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नए साल की पाती.. विपक्षहीन राजनीति, विकल्पहीन देश

मीडिया मिरर
डॉ प्रशांत राजावत. सम्पादक मीडिया मिरर

डॉ. प्रशांत राजावत, सम्पादक, मीडिया मिरर

pratap.prashant@rediffmail.com

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मेरे निवास स्थान दिल्ली में भारी बारिश जारी है, कडकड़ाती सर्दी के दौर में मैं आपको नए वर्ष पर आदर और स्नेह प्रेषित करता हूं और आशा करता हूं शायद ये साल हमें आनंद और उन्नति दे।

ये कैसा दौर है जब देश का किसान भारत सरकार से दो-दो हाथ करने राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं में महीनों से डटा है, सह धूप, घाम, पानी, पत्थर..। और देश के मुख्य विपक्षी दल के मुख्य नेता नानी के घर नया साल मनाने गए हैं। एक राजा के लिए जैसे राजधर्म प्रमुख है, वैसे ही एक राजनेता के लिए परिवार से पहले आम आदमी है। अमेठी की जनता ने बहुत सही फैसला किया और एक गैर राजनीतिक व्यक्ति को उसकी सही जगह भेजने की कोशिश की। इससे इतर जो एनडीए गठबंधन के खिलाफ एक महागठबंधन तैयार करके सीना फुलाते हैं एकजुटता का, उस महागठबंधन का भी कोई बड़ा नेता किसानों के साथ नहीं दिखा। अखिलेश यादव, मायावती, सीताराम येचुरी, उधर तेजस्वी यादव। कोई नहीं। राहुल, प्रियंका, सोनिया से इतर भी कांग्रेस के किसी प्रथम पंक्ति के नेता ने किसानों से मिलने में रुचि नहीं ली। ये देश का दुर्भाग्य है जब वो विपक्षहीन राजनीति का हिस्सा है, कहते हैं जहां विपक्ष नहीं होता वहां सरकार के फैसलों के खिलाफ आवाजें मुखर नहीं होतीं। जानी-मानी लेखिका अरुंधति रॉय कहती हैं कि गरीब तो गरीबों के लिए आवाजें उठाते ही हैं, लेकिन जब गरीबों की आवाजों के साथ अमीरों की आवाजें जुड़ जाती हैं तो उन आवाजों को तवज्जो मिलने लगती है। कड़ाके की सर्दी में अगर किसानों को राहुल, प्रियंका, अखिलेश, मायावती अन्य आदि का साथ मिलता तो नजारा कुछ औऱ ही होता।

मैं कभी कभी सोचता हूं कि देश का सबसे बड़ा हेयरस्टायलिस्ट यानी बाल कतरने वाला वो व्यक्ति है ( आलिम-हाकिम) जिसके सिर पर एक बाल नहीं है। हाहा। देश की सबसे बड़ी ब्यूटीशियन (शहनाज हुसैन) की ब्यूटी पर भी मुझे भरोसा नहीं। जैसे एआईआर से नकारी गई आवाज़ (अमिताभ बच्चन) आज देश की सबसे लोकप्रिय आवाज है।

सबसे भ्रष्टाचारी, अपराधी औऱ हिंसक व्यक्तियों के हवाले जनहित की जिम्मेदारी है, ये जनसेवक हैं। पाप, कुकर्म औऱ दुष्कर्म से अटे पड़े व्यक्तियों ( आशाराम, रामरहीम, रामकृपाल, राधे मां, नित्यानंद, निर्मल बाबा आदि) पर धर्म प्रसार का ठेका हैं। जिन पर स्वास्थ्य बचाने की जवाबदेही है वो सेहत का सौदा कर रहे हैं। देश में बाकायदा मेडिकल सेक्टर में रैकेट काम कर रहे हैं जिसमें देश के बड़े बड़े चिकित्सक औऱ हॉस्पिटल शामिल हैं। गत वर्ष एक स्टिंग में खुलासा हुआ था कि कैसे चिकित्सकों और लैब के बीच डील थी कि हर मरीज को जांच के लिए भेजना ही है और कमीशन फिक्स। हम दूध, सब्जियां, दालें, अनाज, आटा, खाद्य पदार्थ, औषधियां…जो भी पा रहे हैं वो किस स्तर की घटिया और खतरनाक हैं, हम सोच भी नहीं सकते। पर दिक्कत है ये कि हम विकल्पहीन देश में बदल चुके हैं। पिछले दिनों शुद्धता का दावा करने वाली प्रमुख भारतीय कंपनी जिसपर लोगों को आंख मूंदकर भरोसा है पतंजलि, उसके प्रोडक्ट भी जांच में मिलावटी निकले। जी हां पतंजलि के शहद में चीन से मंगाई हुई शुगर सीपर मिलाई गई थी।

