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अरुंधति रॉयः हंगामा क्यों हैं बरपा

अरुंधति रॉय के युवावस्था के दिन
अरुंधति रॉय

त्वरित टिप्पणी

डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर 

अरुंधति रॉय फिर चर्चा में हैं। किताब की वजह से नहीं अपने बयान की वजह से। दरअसल किताब तो उनकी पश्चिम वाले ही देखते समझते हैं। हमारे यहां के लोग तो उनके बयान पर मर मिटते हैं।

मामला दरअसल ये है कि अरुंधति रॉय कल दिल्ली विश्वविद्यालय पहुंची और उन्होंने नेशनल पापुलेशन रजिस्टर मामले पर बोलते हुए तमाम बातें कह डालीं जो सरकार और उनके चाहने वालों को चुभ गईं और फिर क्या। चल निकला हंगामा। अरुंधति रॉय ने कल कहा कि एनसीआर की शुरूआत करने का ही जरिया एनपीआर है। और इस बारे में सरकारी कर्मचारी जब आएँ तो उन्हें सही जानकारी न देकर नाम रंगा बिल्ला बताएं या कुंगफू कुत्ता और एड्रेस में रेसकोर्स रोड का पता दे दें। अरुंधति का ये कहना हुआ कि यहां पूरी फौज लग गई। अर्बन नक्सल, चुडैल, देशद्रोही, किस्म किस्म की गालियां।

पर गालियां देने वालों ने अरुंधति को कल बोलते नहीं सुना, अभी भी सुन लें अगर तो शायद उन्हें कुछ समझ आए। दरअसल वो छात्रों के बीच में थीं। ये सच है कि वो सीएए औऱ एनसीआर मुद्दे का विरोध जताने ही वहां पहुंची थीं। पर जिस बयान पर विवाद छिड़ा है। उस समय पूरा माहौल हंसी ठिठोली में बदला हुआ था। अमित शाह और मोदी जी के परस्पर विरोधाभासी बयानों पर लोग चुटकी ले रहे थे। इस कानून की हालिया प्रासंगिकता पर चर्चा हो रही थी, उसी मजाकिया मूड़ में अरुंधति ने एक सामान्य बातचीत के दौरान ये बोला कि कोई आए तो नाम रंगा बिल्ला बता देना औऱ पता रेस कोर्स। उन्होंने हंसते मुस्कुराते ये एक समूह से बातचीत के दौरान कहा। जिस रंगा बिल्ला अपराधियों से अरुंधति के रंगा बिल्लाओं को जोड़ा जा रहा है, बहुत संभव है अरुंधति के रंगा बिल्लाओं का उनसे कोई संबंध न हो। क्योंकि उन्होंने उपमा देते हुए ये प्रयोग किया, जैसे हम लोग आमतौर पर कहते हैं कि लल्लू, चिंटू, पप्पू, भोपूं आदि। वो बोल रहीं थी तो उस वक्त उनकी जबान पर रंगा बिल्ला आ गया, हो सकता है वो चिंटू-कल्लू बोल देतीं कि अगर कोई कर्मचारी आए तो चिंटू और कल्लू नाम बता देना। तो फिर मीडिया चिंटू और कल्लू नाम वालों को उकसाता। हाहा।  पर मीडिया तो उस सिरे को उठाता है जिससे कुछ मसाला मिले। अरुंधति को जानने वाले जानते हैं कि बहुत आरक्षित किस्म की महिला हैं। उनको आज के विरोध पर निश्चित ही हंसी आ रही होगी। वैसे कोई दम नहीं है उनके बयान के विरोध में। हां सरकार चाहे तो उन्हें जेल भेज सकती है…. 2019 के अलविदा का वक्त है। क्यों विवाद विवाद खेल रहे हो। जाओ कहीं मस्ती करो। ऐश करो।

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