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तस्वीर के बहाने पब्लिक रिलेशन की भूमिका समझिए

नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये तस्वीर चर्चा का विषय है। तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया में सकारात्मक व नकारात्मक दोनो तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इंदौर के पत्रकार और टिप्पणीकार गिरीश मालवीय के इस संदर्भ में ये दोनों लेख काबिलेगौर है।
प्रोपेगैंडा :
आज सुबह से सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे मोदी जी अपने विशालकाय बंगले के दालान में मोर का दाना खिला रहे हैं एकड़ो में फैले गार्डन में मॉर्निंग वॉक कर रहे है आसपास मोर पंख फैलाकर नाच रहे है मोदी ने खुद इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम एकॉउंट पर डाला है
कल आपको बड़े बड़े सेलेब्रिटीज़ के एकॉउंट को मैनेज करने में PR एजेंसियों का क्या रोल होता है ये बताया था,….. दरअसल ये कम्पनिया लगातार सोशल मीडिया के डाटा के जरिए यूजर की प्रोफाइलिंग करती है उन्हें हर तरह का मटेरियल प्रोवाइड करती है उन्हें कब क्या दिखाना है ये डिसाइड करती है……….. आप को याद होगा कि पुलवामा अटैक के अगले ही दिन युद्ध , हिंसा पाकिस्तान विरोध के वीडियो की अचानक से भरमार आ गयी थी हर व्हाट्सएप यूजर के पास ऐसे ही वीडियो भेजे जा रहे थे एयर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तो इस टाइप के मटेरियल ने मीम ने वीडियो ने माहौल को पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में कर दिया
केम्ब्रिज एनेलिटिका की सुनवाई में क्रिस्टोफर वायली जो एक डेटा साइंटिस्ट और साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग के एक्सपर्ट थे ओर कैंब्रिज एनालिटिका के रिसर्च हेड बने उन्होंने फेसबुक डाटा लीक के मामले में खुलासा किया कि बड़े पैमाने पर अफ्रीका में उनकी कम्पनी ने सरकारों को अस्थिर करने का काम किया है वायली ने उस सुनवाई में स्वीकार किया हैं कि “नाईजीरिया में चुनाव के समय कनाडा की कंपनी एग्रेगेट आईक्यू ने लोगों भयभीत करने के लिए हिंसक वीडियो वायरल किए। दुनिया भर की ऐसी बड़ी बड़ी PR एजेंसियां जिनके पास डेटा को समझने और हासिल करने की ताकत होती है, अब सोशल मीडिया यूजर 24-7 ऐसे मटेरियल प्रोवाइड करवाती है यूजर सिर्फ इनके मीम ओर वीडियो फारवर्ड करने वाला एजेंट बन कर रह जाता है
डाटा एनलिसिस करने वाली PR एजेंसियां सिर्फ चुनाव के वक्त ही सक्रिय हो ये जरूरी नही है अब यह पार्टी के टॉप लीडर की छवि को चमकाने के 24 घण्टे ओर 365 दिन काम करती है यह चुनाव का वक्त नही है अभी जनता कोरोना काल मे आर्थिक संकटों से जूझ रही है अभी उसे रिलेक्स मोड में डालने का समय है….इसलिए प्रधानमंत्री मोदी सावन भादौ में अपने बंगले के दालान में मोर के नृत्य का आनंद ले रहे है उसे दाना डाल रहे है ऐसा वीडियो बनाया जा रहा है………. आप स्वयं सोचिए कि अगर आप खुद का ऐसा वीडियो शूट करवाना चाहो तो यह कितना टाइम टेकिंग जॉब होगा.…..लेकिन यह हो रहा है हमारे प्रधानमंत्री काम करने के बजाए ऐसे प्रोपेगेंडा वीडियो बनाने में मशगूल है और दुख इस बात का है कि हम सोशल मीडिया पर सही मुद्दों को उठाने के बजाए इन वीडियो और तस्वीरों को देखने के लिए मजबूर है…..
पब्लिक रिलेशन पर एक अन्य आलेख 
मुझे कभी इस बात में शक नही रहा कि जितने ट्विटर और इंस्टाग्राम के सेलेब्रिटीज़ है यह PR एजेंसियों के ही प्रोडक्ट है…….. अगर आप सुशांत सिंह वाले प्रकरण में देखे तो आप पाएंगे कि सुशांत सिंह के परिवार में उनकी बहनों के ट्विटर एकॉउंट अब PR एजेंसियां ही हैंडल कर रही है उनके पिता ने जो चिठ्ठी रिलीज की थी वह बॉलीवुड के किसी स्क्रिप्ट राइटर से लिखवाई गई थी और न सिर्फ सुशान्त का परिवार बल्कि रिया चक्रवर्ती के सारे सोशल मीडिया एकॉउंट से जो भी संदेश जा रहा है वह सारा PR एजेंसिया ही डिसाइड कर रही है……
यह तो हुई सुशांत सिंह वाली बात, कल मित्र सौमित्र ने बताया कि यूट्यूब पर एक गालीबाज आदमी है ‘भाऊ’ इसके लाखो फॉलोअर बताए जाते हैं, उसका एकॉउंट भी वडोदरा की एक एजेंसी ऑपरेट करती है, ओर उस एजेंसी का बीजेपी से डायरेक्ट लिंक है यही भाऊ गाली बक बक कर बिग बॉस में पुहंच गया…..अब ये पुहंचा या पुहंचाया गया यह आप स्वंय समझ लीजिए………
