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लोकसभा टीवी औऱ राज्ससभा टीवी का विलय, मिलकर बना संसद टीवी

दोनों चैनलों के विलय की अधिसूचना
अधिसूचना

मीडिया मिरर न्यूज, दिल्ली।

भारतीय संसद के अधीन चलने वाले चैनल लोकसभा टीवी और राज्यसभा टीवी का आपस में विलय हो गया है और इन दोनों चैनलों को मिलाकर अब एक चैनल बनाया गया है जिसका नाम संसद टीवी रखा गया है। दोनों चैनलों के मर्ज करने की चर्चाएं काफी समय से थीं। भूमिका बनाई जा रही थी, चैनलों से लगातार छंटनी जारी थी। कहा ये भी जा रहा था कि राज्यसभा टीवी के पास जहां पर्याप्त संसाधन, स्टाफ, जगह, सुविधाएं हैं तो वहीं लोकसभा टीवी असुविधाओं से जूझ रहा है। संसद की लायब्रेरी के पास एक छोटी सी जगह में इसका संचालन होता रहा है।

कई कारणों को देखते हुए दोनों को मर्ज किया गया है। नीति निर्माताओं को ये भी लग रहा था कि दो चैनलों के लिए फिजूल में बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है जबकि दोनों चैनलों का कार्य़ एक चैनल के जरिए एक स्थान से हो सकता है। बहरहाल इस घटना से दोनों चैनलों पर काम करने वालों पर जरूर थोड़ा तनाव बढ़ सकता है क्योंकि खबरें आ रही हैं कि एक चैनल होने के साथ ही स्टाफ में कटौती संभव है, लेकिन जिनके कांन्ट्रेक्ट पूरे नहीं हुए हैं उनको शायद अनुबंध पूरा होने तक काम की मोहलत दी जाए। हालांकि इस प्रक्रिया के बाद एक बात तो तय है कि अब संसद टीवी से पब्लिक ओरिएंटेड कार्यक्रम की अपेक्षा शायद ही पूरी हो, ये चैनल पूरी तरह से विधायिका प्रणाली का चैनल होगा।

रवि कपूर होंगे मुख्यकर्ता-धर्ता

1986 बैच के असम मेघालय कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रवि कपूर को एक साल के लिए संसद टीवी का सीईओ नियुक्त किया गया है। तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति कर दी गई है।

सोमनाथ चटर्जी थे सूत्रधार

तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने संसदीय चैनलों की आधारशिला रखी थी। 24 जुलाई 2006 से 24 घंटे का लोकसभा टेलीविजन शुरू किया गया।

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