Home > खबरें > पाकिस्तानः अग़वा पत्रकार मतीउल्लाह जान 12 घंटे बाद घर पहुंचे

पाकिस्तानः अग़वा पत्रकार मतीउल्लाह जान 12 घंटे बाद घर पहुंचे

पाक पत्रकार
अगवा किए गए पत्रकार मतीउल्लाह बीच में

इस्लामाबाद से बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से अग़वा किए गए पाकिस्तानी पत्रकार मतीउल्लाह जान मंगलवार की देर शाम अपने घर वापस पहुँच गए हैं.

लोकतंत्र विरोधी ताक़तों के आलोचक रहे पत्रकार मतीउल्लाह जान को इस्लामाबाद शहर से मंगलवार को अग़वा कर लिया गया था.

परिवार वालों के अनुसार अपहरणकर्ताओं ने मतीउल्लाह जान को फ़तहजंग के क़रीब छोड़ दिया था जहां से उनके भाई उन्हें अपने साथ लेकर घर आए.

मतीउल्लाह जान के साथी पत्रकार एज़ाज़ सैय्यद ने ट्वीटर पर मतीउल्लाह जान की रिहाई के बाद उनके साथ अपनी एक तस्वीर शेयर की और लिखा कि मतीउल्लाह जान ने 12 घंटों के बाद रिहाई पाई.

उन्होंने बीबीसी उर्दू के संवाददाता आज़म ख़ान को बताया कि मतिउल्लाह जान ने उन्हें साढ़े नौ बजे स्कूल के पास छोड़ा था.

लेकिन दो घंटे बाद साढ़े ग्यारह बजे स्कूल के सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें बताया कि उनके पति की कार स्कूल के बाहर ही खड़ी है.

उन्होंने बताया, “कार की खिड़कियां खुली थीं. उनके कार की चाभी और उनको फोन दोनों ही गाड़ी के भीतर ही थे. उसके बाद मैंने अपने पति से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन जब उनसे बात नहीं हो पाई तो मैंने पुलिस को फौरन ही बुला लिया.”

स्कूल के सीसीटीवी कैमरे में दर्ज फुटेज के मुताबिक़ तीन गाड़ियों पर आधे दर्जन से ज़्यादा लोग उन्हें जबरन कार में ले गए.

सीसीटीवी फुटेज में मतिउल्लाह अपना फोन स्कूल के भीतर फेंकते हुए देखे गए. लेकिन तभी एक वर्दी पहने बंदूकधारी गेट पर आया और उसने स्कूल परिसर में खड़ी एक महिला से वो फोन मांगा. महिला ने वही किया जो उसे करने के लिए कहा गया था.

मतिउल्लाह की पत्नी ने बताया कि उन्हें बाद में ये पता चला कि एक टीचर को उनके पति का फोन स्कूल कैंपस में मिला था लेकिन कुछ ही मिनटों में एक लंबा आदमी वर्दी पहने उनके पास आया और उसने फोन मांगा और लेकर चला गया.

मति की पत्नी का कहना है कि ये सबकुछ इतनी जल्दी में हुआ कि उस टीचर को पूरी घटना समझ में ही नहीं आई.

आबपारा पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि मतिउल्लाह जान के अगवा होने की घटना से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज हासिल कर ली गई है लेकिन अपहरणकर्ताओं की सूरत साफ़ तौर पर समझ में नहीं आ रही है.

उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज को सावधानी से देखने के बाद ही वे कोई अंतिम नतीजे पर पहुंच सकते हैं.

“ये स्पष्ट है कि फुटेज में कुछ पुलिसवाले दिख रहे हैं. उन्होंने काउंटर-टेररिज़्म की वर्दी पहनी हुई है. लेकिन वर्दी कि बिना पर हम ये नहीं कह सकते कि वे कौन लोग हैं और अगर वे पुलिस से हैं तो किस थाने में तैनात हैं.”

मतिउल्लाह जान को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना के एक मामले में बुधवार को तलब किया गया था. बीते बुधवार को पाकिस्तान के चीफ़ जस्टिस गुलज़ार अहमद ने उनके एक विवादास्पद ट्वीट के लिए उन्हें नोटिस जारी किया था.

इस्लामाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अतहर मिनाल्लाह ने राजधानी में अगवा किए गए पत्रकार मतिउल्लाह जान को बरामद करने का आदेश दिया है और कहा है कि उन्हें बरामद नहीं किया जाता है तो संबंधित पार्टियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया जा सकता है.

मतिउल्लाह जान कौन हैं?

क़ायदा-ए-आज़म यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ़ डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ की डिग्री रखने वाले मतिउल्लाह जान पिछले तीन दशकों से पत्रकार हैं. वे पाकिस्तान के कई टीवी चैनलों से जुड़े रहे हैं. लेकिन इन दिनों वे यूट्यूब पर अपना ही एक चैनल चला रहे थे. उनके पिता पाकिस्तान की आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल हुआ करते थे.

हमले के वक़्त मतिउल्लाह के बच्चे भी कार में थे. जून, 2018 में पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फूर ने कुछ सोशल मीडिया एकाउंट्स पर पाकिस्तान विरोधी प्रोपेगैंडा चलाने की इलज़ाम लगाया था. इन सोशल मीडिया एकाउंट्स में मतिउल्लाह जान का भी हैंडल था.

पाकिस्तान में कैसी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं?

जैसे ही मतिउल्लाह जान के ग़ायब होने की ख़बर सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर इसकी प्रतिक्रियाएं आने लगीं.

नेशनल एसेंबली के मेंबर मोहसिन डावर ने कहा कि वो मतिउल्लाह जान को ग़ायब करने की घटना की कड़ी आलोचना करते हैं. ताक़तवर लोगों के सामने जो कोई भी सच बोलेगा, वो इस पाक़ ज़मीन पर ग़ायब कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि असहमत होना देशभक्ति ही है.

मोहसिन डावर ने सरकार और प्रशासन से उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील भी की है.

मतिउल्लाह के साथ काम कर चुके पत्रकार ओसामा बिन जावेद ने लिखा, “मतिउल्लाह जान हुकूमत से सवाल करने वाली पाकिस्तान की चुनिंदा आवाज़ों में से थे. और अगर वे ग़ायब हैं तो ये पाकिस्तान की हुकूमत और सिक्योरिटी इस्टैबलिशमेंट पर एक सवाल है. क्योंकि ये वही संस्थान हैं जो मतिउल्लाह की आलोचनाओं के निशाने पर थे.”

मतिउल्लाह जान के भाई ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें कथित तौर पर अगवा किए जाने के खिलाफ़ याचिका दायर की है.

याचिका में पाकिस्तान के गृह और रक्षा मंत्रालय और इस्लामाबाद की पुलिस को पार्टी बनाया गया है.

मतिउल्लाह जान के भाई ने उनकी शीघ्र बरामदगी की मांग भी की है.

सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रवक्ता और सीनेटर शिबली फराज़ ने संवाददाता सम्मेलन में मतिउल्लाह जान के अपहरण की बात स्वीकार की.

लेकिन उन्होंने ये कहा कि उनके पास फिलहाल पूरी जानकारी नहीं है पर उनकी बरामदगी पूरी तरह से सरकार की जिम्मेदारी है.

शिबली फराज़ ने ये भी कहा कि उन्होंने इंटीरियर मिनिस्टर इजाज़ शाह से इस मामले में बात करने के लिए संपर्क किया था लेकिन वे फिलहाल अपने बीमार भाई को देखने के लिए अस्पताल गए हुए थे.

Share this: