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फिल्मी किस्सेः काका का एरोगेंस!

राजेश खन्ना
राजेश खन्ना

काका (राजेश खन्ना) मूडी किस्म के आदमी थे। और जब सफ़लता के रथ पर सवार होकर मूडी आदमी रफ्तार पकड़ता है तो फिर उसके कहने ही क्या। वो आदमी को आदमी क्या समझेगा। यही काका को ले डूबा, चाहे फिर उनका प्रेम हो या फिल्मी करियर।

 

राजेश खन्ना अपनी पहली फ़िल्म की शूटिंग में ही 4 घण्टे लेट पहुंचे। प्रोड्यूसर और कई वरिष्ठ लोग बड़े नाराज औऱ हैरान थे कि एक नए कलाकार का ये रवैय्या है। राजेश पहुंचे तो प्रोड्यूसर ने सख़्त लहजे में कहा इस समय आ रहे हैं आप? तो राजेश बोले थे कि देखो साब फ़िल्म विलम अपनी जगह है, अपनी लाइफ तो ऐसे ही चलती है। समय आगे बढ़ा काका सीढ़ी दर सीढ़ी सफलता की ओर चढ़ते गए। इतनी सफलता की एकदौर में बॉलीवुड उनपर ही केंद्रित हो गया।

कहा जाता है बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना ही थे। उससे पहले ऐसा तमग़ा इज़ाद न हुआ था। फ़िल्म जगत के जानकार कहते हैं कि ये तमग़ा अमिताभ बच्चन ने उनसे छीना, वो भी आहिस्ता आहिस्ता। बड़ी रोचक बात है कि एक दौर में फ़िल्म अभिनेताओं के रुतबे का आंकलन बॉलीवुड के जानकार बार्बर असोसिएशन मुंबई की कटिंग प्राइज से तय करते थे कि किस सितारे की कटिंग प्राइज़ ज्यादा है। अचानक देखा गया राजेश खन्ना कट से ज्यादा कीमत अमिताभ कट की घोषित की गई है।
काका के समक्ष अमिताभ क्या थे, इस बात से अंदाजा लगाइये की आनंद फ़िल्म के अंतिम दृश्य में काका के मरने के शूट को लेकर अमिताभ नर्वस थे कि इतने बड़े कलाकार के सामने वो रोने धोने के साथ डायलॉग डिलेवरी कैसे करेंगे और महमूद की समझाइश के बाद वो सहज हो सके। जब महमूद ने कहा कि आप यही मान लेना कि काका वास्तव में मर गए हैं, अब जब काका है ही नहीं तो नर्वसनेस कैसी।
पटकथा लेखक सलीम खान बताते हैं कि राजेश खन्ना में एरोगेंस बहुत था और एरोगेंस मनुष्य को या तो शीर्ष पर ले जाता है या धरातल पर। संयोग से काका दोनो ओर गए। सलीम खान कहते हैं एकदौर में काका पर कामयाबी का वो नशा चढ़ा कि वो अन्य कलाकारों को धूल मिट्टी मानने लगे।

सलीम एक किस्सा बताते हैं कि एक दोपहरी राजेश खन्ना का फोन आया कि आप कहाँ हैं, मैंने कहा घर पर तो काका बोले मेहबूब स्टूडियो तुरन्त चले आइये। मैंने सोचा इतना जरूरी कौन सा काम आन पड़ा, पहुंचा तो काका अपनी कार की बोनट से टिककर सिगरेट सुलगा रहे थे और एक पत्रिका में कुछ पढ़ रहे थे। मैं पहुंचा, देखते ही पत्रिका आगे बढ़ाते हुए बोले कि इसमें ये आलेख आपने लिखा है, मैंने देखा संजीव कुमार पर एक आलेख था किसी पत्रकार का। उसमे टिप्पणी मेरी भी थी, जिसमे मैने लिखा था संजीव कुमार काबिल अभिनेता हैं।
मैंने काका से कहाँ हां ये मेरी टिप्पणी है। तो काका बिफर पड़े और बोले कि संजीव कुमार क्या मुझसे ज्यादा काबिल है, क्या मुझसे बड़ा एक्टर है। मैंने कहा उनसे ऐसा नही है आप.. आप हैं, लेकिन संजीव कुमार के बारे में किसी ने राय ली तो उनके बारे में कहा। ऐसे थे काका। हालांकि सलीम खान बावजूद ये कहते हैं पूरी शिद्दत के साथ कि बॉलीवुड में राजेश खन्ना जितना स्टारडम न किसी का हुआ है न होगा। वो अपने बेटे सलमान का बकायदा नाम लेते हुए कहते हैं सलमान कहीं भी नहीं हैं राजेश खन्ना के आगे। और न कोई और खान (शाहरुख, आमिर आदि)।