ये कैसी बिडम्बना है हमारे दौर की कि हमें शुद्ध खाद्य पदार्थ नसीब नहीं है। यहां तक कि शुद्ध हवा, पानी भी नहीं मिल रहा। दिल्ली में प्रतिवर्ष सर्दियों में वायु गुणवत्ता सूचकांक अति संवेदनशील स्तर पर पहुंच जाता है। दिल्ली सरकार ने ऑड इवन फार्मूला इसीलिए लाया, पर उससे बहुत ज्यादा राहत नहीं मिली। कहा ये भी जा रहा था कि पिछली बार शुद्ध हवा के ऑक्सीजन सिलेंडर भी बिक रहे थे। पानी तो बहुत पहले से घर घर में बिक ही रहा है। बतौर दिल्ली निवासी हमें यमुना का पानी पेयजल के रूप में दिल्ली सरकार उपलब्ध  कराती है, मैं पिछले महीने भर से मीडिया में सरकार के जल संसाधन प्रमुख राघव चड्ढा का बयान पढ़ रहा हूं हर तीसरे दिन वो कह रहे हैं कि यमुना के पानी में अमोनिया बढ़ा, पानी सप्लाई होगी प्रभावित। मतलब यमुना के पानी में इतना अमोनिया हर सर्दी के सीजन में आ जाता है कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी उसे ट्रीट नहीं कर पाते अपनी क्षमता अनुसार। लेकिन हमें इन सबके साथ ही जीना है औऱ जी ही रहे हैं।

मैं दैनिक भास्कर में एक रिपोर्ट पढ़ रहा था कि झारखंड के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल रिम्स के डायरेक्टर की हाल ही में नियुक्त की गई है, जब वो ज्वाइन करने पहुंचे और अपने बंगले में रहने के लिए गए तो पता लगा कि उनके बंगले में कैदी लालू प्रसाद यादव रह रहे हैं। मतलब न्यायालय से सजा पाया कैदी जिसे जेल में रखा गया है, वो जेल में न रहकर किसी औऱ जगह नहीं सीधे रिम्स प्रमुख के आलीशान बंगले में रह रहा है, और खबर ये भी आई कि रिम्स प्रमुख ने जब अपना ही बंगला मांगा तो उन्हें दिया नहीं गया। फिलहाल वो रहने के लिए जगह तलाश रहे हैं। ऐसा फिल्मों में होता है पर ये सच में है। दरअसल झारखंड सरकार में लालू की पार्टी का समर्थन है और वहां लालू राज चलता है। परसों में हरियाणा की एक खबर पढ़ रहा था कि पति को बंधक बनाकर उसी के सामने पत्नी से पांच लोगों ने गैंग रेप किया। लॉकडाउन के दौरान एक महिला जो अपने घर जा रही थी किसी अंजान व्यक्ति से सही रास्ता पूछा तो वो रास्ता बताने के बहाने बियाबान में ले गया औऱ रेप किया। हैदराबाद घटना में मदद के बहाने रेप किया औऱ मरने के बाद महिला चिकित्सक के शव के साथ भी रेप करते रहे। कई मामलों में बेटे ने मां के साथ औऱ पिता ने पुत्री के साथ रेप किया, ये भी हम आए दिन अब खबरों में पढ़ते हैं। ये कैसा संकीर्ण दौर है। जिन मीडिया संस्थानों पर खबरें दिखाने की जिम्मेदारी है वो विज्ञापन के बोझ तले दब चुके हैं और खबरों के रूप में भी विज्ञापन ही परोस रहे हैं। जिसे मीडिया की भाषा में पेड न्यूज बुलाते हैं। आम नागरिकों के सामने वर्तमान में सही सूचना पाना एक बहुत बड़ी चुनौती है, इसीलए अब फेक न्यूज बताने के लिए हर मीडिया संस्थान एक कॉलम या स्लॉट चला रहा है। अल्ट न्यूज जैसे तो कई संस्थान पूरी तरह से फेक न्यूज के भंडाफोड़ करने के काम में लगे हुए हैं। बावजूद ये प्रसार बहुत ज्यादा है। कई बार तो फेक न्यूज इतनी ज्यादा प्रसारित हो जाती है कि मूल न्यूज दब जाती है। फेंक न्यूज का प्रसार भी तथाकथित जिम्मेदार लोगों औऱ संगठनों द्वारा ही किया जा रहा है।

