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भाजपा प्रवक्ता ने दर्ज कराया प्रसिद्ध पत्रकार विनोद दुआ पर केस दर्ज

vinod dua
विनोद दुआ, वरिष्ठ पत्रकार

नयी दिल्ली,  (भाषा)

दिल्ली पुलिस ने भाजपा के प्रवक्ता नवीन कुमार की शिकायत पर शुक्रवार को वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ कथित तौर पर ‘‘सार्वजनिक गड़बड़ी पैदा करने वाले बयान देने’’ के लिए प्राथमिकी दर्ज की। अपराध शाखा को दी गई शिकायत में कुमार ने दुआ पर आरोप लगाया कि वह यूट्यूब पर ‘‘द विनोद दुआ शो’’ के माध्यम से ‘‘फर्जी सूचनाएं फैला’’ रहे हैं। दुआ ने कहा, ‘‘पुलिस ने अभी तक मुझसे संपर्क नहीं किया है। इस समय मैं इस पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकता।’’ कुमार ने दुआ पर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान ‘‘गलत रिपोर्टिंग’’ करने के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि दुआ ने कहा था, ‘‘केंद्र सरकार ने हिंसा को रोकने के लिए कुछ नहीं किया।’’ कुमार ने यह भी आरोप लगाए कि दुआ ने प्रधानमंत्री को ‘‘कागजी शेर’’ बताया था। पुलिस ने कहा कि भादंसं की धारा 290, 505 और 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि बताते चलें कि बीजेपी प्रवक्ता नवीन कुमार पूर्व में जी न्यूज समूह में सम्पादक और अपराध संवाददाता के तौर पर काम कर चुके हैं।

एफआईआर के बाद विनोद दुआ का बयानः 

प्रिय मित्रों, जाहिरा तौर पर भाजपा ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में मेरे खिलाफ FIR दर्ज की है । क्या मुझे इतना फर्क पड़ता है?

एफआईआर को लेकर जनसत्ता में रहे वरिष्ठ पत्रकार अमबरीश कुमार का बयान-

ये फेक न्यूज़ फैलाते हैं ?
यही आरोप लगाया गया है .ये विनोद दुआ हैं .टीवी पत्रकारिता के चमकते सितारे रहे हैं .आज नहीं जब न इतने चैनल थे न शोर मचाने वाले चिल्लाने वाले एंकर थे .तब हम लोग इन्हें सुनते थे .प्रधानमंत्री से लेकर संतरी तक इन्हें सुनते थे . राजनैतिक खबरों के अलावा देश के विभिन्न अंचलों के खानपान पर इनका कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय हुआ था .संगीत के शौकीन है .लोगों को जोड़ते हैं तरह तरह से .पर इनके खिलाफ मुक़दमा लिखा दिया गया है कि ये समाज को तोड़ रहे हैं .नेता लोगों ने यह आरोप लगाया है .एक नेता है जो मंत्री भी हैं और मंच से गोली मारों सालों को नारा देते हैं .वे संत पुरुष हैं .कल एक मोहतरमा चप्पल लेकर एक कर्मचारी को पीट पीट कर शांति का संदेश दे रही थी .हम सबने देखा .एक और सरकार आई थी जंगली मुर्गा मुर्गी मारने के नामपर कई खोजी पत्रकारों को जेल भेज दिया था इससे पहले सिद्धार्थ वर्दराजन पर भी ऐसा ही आरोप लगा था .ये लोग कई दशक से खबर लिखने और पढने वाले है .सत्ता को इनकी खबरे पसंद नहीं आती थी .अभी भी नहीं आती हैं .तो क्या ऐसे सभी लोगों को जेल भेज दिया जाए ? फिलहाल नेता की रपट पर दरोगा यह तय करेगा कि ये कैसी खबर लिखते पढ़ते हैं ?आप पत्रकार हैं तो कोई दरोगा से एनओसी ले लीजिये प्रमोशन में काम आएगा क्योकि पत्रकारिता की जांच पड़ताल तो अब संपादक नहीं दरोगा ही करेगा .

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