। याद आ रही थी छह साल पहले की वो लानत और छह साल बाद का ये मुकाम।
आलोक को ये मुकाम मेरी दुआओं की वजह से नहीं मिला है, इसको लेकर मुझे कोई गलतफहमी नहीं है। आलोक में वो प्रतिभा है, वो जुनून है, वो विनम्रता है, वो क्षमता है, जिसके चलते उसे ये मुकाम मिलना ही था।
आज आलोक श्रीवास्तव का नाम देश के नामचीन शायरों में शुमार है। जगजीत सिंह, अमिताभ बच्चन, मालिनी अवस्थी समेत कई गायक आलोक के गीतों और गजलों को सुर दे चुके हैं। कई फिल्मों के लिए आलोक ने गीत लिखे हैं, कई के लिए लिख रहे हैं। दो दर्जन से भी ज्यादा देशों में कवि सम्मेलन और मुशायरे में भी आलोक ने शिरकत की है, देश विदेश में कई सम्मान भी मिल चुके हैं।
मैंने आलोक को मंच से कविताएं पढ़ते देखा है। हजारों श्रोताओं को तालियां बजाते सुना है। मंच के सामने खड़े होकर वन्स मोर–वन्स मोर की आवाजें लगाते देखा है। आलोक की कलम में जादू है तो कविता और गजल पढ़ने का अंदाज भी निराला है।
इतनी शोहरत के बावजूद क्या मजाल कि आलोक का जरा सा भी दिमाग खराब हुआ हो। शोहरत का नशा कहीं से छूकर नहीं गुजरा। आज भी उतना ही विनम्र, उतना ही रिश्तों को मानने वाला, निभाने वाला।
आलोक को कविताई विरासत में नहीं मिली थी। बहुत पापड़ बेले हैं उसने। बहुत खाक छानी है, बहुत सारे शायरों के आगे-पीछे घूमा है। यहां तक कि नामचीन शायर मुनव्वर राणा ने उसका एक शेर ही चुरा लिया। इसका पता मुझे तब चला, जब मैंने आलोक की कविता ‘अम्मा’ सुनी। उसकी लाइन है-
‘बाबूजी गुजरे..आपस में सब चीजें तकसीम हुईं।
मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से आई अम्मा।’
मैं सुनकर चौंका, क्योंकि मैंने मुनव्वर राणा की गजल की ये लाइनें सुन रखीं थीं-
‘किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई।
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई।’
मैंने पूछा-कबे, मुनव्वर राणा की गजल से लाइनें टीप लीं..? फिर आलोक ने सबूतों के साथ दिखाया उसकी ये गजल कितने पहले पत्रिकों में छपी थी. वो कहानी भी बताई कि मुनव्वर राणा ने उसकी लाइनें चुराई ही नहीं थीं, बाकायदा उसकी लाइनों पर डकैती डाली थी।
आलोक के संघर्षों ने उसे कुंदन बनाया है। उसमें खासियतें हैं तो उस पर ईश्वर का वरदान भी है। पूर्व जन्म के कर्मों से ऐसा परिवार मिला है, जहां कैंसर से जूझता भाई अपने छोटे भाई के लिए बड़ी कार खरीदने के लिए बेकरार मिलता है। ऐसी पत्नी, जो कांटों भरी डगर हो या फूलों भरी, हर रास्ते पर हंसते हुए चलने को तैयार। वैसा ही प्यारा सा बेटा।
रिश्तों के बारे में आलोक लग्गू है। एक बार जिसे मान लिया तो फिर मान लिया। मैंने कई बार सड़क पर मित्रों के बीच आलोक से उसकी कविताएं गजलें सुनवाई हैं। मैंने एक बार कहा था-आलोक एक रोज तुम बहुत बड़े शायर और बड़े आदमी बन जाओगे, लेकिन मैं चाहता हूं कि जब मैं चाहूं, तुम ऐसे ही सड़क पर कविता सुनाने के लिए तैयार रहो। इस बात में आलोक का जवाब नहीं चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि ये दोनों बातें सही हैं। वो बहुत बड़ा और कामयाब आदमी भी बनेगा, एक फोन पर हाजिर होकर सड़क पर गजलें भी सुनाएगा। आलोक अभी रास्ते में है, अभी कई मंजिलें बाकी हैं, कई मुकाम आने बाकी हैं।

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