Home > खबरें > टीआरपी मामले पर वरिष्ठ पत्रकारों के बयान

टीआरपी मामले पर वरिष्ठ पत्रकारों के बयान

रिपब्लिक भारत
वीरवार को मुंबई पुलिस कमिश्मर परमजीत सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर अर्नब गोस्वामी के चैनल रिपब्लिक भारत समेत दो अन्य चैनलों पर टीआरपी खरीदने का आरोप लगाया है। टीआरपी मतलब टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट, जिसके आधार पर टीवी चैनलों की लोकप्रियता साबित होती है। और विज्ञापन मिलने का प्रमुख आधार यही रेटिंग हैं। इस पूरे मामले के खुलासे के बाद मीडिया जगत में हल्ला है। हालांकि टीआरपी चोरी का ये पहला मामला नहीं है पूर्व में भी ऐसे आऱोप लगते रहे हैं लेकिन इस बार खुलासा पुलिस ने किया है तो बात ने तूल पकड़ा है। 
पूरे मामले में कुछ पत्रकारों की राय
वैसे तो रिपब्लिक टीवी हर दिन अपने दर्शकों के साथ फ्रॉड करता है, उन्हें धोखा देता है, मगर अब उसका एक और फ्रॉड सामने आ गया है। वह पैसे देकर टीआरपी कबाड़ रहा था। मगर टीआरपी नापने वाले पीपल्स मीटर वाले घरों का पता करके टीआरपी बढ़ाने का ये खेल अरसे से चल रहा है। एक समय इंडिया टीवी पर भी ये आरोप लगा था। दक्षिण के कई चैनल भी ऐसी धांधली करते हुए पकड़े गए हैं।
रिपब्लिक टीवी ने ऐसा करके न केवल दर्शकों को धोखा दिया है बल्कि पूरी इंडस्ट्री को धोखा दिया है। उसके वे विज्ञापनदाता भी धोखा खा गए जो उसे नंबर वन चैनल मानकर विज्ञापन देते हैं।
रिपबल्कि टीवी इसके अलावा भी धोखेधड़ी कर चुका है। उसने दो फ्रिक्वेंसी पर चैनल डालकर और लैंडिंग पेज खरीदकर अवैध तरीके से अपनी टीआरपी बढाई थी। लेकिन जैसे अडानी-अंबानी अपराधों के बल पर यहाँ तक पहुँच गए हैं कि कोई उनके अपराधों की बात नहीं करता उसी तरह रिपब्लिक टीवी की चर्चा भी नहीं की जाती। लेकिन इस भँडाफोड़ के बाद की जाएगी।
कुछ साल पहले टीवी चैनलों द्वारा इस तरह की धांधली करने के ख़िलाफ़ एनडीटीवी ने अमेरिकी कोर्ट में दावा भी ठोंका था, मगर कुछ हुआ नहीं। दावा टीआरपी देने वाली एजंसी टैम इंडिया के खि़लाफ़ किया गया था। उस समय एनडीटीवी की टीआरपी एकदम से नीचे आ गई थी।
मैं जब न्यूज़ एक्सप्रेस का चैनल हेड था, तो कई ऐसे दलाल आते थे जो पैसे के एवज़ में इसी तरह से टीआरपी बढ़वाने का दावा करते थे। अपन ने नहीं किया मगर बहुत से चैनल ऐसा करते हैं उन्हीं से पता चला था।
साफ़ है कि टीआरपी के खेल में बहुत सारे फर्ज़ीवाड़े हैं और इन्हें दूर करने में बार्क नाकाम रहा है।

