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बिना आवाज की ताली रचना की प्रस्तुति द्वारा डॉ सच्चिदानंद जोशी

लेखक
डॉ सच्चिदानंद जोशी, शिक्षाविद, लेखक

 

बिना आवाज़ की ताली :
हम सब #covid19 के प्रकोप से जूझ रहे है । अपने संयम , संकल्प और सहकार से हम सब मिलकर उसका मुकाबला कर रहे हैं। इस लॉक डाउन यानी ग्रहवास के कारण हममें से अधिकांश का जीवन गणित गड़बड़ा गया है। उसे कब , कैसे और कितना सुधारा जाएगा कोई नही जानता।
हम ही में से कई कलाकार ऐसे भी है जिनके घर हमारे मनोरंजन से चलते है।ये कलाकार नामचीन नही है । लेकिन उनके बिना हम उन कला प्रदर्शनों की कल्पना भी नही कर सकते । वो रोज काम करते है और रोज कमाते है, उसी पर उनकी आजीविका चलती है , उनका परिवार पलता है। लॉक डाउन में वो सब घर पर बैठे
है । कब तक रहेंगे पता नही। जिन आवश्यक सेवाओ का उल्लेख होता है उनमें इनके काम शुमार नही होते। वे गाते है , कोई वाद्य बजाते है , नृत्य करते है , लाइट , मेक अप करते हैं , स्टेज बनाते है । ये सब काम कब शुरू हो पाएंगे पता नही। जब होंगे तो किस स्वरूप में होंगे ये भी पता नही , और जब होंगे तब क्या हम लोग उसी उत्साह से उनका प्रदर्शन देखने जाएंगे ये भी पता नही।
इस सबके बावजूद वो हमारे चेहरे पर खुशी लाने के लिए, हमारा मनोबल बढ़ाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं।जो कोई उनसे जो कुछ भी करने को कहता है वो कर रहे हैं। वो चाहते है कि हम सब हौसला बना रहे और हमारे अंदर इस महामारी से जूझने की शक्ति बनी रहे। वो सब कलाकार है और अपना आत्मसम्मान बनाये रखते हुए देश की सेवा करना चाहते हैं। इसलिए शायद वो मुफ्त में बंटने वाला राशन भी नही ले पाते।
इधर ऑनलाइन मनोरंजन ने अपनी एक नई दुनिया बना ली है , एक नई आदत बना ली है। सवाल ये भी है कि जब सब कुछ प्रायः प्रायः मुफ्त और घर बैठे मिलेगा तो थिएटर कौन जाएगा।
कोरोना वारियर्स के रूप में हम डॉक्टर , पैरा मेडिकल स्टाफ, वैज्ञानिक, सुरक्षा कर्मी, सफाई कर्मी , प्रशासन सभी का सम्मान करते है। उनकी शान में स्तुति गान करने भी हम कलाकारों को ही बुलाते है। लेकिन उन्हें हम वारियर्स नही मानते । उन्हें हम आवश्यक सेवा भी नही मानते। क्या हमने कभी इस दृष्टिकोण से सोचा है उनके बारे में। हम इस बारे में सोचे और हो सके तो कुछ करें , यही विचार ये कविता “बिना आवाज़ की ताली”रचते समय आये। सहधर्मिणी मालविका जोशी जी ने इसमे अभिनय किया है , और पुत्र दुष्यंत ने इसका फिल्मांकन।

  • सच्चिदानंद जोशी, सचिव इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र दिल्ली
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