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ब्रेड पकौड़े से शादी भी टूट सकती है..

मीडिया मिरर
डॉ प्रशांत राजावत. सम्पादक मीडिया मिरर

एडिटर अटैकः  डॉ प्रशांत राजावत, सम्पादक मीडिया मिरर 

pratap.prashant@rediffmail.com 

आज सुबह दैनिक भास्कर में चेतन भगत का लिखा पढ़ रहा था वो कृषि कानूनों पर अपने विचार रख रहे थे। मैं सोच रहा था बताइए मसखरेपन की कहानियां लिखने वाला आदमी कृषि जैसे अतिसंवेदनशील विषयों पर भी लिखता है या लिख लेता है। कैसे दोमुंहा जमाना है। व्यापार करने के लिए सेक्स बेच रहे हैं और काबीलियत दर्ज कराने के लिए कृषि कानूनों पर बोल रहे हैं। ऐसे लोग बखूबी जानते हैं कि सेक्स बिकता है इसलिए जनता को वो परोसना है। बाकी कृषि कानून पर किताब पढ़ेगा कौन। हाहाहा।

बड़ा अजीब दौर है। कल एक पत्रकार मित्र बता रही थीं कि उन्हें एक व्यक्ति ने शादी का प्रस्ताव दिया ये कहकर कि वो ब्रेड पकौड़ा बहुत बेहतर बनाता है और खाने का भी शौक रखता है। और इधर मेमसाब को ब्रेड और पकौड़ा दोनों शब्दों से सख्त एलर्जी है। ऐसे में तलाकशुदा व्यक्ति पुनः विवाहित होने से रह गए। बताइए ब्रेड पकौड़ा उनकी जिंदगी में पनौती बनकर आ टपका। ब्रेड पकौड़ा की जगह कुछ और कह देते तो बात बन जाती।

तमाम ज्वलंत मुद्दे हैं लिखने के लिए पर मैं बच रहा हूं। मैं सोचता हूं ये आत्मसंघर्ष का वक्त है। निंदा या विश्लेषण का नहीं। पर जब मैं कुछेक पहलुओं को देखता हूं तो लिखने की चुल उठती  है। एकदिन देख रहा था कि भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक साब किसी घोर हिंदूवादी टाइप संगठन के वेबिनार में गौ सेवा पर व्याख्यान के लिए आमंत्रित थे। जाहिर है उन्होंने स्वीकृति दी होगी। गाय हिंदू धर्म में पूज्य है। हम हिंदू माता का दर्जा देते हैं गाय को। सब ठीक है। मैं स्वयं गाय को पूजता हूं। लेकिन हर व्यक्ति का निजी व पेशेवर जीवन होता है औऱ दोनों के कुछ नियम कायदे हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक होने के नाते प्रोफेसर संजय द्विवेदी का पेशेवर आचरण बतौर संचार विद्वान के रूप में होना पर्याप्त है। लेकिन एक जनसंचार संस्थान के महानिदेशक की गद्दी पर बैठे व्यक्ति का गाय पर व्याख्यान देना थोड़ा अपचपूर्ण है। पर कायमचूर्ण भी राजू श्रीवास्तव बेंच ही रहे हैं न।

