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अरे दादा. आरोपियों का पक्ष लिखने को कहा था, पक्ष से पक्षपात करने को नहीं

दैनिक जागरण में हाथरस कांड की खबर की प्रस्तुति

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली।

दैनिक जागरण मूलतः उत्तरप्रदेश का अखबार है। उत्तरप्रदेश से ही इसका जन्म हुआ। इस अखबार पर हमेशा से प्रदेश की खबरों व सरकारों का प्रभाव रहा है। कठुआ रेप कांड में इस अखबार ने जमकर किरकिरी करवाई थी, अखबार की प्रतियां जलाई गईं थी। अब फिर दैनिक जागरण ने अपने 9 अक्तूबर के अंक में कारिस्तानी कर डाली हाथरस कांड को लेकर।

आरोपियों के एक पत्र को आधार बनाते हुए पहले पन्ने की लीड खबर बना दी। इतना ही नहीं पाठकों को भ्रमित करते हुए ये खबर प्रस्तुत की गई है। पहली नजर में ये लगेगा कि अखबार या कोई रिपोर्ट ये कहती है कि हाथरस मामले में पीड़िता की हत्या उसके ही परिजनों ने की। उन्होंने फ्लैग में जरूर जिक्र किया कि आरोपियों ने आऱोप लगाया कि परिजनों ने हत्या की है पीड़िता की। लेकिन सीधे तौर पर खबर की ये प्रस्तुत एक तरह से पाठकों को भ्रमित करने का तरीका है।

मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी तंत्र के इशारे पर पहले पन्ने की लीड के रूप में ऐसा कारिस्तानी देश के नंबर वन अखबार ने की है। वरना आमतौर पर ऐसे गंभीर मामलों में आरोपियों की बयान को आधार बनाकर पहले पन्ने की लीड खबर नहीं बनती। ये प्रायोजित खबर है। खबर को आप पढ़ें आप समझ जाएंगे कि अखबार किस तरह से पाठकों के साथ खेलना चाहता । मीडिया की भाषा में इसे रीडर मेनिपुलेट कहा जा सकता है।

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