राजेश खन्ना की क्या शख्सियत थी इसको टाइगर पटौदी बहुत बेहतर तरीके से बताते हैं। नवाब पटौदी से एक साक्षात्कार में पूछा गया कि आप अपने जीवन में अब तक किन दो लोगों से बहुत प्रभावित हैं। तो पटौदी ने जो नाम लिए थे उनमें पहला राजेश खन्ना और दूसरा पंडित नेहरू। नवाब पटौदी बताते हैं कि राजेश खन्ना और नेहरू जी दोनों की शख्सियत कुछ ऐसी थी कि किसी भी महफिल में हों सारा आकर्षण वहीं से शुरू वहीं खत्म हो जाता था।

फिल्म अभिनेता नवीन निश्चल बताते हैं कि मुंबई में एक फिल्मी पार्टी चल ही थी, वहां पर इंडस्ट्री का लगभग हर दिग्गज कलाकार मौजूद था, क्या दिलीप कुमार, क्या राजकुमार। अमिताभ, संजीव कुमार सभी थे। लेकिन मैं देखता हूं कि खचाखच भरे हॉल में अचानक से एक हैंडसम कि एंट्री होती है, और कैमरे उस ओर मुड़ जाते हैं। कैमरे के फ्लैश के आगे उस हैंडसम का चेहरा कई बार ओझल हो जाता है। मीडिया उनपर टूट पड़ता है। सारे सितारे एक ओर और वो हैंडसम एक ओऱ। वो सितारा कोई और नहीं राजेश खन्ना ही थे। राजेश खन्ना को एक दौर में आशा पारेख ने यह कहकर काम करने से मना किया था कि कौन लड़का है जिसका चेहरा मुंहासों से भरा है और एक दौर ऐसा आय़ा जब इंडस्ट्री की टॉप की हीरोइनों ने उनके नखरे झेले हैं। कामयाबी राजेश खन्ना के सिर चढ़कर बोली। पर वो कामयाबी को पचा नहीं पाए। शराब, शबाव और उनके घमण्ड ने उनको तेजी  से धरातल की तरफ ढकेला। यहां तक कि प्रेम के मामले में भी काका मूडी ही बने रहे औऱ न सिर्फ उन्होंने इसके चलते अपनी प्रेमिकाओं को खोया बल्कि पत्नी डिम्पल को भी दिया। जो उनकी हद दर्जे तक दीवानी थीं। राजकपूर के डिम्पल को समझाने पर कई बार उनका और डिम्पल का घरौंदा बचा पर अंततः डिम्पल काका का रुतबा न झेल सकीं। राजेश खन्ना कभी प्रेमी बनकर नहीं हमेशा सुपरस्टार बनकर प्रेमिकाओं से मिलते रहे और उनपर हुक्म चलाते रहे। चाहे वो अंजू महेंद्रू हों या डिम्पल। काका के प्रेम पर भारी स्टारडम पर अगली कड़ी विस्तार से होगी।

गुनगुनी धूप का आनंद लीजिए। खुदा हाफिज

  • आलेखः डॉ प्रशांत राजावत,  फिल्म और सिनेमा के विद्यार्थी ( कोई प्रतिक्रिया हो तो ह्वाट्सएप करें 99583-77353) 
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