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चांद साब का जाना मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में बहुत बड़ी क्षति

चांद साहब
चांद साहब
अलविदा ! चांद साब
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चांद साब का जाना मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में बहुत बड़ी क्षति है । नए पत्रकार साथी शायद नहीं जानते होंगे कि वे आपातकाल, बिहार प्रेस बिल ,मानहानि विधेयक तथा अनेक अवसरों पर पत्रकारिता की रीढ़ बन कर उभरे थे ।वे चाहते तो देश में कहीं भी किसी भी पद पर अपनी एजेंसी में जा सकते थे ,लेकिन इंदौर के मोहपाश में वे ऐसे बंधे कि उससे निकल ही न सके ।एक ज़माना था ,जब चांद साब के एक इशारे पर मंत्री और मुख्यमंत्री नाचने लगते थे । मैं जब इंदौर में था तो वे मेरे एक वरिष्ठ दोस्त और बड़े भाई जैसे बन गए थे ।उनका संरक्षण पाकर कोई भी पत्रकार अपने को धन्य समझ सकता था ।बेहद ज़िंदादिल,यारबाज और आंखों में ढेर सारा प्यार लिए चांद साब शाम की महफिलें लूट लेते थे ।हम लोगों ने अनगिनत शामें चांद साब के साथ बिताई हैं ।पिछली बार इंदौर गया था तो उनसे मिलने का तय किया था , लेकिन अफ़सोस कि उस मुलाक़ात का संयोग नहीं बना और वे हमें छोड़कर चले गए । उनकी शेरो शायरी,मुस्कुराहट,ठहाके और मस्ती भरा अंदाज़ आज भी याद है ।
चांद साब ! आप हमारे दिलों में हमेशा धड़कते रहेंगे ।
– राजेश बादल- वरिष्ठ पत्रकार 
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