अब दुसरी तमाम सेलेब्रिटीज़ की बात कर लेते हैं जो आजकल अपने भड़काऊ बयानों की वजह से टीवी के न्यूज़ चैनलों और न्यूज़ वेबसाइट पर छाई रहती हैं इसमे अभी सबसे ज्यादा टॉप पर है कँगना राणावत….. कोई भी बकवास से बकवास मुद्दा हो ये अभिनेत्री उस अपनी राय अवश्य देती है …..ओर एक डील के तहत उसके ट्वीट ओर बयानों को दर्शकों के सामने परोसा जाता है ….. यह डील न्यूज़ चैनल्स ओर PR एजेंसी के बीच होती है कि हमे आपके चैनल पर इतना कवरेज दिया जाएगा , दरअसल न्यूज़ मीडिया और PR एजेंसी दोनों के लिए यह विन विन डील है,
ऐसी ही एक ओर है कुश्ती की महिला खिलाड़ी बबीता फोगाट ….क्या आपको आश्चर्य नही होता कि सैकड़ो नही बल्कि हजारों की संख्या में खिलाड़ी होंगे जिनका कद फोगाट से बड़ा है लेकिन उनके बयानों को मीडिया कोई महत्व नही देता लेकिन फोगाट कुछ बोलती है तो तुरन्त मीडिया उठा लेता है…ऐसे ओर भी एकॉउंट है अभिजीत भट्टाचार्य, कैलाश खेर, सोनू निगम आदि आदि यह अपने अपने स्तर पर अलग अलग काम करते हैं लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य एक ही एजेंडा सपोर्ट करना होता है जिसे PR एजेंसी डिसाइड करती है इसे समझना थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड है जैसे डील यह है कि 8 से 10 ट्वीट आप अपने हिसाब से करो लेकिन 1 ट्वीट आपको PR एजेंसी के हिसाब से करेगी
इन तमाम सेलेब्रिटीज़ की पोल पट्टी कुछ साल पहले कोबरा पोस्ट ने स्टिंग कर बहुत बढ़िया तरीके से खोली थी लेकिन मीडिया ने कभी उस बारे में बात नही की
कोबरापोस्ट के रिपोर्टरों ने एक छद्म पीआर एजेंसी के प्रतिनिधि बनकर इन सितारों से मुलाक़ात की थी. उन्हें बताया गया कि आपको अपने फेसबुक, ट्विटर और इन्स्टाग्राम अकाउंट के जरिये एक राजनीतिक पार्टी को प्रोमोट करना है
उनसे कहा गया, ‘हम आपको हर महीने अलग-अलग मुद्दों पर कंटैंट देंगे, जिसे आप अपने शब्दों और शैली में लिखकर अपने फेसबुक, ट्विटर और इन्स्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट करेंगे. आपके और हमारे बीच आठ-नौ महीने का एक दिखावटी करार होगा. यही नहीं जब पार्टी किसी मुद्दे पर घिर जाए तो आपको ऐसे मौकों पर पार्टी का बचाव भी करना होगा.’
इन मशहूर सितारों ने सभी शर्तें मानते हुए मनमाफ़िक पैसा मिलने पर किसी भी पार्टी के लिए सोशल मीडिया पर छद्म-प्रचार करने को तैयार थे. इनमें अनेक चर्चित नाम शामिल थे जैसे जैकी श्रॉफ, शक्ति कपूर, विवेक ओबेरॉय, अभिजीत भट्टाचार्य, कैलाश खेर, मीका सिंह, अमीषा पटेल, महिमा चौधरी, श्रेयस तलपड़े, राखी सावंत, अमन वर्मा, सनी लियोन, कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव, सुनील पाल, राजपाल यादव आदि
इसके अलावा इसमें पुनीत इस्सर, सुरेंद्र पाल, पंकज धीर और उनके पुत्र निकितिन धीर, टिस्का चोपड़ा, दीपशिखा नागपाल, अखिलेन्द्र मिश्रा, रोहित रॉय, राहुल भट, सलीम ज़ैदी, हितेन तेजवानी और उनकी पत्नी गौरी प्रधान, एवलीन शर्मा, मिनिषा लाम्बा, कोइना मित्रा, पूनम पांडेय, उपासना सिंह, कृष्णा अभिषेक, विजय ईश्वरलाल पवार यानि वीआईपी, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य और डांसर-एक्टर संभावना सेठ भी पैसे लेकर कुछ भी लिखने को तैयार थे
एक ओर बड़ा नाम था जो अब PR एजेंसियों की मेहनत से प्रवासी मजदूरों का मसीहा बन गया है वह था सोनू सूद का आप जानते है सोनू सूद क्या डील चाहते थे सोनू सूद हर महीने 15 मैसेज के लिए 1.5 करोड़ की फीस पर तैयार नहीं थे. सूद एक दिन में पांच से सात मैसेज करने को तैयार थे लेकिन प्रति मैसेज वे 2.5 करोड़ रुपये की मांग कर रहे थे.
अब यदि सोनू सूद एक मैसेज का इतना माँग रहे थे तो आप समझ लीजिए कि उनकी प्रवासी मजदूरों को मदद करने वाली पूरी कैम्पेन किसके कहने पर चलाई गई और किसने रकम लगाई जितनी रकम उन्होंने खर्च की होगी उससे दसियों गुना ज्यादा रकम तो उन्होंने अपने ट्वीट ओर इंस्टाग्राम पोस्ट का रेट बढ़ाकर वसूल ली होगी
लेकिन इन सबकी गलती नही है,दरअसल लोग ही बेवकूफ है जो ऐसे घटिया फिल्मी सितारों ओर खिलाड़ियों की ओपिनियन से अपने आपको प्रभावित होने देते है उन्हें फॉलो करते है उनकी चर्चा करते हैं यह सब एक तरह के बनाए गए PR एजेंसियों के बनाए गए प्रोडक्ट है जो हमे एक स्यूडो वातावरण में बनाए रखते हैं……..थोड़ा लिखा है अधिक समझिएगा……….
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