खबरों की वास्तविकता खत्म करने का खेल जिस तरह मीडिया द्वारा ही चल निकला है वाकई सीधे साधे आम आदमी का जान पाना मुश्किल है कि वाकई सही और गलत क्या है।

खैर चीजें अपने सबसे निम्न स्तर की ओर अग्रसर हैं, चाहे वो वस्तु हो, व्यक्ति हो, या स्थान या सोच। जल, जंगल, जमीन, वायु, वातावरण की गुणवत्ता स्तर पहले जैसा नहीं रहा। गंगा का पानी अब अमृत तुल्य नहीं रहा। गेरुआ पहनने वाले बाबा अब दुष्कर्मी और व्यापारी हैं, कुछ सलाखों के पीछे सजा काट रहे हैं।

बावजूद हम नए साल में उम्मीद के साथ आगे बढ़ेंगे औऱ अपने स्तर पर बेहतर समाज, बेहतर सोच, बेहतर स्वास्थ्य के लिए संकल्पित होंगे। हम अपने स्तर पर निश्चित ही अपने स्वास्थ्य के लिए, अपने वातावरण के लिए, अपने समाज के लिए योगदान दे सकते हैं। जो गांव में हैं वो गांव में या गांव के आसपास रोजगार के विकल्प देखें, नर्क औऱ प्रदूषण की खान बन चुके बड़े शहरों की ओर पलायन न करें। स्वाथ्य के लिए नियमित योग, प्रणायाम, कसरत, दौड़ को दिनचर्या में शामिल करें। बेहतर साहित्य पढ़ें। इससे एक दृष्टि मिलेगी। खाद्य पदार्थों को लेकर सचेत रहें और इनकी काट करने के लिए आंवला, एलोवेरा, गिलोय जैसी औषधियों को नियमित तौर पर लें। नशे और नशेडियों से दूरी बनाएं। शरीर को स्वस्थ रखना आगे आने वाले दौर में एक चुनौती मान लिया जाएगा, ये आप देख लेना। जैसे जापान में निर्धारित साइज से ज्यादा कमर मोटी होने पर टैक्स लिया जाता है सरकार द्वारा। नियमित तौर पर उपयोग किए जाने वाले उत्पाद साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, फेसवाश, फेसक्रीम आदि। इन उत्पादों का एकदम देशी विकल्प ढूढ़ने की जरूरत है जो आसानी से उपलब्ध है। और ऐसे हम एक बेहतर स्वास्थ्य के साथ इस साल में बने रहेंगे ऐसी आशा है..

अपना ख्याल रखिए,

नमस्कार, प्रणाम।

हां मुझे एक पत्रकारिता की छात्रा अरुणिता ने उपहार में एक टाइ भेजी थी और उन्होंने कहा था कि मैं नएवर्ष के पहले दिन उसे पहनूं और तस्वीर उन्हें भेजूं. पर मैं ऐसे नहीं कर सका। लेकिन मैं जल्द उनके आदेश का पालन करूंगा।

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