किसान आंदोलन में पत्रकारों की दुर्गति देख रहा हूं। माइक देखते ही जनता पत्रकारों को कोसने लगती है कि तुम फलां गुट के हो। बताइए क्या जमाना आ गया है कि जब आम नागरिक पत्रकारों को देखते ही उनको कोसने लगता है कि तुम पत्रकार नहीं फलां पार्टी के एजेंट हो। मुझे लगता है कुछ दिन में माइक में लोगो चिपकाना रिस्क हो जाएगा। लोग घसीट लिया करेंगे। कांरवा पत्रिका ने एक मीडिया विशेषांक निकाला है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को कवरपेज पर जगह देते हुए कार्यकारी सम्पादक कैप्शन दिया है। हाहाहा। इन दिनों मुझे लोगों के सामाजिक व्यवहार से बहुत आशा नहीं बंधती। जैसे गर्भवती महिला आमतौर पर पेट छिपाकर 9 माह काटती थी औऱ ये जमाना बेबी बम्प का है। वैसे ही तमाम ढकी मुदी रहने वाली चाजें अनायास व अनावश्यक ही उभारी जा रही हैं। जमाना जानता है कि भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक स्वघोषित संघी हैं। लेकिन पद की मान्यता रखते हुए उन्हें कम से कम फिलहाल संघ के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखना चाहिए अपने कार्यकाल के दौरान। ये एक नैतिकता है। जैसे माता पिता के सामने बेटा बहू के साथ सेक्स नहीं करता एक दीवार का सहारा लेता है और 9 माह बाद उसे पुत्र या पुत्री रत्न की प्राप्ति होती है। जबकि जानने को तो माता पिता जानते ही हैं कि ये रत्न सूर्य भगवान ने तो गर्भ में पोषित नहीं किया। पर एक नैतिकता होती है। अब वो जाती जा रही है। मैं बहुतायत में विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स को देखता हूं सीधे तौर पर, खुले तौर पर वो सत्तासीन दल, उसके उप संगठनों, उसके पदाधिकारियों व मंत्रियों के प्रचारकों की सीधी भूमिका में सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। मुझे लगता है इनके आंखों का पानी मर गया है, नैतिकता ये पी गए हैं चंद ख्वाबों को पूरा करने के लिए। इन्हें मौत सुकून से आएगी मुझे संदेह है। मीडिया व पत्रकारिता के प्रोफेसरों को मैं देखता हूं जिन्हें संचार विषयों पर चर्चा करनी चाहिए वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अधिवेशन, संघ के पदाधिकारियों के भाषण पोस्ट व शेयर करने में व्यस्त हैं। जिन लोगों ने भूल से भी अपने पिता को कभी पूज्य नहीं लिखा होगा वो मोहन भागवत को सैकड़ों सैकड़ों बार परम पूज्य लिख रहे हैं।

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान,

कितना बदल गया इंसान।। कितना बदल गया इंसान।

इसे कहते हैं आंखों से हया का मर जाना।

खैर.. ईश्वर सबको सद्बुद्धि दे। कुछ सेहत की बात करके विराम लेते हैं। धूप खूब लीजिए। प्रतिदिन एक घंटे जरूर लीजिए। पानी गरम ही पीना है। याद रखिए। सर्दी में गरम पानी सबसे बड़ी औषधि है। और गरम पानी की शुरुआत सुबह उठते ही शौच से पहले ही कर दीजिए। कम से कम तीन गिलास गरम पानी पीकर ही शौच को जाइए। बासी खाना, ठंडा खाना मत खाइए। दांतों का ख्याल रखिए। ह्दय को बचाइए। ह्दय को स्वस्थ रखने का सबसे बढिया तरीका व्यायाम और बहुत कम कीमत में बाजार में उपलब्ध अर्जुन छाल। एक चम्मच अर्जुन छाल का पाउडर सुबह गरम दूध या पानी में डालकर खाली पेट पी जाइए। ह्दय चकाचक रहेगा। अर्जुन छाल सिर्फ जनवरी लास्ट तक ही लें। गरम पानी से नहाएं पर सिर में गरम पानी कभी न डालें। सप्ताह में एक बार तेल की मालिश शरीर में जरूर करें। मैं स्वयं ये सब कर रहा हूं और बेहतर महसूस करता हूं।

शेष सब कुशल मंगल है। मैं खुश हूं। स्वस्थ हूं। औऱ हां सियाचिन के फौजियों द्वारा एक जबरदस्त गरमी देने वाली मंकी कैप मिल गयी है। तो दिल्ली की सर्दी आराम से कट रही है। मजा आ रहा है। मेरे मामा का लड़का वहां पोस्टेड था। तो वही उपहार स्वरूप दे गया। वैसे मुझे कोई संदेश करना हो ऊपर दिए मेल पर करना, समय मिलने पर जवाब जरूर दिया जाएगा।

नमस्कार। धन्यवाद

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