– मुकेश कुमार, वरिष्ठ टीवी पत्रकार


टीआरपी और निर्मल बाबा -एक अध्ययन 2012
टी आर पी अंक सितंबर 2012 जन मीडिया
निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह नरुला ने टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मीडिया स्टडीज ग्रुप ने एक अध्ययन में पाया है कि कुछ समाचार चैनलों में ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ के प्रायोजित कार्यक्रम को चलाने के पीछे मची होड़ का मकसद टीआरपी हासिल करना रहा। टीआरपी बढ़ाने की होड़ में शामिल कुछ न्यूज चैनलों के अलावा टैम मीडिया रिसर्च भी बराबर का दोषी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और एनबीए (न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन) भी इसके लिए कम जवाबदेह नहीं हैं।
– अनिल चमड़िया, सम्पादक जन मीडिया
—————-
मुंबई पुलिस प्रेस कांफ्रेन्स कर बता रही है कि रिपब्लिक टीवी फर्जीवाड़ा कर टीआरपी में आगे निकल रहा था रिपब्लिक पैसा देकर टीआरपी को मैन्युपुलेट करने का काम कर रहे था, पुलिस के अनुसार लोगों को अपने घरों में किसी विशेष चैनल को अपने टीवी पर लगाने के लिए क़रीब 400-500 रुपए हर महीने दिए जाते थे.
उसका यह फर्जीवाड़ा आज पकड़ा गया है कुछ लोगो को यह खबर सुनकर जरूर आश्चर्य हुआ होगा लेकिन मुझे बिल्कुल आश्चर्य नही हुआ मुंबई पुलिस रिपब्लिक टीवी और सोशल मीडिया के फर्जीवाड़े के पीछे बहुत पहले से पड़ी हुई थी
मुंबई पुलिस ने कुछ महीने पहले ऐसा ही एक केस दर्ज किया था जिसमे मुंबई पुलिस ने एक कंपनी के प्रमुख को गिरफ्तार किया था उसकी कम्पनी फेक व्यूज, लाइक्स, कमेंट्स, सब्सक्राइबर्स और शेयर्स सोशल मीडिया पर उपलब्ध कराती है……..दरअसल सिंगर भूमि त्रिवेदी ने जुलाई 2020 में मुंबई पुलिस से संपर्क कर एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए जाने के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी इस केस में मुंबई पुलिस ने 16 जुलाई को एक बड़े इंटरनेशनल रैकेट का खुलासा किया. पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया मार्केटिंग कंपनियां फर्जी प्रोफाइल बनाकर उसे ऑपरेट कर रही हैं.एक आदमी को भी उन्होंने गिरफ्तार किया था जो कथित तौर पर फीस लेकर इंस्टाग्राम यूजर्स को फर्जी फॉलोअर मुहैया कराता है…… वही से ये सारी कड़ियां जुड़ना शुरू हुई थी
मुंबई पुलिस ने भारत में काम करने वाली ऐसी 54 कंपनियों का पता लगाया था जो फर्जी प्रोफाइल और फर्जी पहचान बनाने में शामिल हैं. ऐसा वो मैनुअल या बॉट्स नाम के एक सॉफ्टवेयर की मदद से करते हैं. गिरफ्तार व्यक्ति से की गई पूछताछ में ये पता चला कि उसने कम से कम 176 अकाउंट्स के लिए 5 लाख फर्जी प्रोफाइल मुहैया कराए थे….
मुंबई पुलिस ने यह भी खुलासा किया था कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ऐसे करीब 80 हजार से ज्यादा अलग मंचों पर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाए गए साइबर सेल यूनिट ने पाया कि पोस्ट्स को सोशल मीडिया के मंचों पर दुनिया के विभिन्न देशों जैसे- इटली, जापान, पोलैंड, स्लोवेनिया, इंडोनेशिया, तुर्की, थाईलैंड, रोमानिया और फ्रांस से पोस्ट किए गया इन सभी पोस्ट में अधिकतर हैशटैग- #justiceforsushant #sushantsinghrajput और #SSR इस्तेमाल किया गया
सुशान्त सिंह केस को खास तौर पर सुसाइड के बजाए मर्डर के रूप में सोशल मीडिया पर चलाया गया सोशल मीडिया पर स्प्रेड किया जाने वाला यह कंटेंट बिल्कुल निराधार मर्डर थ्योरीज को प्रमोट कर रहा था, उन्हें सुसाइड थ्योरी से कहीं ज्यादा ट्रैक्शन मिला. मिशिगन यूनिवर्सिटी में एक एसोसिएट प्रोफेसर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम ने यह स्टडी की इसमे रिसर्च टीम ने करीब 7,000 यूट्यूब वीडियोज और 10,000 ट्वीट्स का विश्लेषण किया, जो करीब 2,000 पत्रकारों और मीडिया हाउसेज और 1,200 राजनेताओं से जुड़े थे. ये सारे ट्वीट वीडियो और पोस्ट SSR केस में नेरेटिव को सुसाइड से मर्डर में बदलने में अहम रहे.
दरअसल जिस तरह से हमारे सोशल बिहेवियर को रिपब्लिक जैसे चेनल ओर सोशल मीडिया के इन एकॉउंट के द्वारा बदलने का प्रयास किया जा रहा है उस पर ठिठक कर एक नजर डालने की जरूरत है
-गिरीश मालवीय, वरिष्ठ पत्रकार व समीक्षक
—————————–
#TRP मामले में फिलहाल तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि #रिपब्लिकटीवी दोषी है या नहीं। लेकिन पहली नजर में यह मामला #अर्णवगोस्वामी से #शिवसेना और मुम्बई पुलिस कमिश्नर #परमबीरसिंह के प्रतिशोध का ही लग रहा है। परमबीर सिंह की प्रेस कांफ्रेंस और #आजतक को दिए इंटरव्यू को सुनने के बाद मुझे यही लगा कि फिलहाल तो पुलिस के पास #रिपब्लिक के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है।
– अनिल पांडे, पूर्व अध्यक्ष दिल्ली पत्रकार संघ
——————————–
टीआरपी चोरी का ये बड़ा और अपराधिक मामला है। मीडिया जगत औऱ देश के लोगों के साथ धोखा है ये। आरोपियों को सख्त सजा मिले।
– राहुल कंवल, डायरेक्टर इंडिया टुडे समूह
——————
टीआरपी चोरी के केस पहले भी सुनाई देते रहे। हमने भी अपने दौर में ऐसे मामले सुने औऱ पड़ताल करवाई थी। लेकिन चूंकि इसबार केस पुलिस की ओर से उठाया गया है, इसलिए बात गंभीर है।
अशुतोष, पूर्व पत्रकार
Share this: